Punjab: पंजाब राजभवन का घेराव करने जुटे हजारों किसान, बैरिकेड तोड़ा, आश्वासन के बाद लौटे
मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब के पास 33 जत्थेबंदियों के आह्वान पर हजारों किसान एकत्र हुए। यहां से इन किसानों ने चंडीगढ़ में राजभवन तक मार्च करने का कार्यक्रम बनाया था लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने बैरिकेडिंग करके मोहाली से चंडीगढ़ आने वाले रास्ते रोक दिए। बाद में राज्यपाल के एडीसी ने वहां पहुंचकर किसान नेताओं से ज्ञापन प्राप्त किया।
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अपनी मांगों को लेकर पंजाब राजभवन का घेराव करने जा रहे संयुक्त किसान मोर्चा के अगुवाई में हजारों किसानों को सेक्टर 50 के पास रोक दिया गया। देर शाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद 33 किसान नेताओं ने अपना धरना समाप्त किया। साथ ही, कहा जल्द उनकी मांगों पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो आठ दिसंबर को बैठक कर रणनीति तय करेंगे और बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। इससे पहले किसानों ने चंडीगढ़ में घुसने की कोशिश की। गुस्साए किसानों ने चंडीगढ़ सीमा पर लगे बैरिकेड को भी तोड़ दिया। हालांकि इस दौरान पंजाब व चंडीगढ़ की भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के डीजीपी गौरव यादव भी बार्डर पर डटे रहे।
पंजाब भर से आए किसान मोहाली के फेज-8 में गुरुद्वारा श्री अंब साहिब के पास स्थित दशहरा ग्राउंड में इकट्ठे हुए। किसानों के धरने के कारण शहर में ट्रैफिक व्यवस्था भी बिगड़ी रही। ट्रैफिक की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मोहाली पुलिस ने रूट डायवर्ट कर रखे थे। फेज-7, वाईपीएस चौक और फेज 7-8 लाइट प्वाइंट के अलावा शहर के अन्य इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम रहा।
मोहाली पुलिस का बैरिकेड तोड़ा, चंडीगढ़ पुलिस ने घुसने नहीं दिया
भारी संख्या में किसानों के पहुंचने की पहले से ही सूचना होने पर पुलिस के जवानों और अर्द्धसैनिक बलों को भी सीमा पर तैनात किया गया था। सुबह 11 बजे किसान नेताओं ने स्टेज का संचालन शुरू किया और दोपहर ढाई बजे यहां से चंडीगढ़ की तरफ कूच किया। चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-50 के पास काफी सुरक्षा और बैरिकेडिंग करने के साथ ही भारी संख्या में पुलिस जवान तैनात कर रखे थे। इस मौके पर चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप सिंह चहल निगरानी कर रहे थे। किसानों को जब वहां से आगे नहीं जाने दिया गया तो वे वहीं पर डेरा डालकर बैठ गए। करीब डेढ़ घंटे के बाद यूटी के एडीसी हरजीत सिंह संधू ने मौके पर पहुंचकर किसानों का मांगपत्र लिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया।
किसान आंदोलन नहीं टूटा, आज भी उतनी ही ताकत: उगराहां
विशाल मार्च में पंजाब के 33 किसान यूनियनों ने समर्थन दिया। इस दौरान यूनियन उगराहां के नेता जोगिंदर सिंह ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार लगातार किसान आंदोलन के टूटने की बात करती आई हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है और आज इस बात को लोगों ने भी साबित कर दिया है। आंदोलन में आज भी उतनी ताकत है। उन्होंने सिंघु बार्डर पर प्रदर्शन पहला चरण था। आज उन्होंने दूसरे चरण के तहत प्रदर्शन किया है।
वाईपीएस चौक की तरफ जाने वाले रास्ते किए डायवर्ट
शहर में किसानों के धरने के चलते पुलिस ने वाईपीएस चौक की तरफ जाने वाले सभी रास्ते डायवर्ट कर रखे थे। फेज-8 से वाईपीएस चौक, कुंभड़ा चौक से वाईपीएस चौक और फेज-8 से वाईपीएस चौक, नेचर पार्क रोड से वाईपीएस चौक की तरफ आने वाला रास्ता भी पुलिस ने बंद किया हुआ था।
मुख्य मार्ग बंद, रिहायशी इलाकों से गुजरा ट्रैफिक
किसानों का आंदोलन होने के चलते फेज-7 का मुख्य मार्ग बंद था। इस कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कत हुई। इस कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में भी कई जगह दोपहर के समय जाम लग गया। इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी कुछ देर के लिए ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई।
ये हैं किसानों की मांगें
- 1. स्वामीनाथन आयोग के अनुसार सभी फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी देते हुए कानून बनाया जाए। यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी किसानों की मांगों के विपरीत है, इसलिए उसे बर्खास्त करके नए कमेटी बनाई जाए।
- 2. 80 प्रतिशत से अधिक किसान भारी कर्ज के चलते आत्महत्या करने को विवश हैं। ऐसे में किसानों का कर्ज माफ किया जाए।
- 3. इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2022 को वापस लिया जाए।
- 4. लखीमपुर खीरी कांड के दोषी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए। साथ ही मरने वाले किसानों को मुआवजा जल्द दिया जाए।
- 5. सूखा, बाढ़, फसल संबंधी रोग आदि से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार सभी फसलों के लिए व्यापक और प्रभावी फसल बीमा लागू करे।
- 6. सभी मध्यम, लघु और सीमांत किसानों, महिला किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए प्रति माह 5000 रुपये की किसान पेंशन योजना लागू की जाए।
- 7. किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ जो फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
- 8. किसान आंदोलन के दौरान शहीद सभी किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। वहीं सिंघु मोर्चा में शहीद किसानों के स्मारक के निर्माण के लिए जमीन का आवंटन किया जाए।