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33वां गुलदाउदी शोः दस हजार गमलों में खिलने लगे फूल, एक जगह 268 किस्में हो रहीं तैयार
Tue, 19 Nov 2019 10:53 AM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 19 Nov 2019 10:53 AM IST
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गुलदाऊदी के फूलों की देखभाल करते माली
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर-33 स्थित टैरेस्ड गार्डन के सामने 10 हजार से भी अधिक गमलों में गुलदाऊदी की 268 किस्में तैयार की जा रही हैं। गमलों में लगाए फूल खिलने भी लगे हैं। गुलदाऊदी के रंग-बिरंगे खिले फूलों को देखकर वहां काम कर रहे माली और गुरदाऊदी शो के इंचार्ज खुश हैं।
नगर निगम की ओर से आयोजित होने वाला यह 33वां गुलदाऊदी शो है। ये किस्में नगर निगम की ओर से दिसंबर के पहले सप्ताह में होने वाले 33वें गुलदाऊदी शो में प्रदर्शित किया जाएगा। दिसंबर आते आते सभी गमलों में फूल खिल जाएंगे। सभी फूलों के खिल जाने के बाद पूरी तरह से 268 किस्मों के बारे में पता चल पाएगा।
इन दवाइयों का हो रहा स्प्रे
इमिदा क्लोफाइड, रोगर, ब्लाइटॉक्स, बबिस्टान सहित अन्य दवाइयां गुलदाऊदी के पौधों और फूलों पर छिड़काव (स्प्रे) की जा रही हैं। इसके स्प्रे करने से पौधे मजबूत होते हैं। सर्दी के सीजन में गुलदाऊदी में सबसे पहले फूल आते हैं। इसके कारण फंगस और कीड़े इन पर हमला करते हैं। इससे ये दवाइयां बचाव करती हैं।
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गुलदाऊदी की किस्में
गुलदाऊदी शो में स्नो बॉल, सोनार बंगला, किकू ब्लोकी, महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी, मिस इंडिया, चंद्रमा, सन, गोल्डन जुबली, सिल्वर जुबली, राजा, कवर गर्ल, रेड वाइन, डेकोरेटिव पिंग, सुपर ग्लो, कोका सूजन, कासा गरंडा, पिंब क्लाउड, सिल्क वरोकल, ड्रीम कैस्टल सहित 268 किस्में उगाई जा रही हैं।
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नगर निगम की ओर से आयोजित होने वाला यह 33वां गुलदाऊदी शो है। ये किस्में नगर निगम की ओर से दिसंबर के पहले सप्ताह में होने वाले 33वें गुलदाऊदी शो में प्रदर्शित किया जाएगा। दिसंबर आते आते सभी गमलों में फूल खिल जाएंगे। सभी फूलों के खिल जाने के बाद पूरी तरह से 268 किस्मों के बारे में पता चल पाएगा।
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इन दवाइयों का हो रहा स्प्रे
इमिदा क्लोफाइड, रोगर, ब्लाइटॉक्स, बबिस्टान सहित अन्य दवाइयां गुलदाऊदी के पौधों और फूलों पर छिड़काव (स्प्रे) की जा रही हैं। इसके स्प्रे करने से पौधे मजबूत होते हैं। सर्दी के सीजन में गुलदाऊदी में सबसे पहले फूल आते हैं। इसके कारण फंगस और कीड़े इन पर हमला करते हैं। इससे ये दवाइयां बचाव करती हैं।
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गुलदाऊदी की किस्में
गुलदाऊदी शो में स्नो बॉल, सोनार बंगला, किकू ब्लोकी, महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी, मिस इंडिया, चंद्रमा, सन, गोल्डन जुबली, सिल्वर जुबली, राजा, कवर गर्ल, रेड वाइन, डेकोरेटिव पिंग, सुपर ग्लो, कोका सूजन, कासा गरंडा, पिंब क्लाउड, सिल्क वरोकल, ड्रीम कैस्टल सहित 268 किस्में उगाई जा रही हैं।
ऐसे तैयार होता है गुलदाऊदी
पहले मदर प्लांट को क्यारियों में लगाया जाता है। मदर प्लांट को मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह लगाया जाता है। 20 से 25 दिनों में इसमें जड़ें आती हैं। जड़ें आने के बाद जून के अंतिम या जुलाई के पहले सप्ताह से इसे गमलों में लगाया जाता है। मदर प्लांट के बढ़ जाने के बाद कटिंग की जाती है। कटिंग किए गए 100 से 150 डंठलों को एक साथ बंडल बनाकर रेत में लगाया जाता है।
गमलों से पहले जमीन पर होता है ट्रांसप्लांट
21 दिनों में इसमें जड़ें आनी शुरू हो जाती हैं। जड़ें आने के बाद इसे जमीन में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है। इनकी तीन बार कटिंग की जाती है। जब इनके डंठल मोटे और मजबूत हो जाते हैं जो चौथी कटिंग के बाद उन्हें रेत में लगाते हैं। इसे रेत में 21 दिनों तक रखा जाता है।
सीजनल फूलों की तैयार की जाती है पनीरी
सेक्टर-33 की नर्सरी में सीजनल फूलों की पनीरी भी तैयार की जाती है। इनमें जीनिया, ग्लाडिया, कोचिया, गंभरीना, कांसकॉम, सलोसिया, कॉस्मॉस है। ये गर्मी के सीजन के फूल हैं। इसके अलावा सर्दी के फूलों में सालविया, पेंजी, पिरोनिया, गेंदा, लैजम, बरबीना शामिल हैं।
गमलों से पहले जमीन पर होता है ट्रांसप्लांट
21 दिनों में इसमें जड़ें आनी शुरू हो जाती हैं। जड़ें आने के बाद इसे जमीन में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है। इनकी तीन बार कटिंग की जाती है। जब इनके डंठल मोटे और मजबूत हो जाते हैं जो चौथी कटिंग के बाद उन्हें रेत में लगाते हैं। इसे रेत में 21 दिनों तक रखा जाता है।
सीजनल फूलों की तैयार की जाती है पनीरी
सेक्टर-33 की नर्सरी में सीजनल फूलों की पनीरी भी तैयार की जाती है। इनमें जीनिया, ग्लाडिया, कोचिया, गंभरीना, कांसकॉम, सलोसिया, कॉस्मॉस है। ये गर्मी के सीजन के फूल हैं। इसके अलावा सर्दी के फूलों में सालविया, पेंजी, पिरोनिया, गेंदा, लैजम, बरबीना शामिल हैं।