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पांच जिलों के 27.7 फीसदी लोगों में कोरोना एंटीबॉडी, कब संक्रमित और ठीक हुए, पता ही नहीं चला
Thu, 20 Aug 2020 11:08 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 20 Aug 2020 11:08 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : ANI
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पंजाब के कंटेनमेंट (संक्रमित) जोनों में 27.7 प्रतिशत लोगों में कोरोना एंटीबॉडी मिली है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि इतनी संख्या में लोग पहले ही कोविड से ग्रसित थे और इससे अब ठीक हो गए हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को कोविड समीक्षा बैठक बुलाई। इस दौरान पेश किए गए सर्वेक्षण के नतीजों में दिखाया गया कि कंटेनमेंट जोनों में सार्स कोव-2 एंटीबॉडीज का प्रसार सबसे अधिक अमृतसर जिले में 40 प्रतिशत रहा है।
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इसके बाद लुधियाना में 36.5 प्रतिशत, मोहाली में 33.2 प्रतिशत, पटियाला जिले में 19.2 प्रतिशत और जालंधर में 10.8 प्रतिशत रहा है। यह पंजाब का पहला विशिष्ट सर्वेक्षण है जो 1 से 17 अगस्त तक राज्य के पांच संक्रमित क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से चला। इसमें औचक (रेंडमली) तौर पर चुने गए 1250 व्यक्तियों के सैंपल लिए गए। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा आईसीएमआर के सहयोग से किए सर्वेक्षण सामान्य रहे। गौरतलब है कि दिल्ली ने अपने दूसरे सीरो सर्वेक्षण के नतीजे जारी किए। इसके अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में करीब 29 प्रतिशत सीरो पॉजिटिव थे।
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पांच जिलों में लिए 250-250 लोगों के सैंपल
पंजाब के विशिष्ट सर्वेक्षण के लिए पांच कंटेनमेंट जोनों को चुना गया, जहां कोविड के सबसे अधिक केस सामने आए हैं। पटियाला, मोहाली, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जिलों में से 250-250 लोगों के सैंपल लिए गए। रैंडम तौर पर चुने गए हर घर में से 18 साल से अधिक उम्र के एक बालिग व्यक्ति को सर्वेक्षण के लिए चुना गया।
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सभी जोन, जहां कोविड-19 के सबसे अधिक केस हैं, को मिलाकर कुल 27.7 प्रतिशत लोगों में सार्स कोव-2 एंटीबॉडीज के सीरो का प्रसार पाया गया। सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, शहरों के बाकी इलाकों में यह संख्या कम है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या शहरी इलाकों की अपेक्षा और भी कम है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट द्वारा सार्स कोव-2 एंटीबॉडीज (आईजीएम /आईजीजी) के प्रसार को देखना था।
राज्य सरकार के स्वास्थ्य सलाहकार विशेषज्ञों की टीम के प्रमुख डॉ. केके तलवार ने बताया कि प्रशिक्षित फील्ड सहायकों और लैब टेक्नीशियनों की टीम ने मेडिकल अफसर की निगरानी में डाटा एकत्रित किया। आशा और एएनएम ने इस सर्वेक्षण में जोनों में घरों की पहचान करने में मदद की। सर्वेक्षण का उद्देश्य समझाने के बाद लिखित तौर पर सहमति पत्र प्राप्त किया गया। रोगाणु विहीन हालत में लैब के टेक्नीशियनों ने खून का सैंपल लिया। ये सैंपल जिला जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में भेजे गए, जहां रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किया गया।