चक्की दरिया का रौद्र रूप: रेलवे के बाद सड़क पुल खतरे में, 27 परिवारों ने किया पलायन, खौफ में लोग
पंजाब-हिमाचल सीमा पर चक्की दरिया पर बना रेलवे पुल शनिवार को खड्ड में आई बाढ़ में बह गया। वहीं, अब पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना पुल भी खतरे की जद में है। खड्ड में पानी का बहाव एक तरफ मुड़ जाने से सड़क मार्ग पर बने पुल के पिलरों के पास भी 8-10 फुट गहरे गड्ढे बन गए हैं।
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हिमाचल में भारी बरसात के बाद चक्की दरिया पठानकोट में कहर बरपा रहा है। पठानकोट के भदरोआ, बेदी बजरी कंपनी और सैली कुलियां सबसे प्रभावित हैं। शुक्रवार और शनिवार को आई बाढ़ से भारी कटाव से लोग दहशत में हैं। बता दें कि उक्त क्षेत्रों में तीन हजार से अधिक परिवार रहते हैं जो हर पल दहशत में गुजारते हैं।
शनिवार को आई बाढ़ के बाद वार्ड 12 भदरोआ और बेदी बजरी कंपनी के 27 परिवारों ने पलायन कर लिया है। अन्य कई परिवार भी सामान समेट तैयारी कर रहे हैं। कारण यह है कि उक्त क्षेत्र में चक्की दरिया कभी 500 मीटर दूरी पर था। लेकिन अब दरिया से घरों की दूरी महज 20 फुट रह गई है। लोगों का कहना है कि क्या पता हिमाचल में भारी बरसात से चक्की दरिया का उफान उन्हें घरों समेत बहाकर न ले जाए। लोग अपने घरों से सामान समेट कर रिश्तेदारों और किराये के मकानों में रह रहे हैं।
सरकार ने सुध न ली तो दरिया में समा जाएगा बेदी बजरी कंपनी
मिंटू, सुरेंद्र, पूर्ण चंद, स्वर्ण,भारत व सुमित ने कहा कि मोहल्ले में करीब 60 घर हैं। इसमें से 27 घरों पर मौत का साया मंडरा रहा है। शुक्रवार को चक्की का कटाव 10 फुट और बढ़ गया। पिछले 5 दिन में 20 फुट जमीन दरिया में समा चुकी है। लोगों में दहशत पैदा हो गई है। इस कारण लोगों ने अपना सामान बांध लिया है। ताकि, आपातकालीन में वह निकल सकें।
वार्डवासियों ने बताया कि शुक्रवार को कटान के दो दिन बीत चुके हैं। लेकिन, दुख की बात है कि अभी तक न तो अधिकारी और न ही कोई नेता यहां आया है, जबकि, हर साल कटाव रोकने पर करोड़ों रुपये खर्च करने की बात होती है। लेकिन असलियत में यहां कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब भी सरकार ने इसे गंभीरता से न लिया तो बेदी बजरी कंपनी दरिया में समा जाएगा।
रेलवे के बाद अब पठानकोट-मंडी चक्की खड्ड पुल पर भी खतरा
पंजाब-हिमाचल सीमा पर चक्की दरिया पर बना रेलवे पुल शनिवार को खड्ड में आई बाढ़ में बह गया। वहीं, अब पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना पुल भी खतरे की जद में है। खड्ड में पानी का बहाव एक तरफ मुड़ जाने से सड़क मार्ग पर बने पुल के पिलरों के पास भी 8-10 फुट गहरे गड्ढे बन गए हैं।
शुक्रवार को खड्ड में आई भयंकर बाढ़ के कारण सड़क मार्ग पर बने पुल के दो पिलरों के नीचे से फाउंडेशन निकल गई है। लोगों की सुरक्षा को देखते पंजाब और हिमाचल के अधिकारियों ने आपसी सहमति के बाद इस पुल को अस्थायी तौर पर सील कर दिया है। रविवार सुबह तड़के हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा और पंजाब के जिला पठानकोट के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पुल का जायजा लिया।
कंडवाल-लोधवां मार्ग से लोग पहुंच पाएंगे हिमाचल
बता दें कि यह पुल पठानकोट-मंडी नेशनल हाइवे पर है। पुल के उस पार नागनी माता का मंदिर है, जहां आजकल मेला चल रहा है। देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में नतमस्तक होने जाते हैं। वहीं, यह रास्ता नूरपुर, जसूर से सीधा जुड़ा होने के कारण लोगों की लाइफलाइन है। पुल पर से वाहनों की आवाजाही बंद होने से लोग परेशान हैं। लेकिन, वहां पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग है। यह 15 किमी अतिरिक्त लंबा है। मगर यहां कंडवाल-लोधवां मार्ग से पहुंच सकते हैं। प्रशासन ने वाहनों को इसी रूट पर डायवर्ट किया है।
प्रशासन की नाक के नीचे चला अवैध खनन का खेल
प्रशासन की नाक तले हो रहे अवैध खनन से पिछले लंबे समय से इन दोनों पुलों को नुकसान हो रहा था। इसके बावजूद शासन और प्रशासन इस पर नकेल कसने में पूरी तरह से विफल रहा। इसी का नतीजा है कि शनिवार को रेलवे पुल ताश के पत्तों की तरह पल भर में बिखर गया। वहीं अब सड़क मार्ग पर करोड़ों रुपये का बनाया गया पुल भी खतरे की जद में है।
जगतगिरी आश्रम का मुख्य रास्ता भी चढ़ा चक्की दरिया की भेंट
चक्की दरिया में उफान के चलते वर्ल्ड पीस टेंपल के नाम से मशहूर डेरा स्वामी जगतगिरी आश्रम का मुख्य रास्ता पानी में समा गया। स्थानीय लोग हिमाचल के क्रशर संचालकों के अवैध खनन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।