Haryana News: कैसे मिलेगी भ्रष्टाचारियों को सजा? विजिलेंस ब्यूरो के 32 प्रतिशत गवाह अदालत में मुकरे
विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साल 90 जांच पूरी हैं। जांच में 53 प्रतिशत शिकायतें झूठी पाई हैं, इसलिए 48 फाइल बंद कर दी हैं। यह अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें थी।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ हरियाणा सरकार की जीरो टोलरेंस नीति के तहत राज्य सतर्कता ब्यूरो ताबड़तोड़ तरीके से रेड करके आरोपियों को गिरफ्तार तो कर रही है लेकिन 52 प्रतिशत से अधिक भ्रष्टाचार के आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती है। पिछले पांच साल के रिकॉर्ड की बात करें तो ब्यूरो के 32 प्रतिशत गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर चुके हैं जिससे आरोपियों को राहत मिल गई।
इस समय हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो की गिरफ्तार किए गए आरोपियों को सजा दिलाने की प्रतिशत 47.50 फीसदी है। 2017 से अब तक के 250 मामलों की समीक्षा के दौरान सामने आया है कि 32 प्रतिशत गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर गए। मुकरने वालों में 8 प्रतिशत शेडो गवाह, 10 प्रतिशत सरकारी गवाह या फिर ड्यूटी मजिस्ट्रेट और शेष शिकायतकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा, 20 प्रतिशत ऐसे मामले हैं, जिनमें अदालत के फैसले के खिलाफ ब्यूरो या फिर शिकायकर्ता उच्च अदालत में चले जाते हैं। विजिलेंस ब्यूरो का लक्ष्य सजा की प्रतिशत को 75 प्रतिशत तक ले जाने है। इसके लिए ब्यूरो ने अपनी कार्यप्रणाली में काफी बदलाव किए हैं।
53 प्रतिशत शिकायतें पाई झूठी
विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साल 90 जांच पूरी हैं। जांच में 53 प्रतिशत शिकायतें झूठी पाई हैं, इसलिए 48 फाइल बंद कर दी हैं। यह अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें थी।
टूटा दस साल का रिकॉर्ड: 170 रेड में, 220 गिरफ्तार
साल 2022 की बात करें तो भ्रष्टाचार के मामलों का रिकॉर्ड टूटा है। कुल 170 ट्रैप के मामलों में 220 अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान छह करोड़ रुपये की राशि भी बरामद की गई है। इसके अलावा 66 जांच और विशेष चेकिंग पर मामले दर्ज किए। साल में कुल 246 केस दर्ज किए गए। यह पिछले दस साल में सबसे अधिक हैं। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो हरियाणा के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने यह जानकारी दी।
सबसे अधिक पुलिस कर्मी पकड़े
विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 2 इंस्पेक्टर एसएचओ, राजस्थान पुलिस के एक सेवानिवृत्त डीएसपी और करनाल में एमवीओ के रूप में कार्यरत एक अन्य इंस्पेक्टर सहित 46 पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया। राजस्व विभाग के 33 अधिकारी, बिजली निगमों के 24, शहरी स्थानीय निकायों के 14, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के 5, परिवहन के 5, शिक्षा विभाग के 4, आबकारी व कराधान के 3, सहकारिता के 3, हरियाणा खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के 3, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 3, बागवानी के 3, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के 3, स्वास्थ्य के 2, एचएसवीपी के 2, खनन और भूविज्ञान के 2, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2, सामाजिक न्याय विभाग 2, सिंचाई के 2, वन के 2 और पशुपालन एवं डेयरी, रोजगार, मत्स्य पालन, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, गृह रक्षक, हाउसिंग बोर्ड, एचपीएचसी, उद्योग और वाणिज्य, श्रम निर्माण कल्याण, जेल, पंचायती राज, अभियोजन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, कोषागार और लेखा तथा वक्फ बोर्ड जैसे 15 अन्य विभागों के कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों में 5,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।