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एक और बेटी ने बढ़ाया मान, आर्मी में बड़ा पद 23 साल की उम्र में हासिल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 21 Aug 2016 09:20 AM IST
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मेवात की 23 साल की लड़की शहनाज बनी एडवोकेट जनरल
- फोटो : फाइल फोटो
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23 साल की साक्षी ने ओलंपिक में देश के लिए पदक जीता तो हरियाणा की एक और बेटी इसी उम्र में आर्मी में ऊंचे पद पर पहुंच गई। शिक्षित और मध्यम वर्गीय परिवार की मात्र 23 वर्षीय बेटी की आर्मी के ज्यूडिशियल विभाग में एडवोकेट जनरल के पद पर नियुक्ति हुई है।
ये पहली महिला हैं, जो इतने बड़े पद तक पहुंची हैं। शहनाज के और उनके परिवार वालों को मुबारकबाद देने के लिये लोगों का तांता लगा हुआ है। मात्र 23 वर्षीय शहनाज़ रिटायर्ड मेजर सूबेदार आसू खान की बेटी हैं। शहनाज़ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया।
शहनाज ने बताया कि किस तरह अपने दूसरे प्रयास में आर्मी सिलेक्शन बोर्ड की लिखित परीक्षा को पास किया। किस तरह वो लोग फेस रीडिंग से लेकर आपके एटीटयूड और पर्सनल्टी के साथ साथ आपके अनुभव को भी काफी बारीकी से रीड करते है।
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सबसे आखिर में जब मेडिकल टेस्ट की बारी आई तो कोहनी के जोड़ के एंगल में मामूली सा फर्क और पैर के अंगूठे में हलकी सूजन की वजह से उसको रिजेक्ट कर दिया गया। फिर आर्मी से लेकर एम्स तक की भागदौड़ में इनको अंतत: कामयाबी मिली।
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ये पहली महिला हैं, जो इतने बड़े पद तक पहुंची हैं। शहनाज के और उनके परिवार वालों को मुबारकबाद देने के लिये लोगों का तांता लगा हुआ है। मात्र 23 वर्षीय शहनाज़ रिटायर्ड मेजर सूबेदार आसू खान की बेटी हैं। शहनाज़ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया।
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शहनाज ने बताया कि किस तरह अपने दूसरे प्रयास में आर्मी सिलेक्शन बोर्ड की लिखित परीक्षा को पास किया। किस तरह वो लोग फेस रीडिंग से लेकर आपके एटीटयूड और पर्सनल्टी के साथ साथ आपके अनुभव को भी काफी बारीकी से रीड करते है।
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सबसे आखिर में जब मेडिकल टेस्ट की बारी आई तो कोहनी के जोड़ के एंगल में मामूली सा फर्क और पैर के अंगूठे में हलकी सूजन की वजह से उसको रिजेक्ट कर दिया गया। फिर आर्मी से लेकर एम्स तक की भागदौड़ में इनको अंतत: कामयाबी मिली।