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Chandigarh News: 22 करोड़ खर्च, फिर भी बदहाल पड़े साइकिल ट्रैक

Sun, 31 May 2026 01:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2026 01:14 AM IST
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22 crore rupees spent, yet the cycle track remains in a dilapidated condition
चंडीगढ़। प्रशासन ने चंडीगढ़ को साइकिल सिटी बनाने के लिए 22 करोड़ रुपये खर्च कर 210 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक नेटवर्क तैयार किया है। इसके बावजूद शहर के अधिकतर सेक्टरों में साइकिल ट्रैक खस्ता हालत में पड़े हैं। सेक्टर-29, 30, 31, 32, 44, 53, 20 और 27 की ओर साइकिल ट्रैक की स्थिति बेहद खराब है। कई जगह साइकिल ट्रैक के बीच रास्ते में गटर के ढक्कन, पेड़ और रात के समय लाइटिंग की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई सेक्टरों में लोगों ने अपने मकानों के पीछे अतिरिक्त दरवाजे बना लिए हैं जिससे साइकिल ट्रैक पूरी तरह बाधित हो गए हैं। खासकर सेक्टर-29, 30 और 31 में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर लोगों ने साइकिल ट्रैक पर ही वाहनों की पार्किंग बना ली है।
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चंडीगढ़ प्रशासन ने पिछले पांच वर्षों में साइकिल ट्रैक विकसित करने पर करीब 22 करोड़ खर्च किए हैं। इसके बावजूद शहर के अधिकांश साइकिल ट्रैक बदहाली का शिकार हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर ट्रैक पर घास उग आई है, कहीं ट्रैक टूट चुके हैं तो कई जगह वाहनों की पार्किंग होने से साइकिल चालकों के लिए उनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। प्रशासन की ओर से पिछले पांच वर्षों में करीब 210 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का निर्माण कराया गया है। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग नजर आती है। शहर के वीआईपी सेक्टरों और प्रमुख मार्गों पर ही साइकिल ट्रैक बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन अधिकांश आवासीय और दक्षिणी सेक्टरों में ट्रैक रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो चुके हैं। शहर के सेक्टर-32, 33, 39, 40, 42, 43, 45, 46, 52 और 53 सहित कई क्षेत्रों में साइकिल ट्रैक टूटे हुए हैं। कई स्थानों पर ट्रैक की सतह उखड़ चुकी है, जिससे साइकिल चलाने वालों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कुछ ट्रैक ऐसे भी हैं, जहां झाड़ियां और घास उग आई है।
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पेरीफेरी क्षेत्रों में अब भी नहीं पहुंचे ट्रैक
शहर के बाहरी और पेरीफेरी क्षेत्रों में आज भी साइकिल ट्रैक का नेटवर्क अधूरा है। कई इलाकों में ट्रैक बनाने की योजनाएं वर्षों से कागजों में हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुख्य सड़कों पर वाहनों के बीच साइकिल चलानी पड़ती है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। साइकिल ट्रैक केवल बनाने से उद्देश्य पूरा नहीं होता। नियमित रखरखाव, अतिक्रमण हटाना और सुरक्षित डिजाइन भी उतने ही जरूरी हैं। चंडीगढ़ में कई ट्रैक ऐसे हैं जहां कट, मोड़ और सड़क क्रॉसिंग का डिजाइन साइकिल चालकों के लिए असुविधाजनक है।
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बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट को भी लग रहा झटका
चंडीगढ़ में साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पब्लिक बाइक शेयरिंग (पीबीएस) सिस्टम शुरू किया गया था। स्मार्ट बाइक के नाम से संचालित यह देश के सबसे बड़े और घने साइकिल शेयरिंग नेटवर्क में शामिल है। शहर में 5,000 से अधिक साइकिलें और 617 डॉकिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। हालांकि खराब ट्रैक और असुरक्षित मार्गों के कारण बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि करोड़ों खर्च करने के बावजूद यदि ट्रैक उपयोग लायक नहीं हैं तो यह पब्लिक फंड की बर्बादी है। लोगों ने प्रशासन से ट्रैकों की मरम्मत, सफाई और नियमित निगरानी की मांग की है।
प्रशासन ने बुधवार को नो कार डे की अपील की
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की अपील पर हर बुधवार प्रशासनिक अधिकारी नो कार डे अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रशासक ई-कार्ट से, मुख्य सचिव साइकिल पर तो डीसी सहित कई अन्य अधिकारी बुधवार को पैदल ही कार्यालय पहुंचते हैं। प्रशासक ने शहर के लोगों से भी अपील की है कि वे ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिल या शेयरिंग जैसी सुविधाओं का प्रयोग करें।
स्मार्ट बाइक का किराया
समय अवधि — शुल्क
एक सप्ताह — 199 रुपये
एक महीना — 399 रुपये
तीन महीने — 599 रुपये
एक वर्ष — 1,999 रुपये

साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले ट्रैफिक को नियंत्रित करना भी जरूरी है। शहर के कई हिस्सों में साइकिल ट्रैक बेहद अच्छे हैं लेकिन कई जगह रखरखाव नहीं है। साइकिल ट्रैक पर लोग अपने टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर चलाने लगते हैं। यह साइक्लिस्ट के लिए खतरनाक है। ऐसे में प्रशासन को साइकिल ट्रैक सुरक्षित बनाने की जरूरत है। -मिशा बराड़, साइक्लिस्ट

चंडीगढ़ में पूरे देश के मुकाबले सबसे ज्यादा साइकिल ट्रैक हैं लेकिन कई जगह उनकी हालत खराब है। साइकिल ट्रैक के बीच में पेड़, गड्ढे और गटर के खुले ढक्कन पड़े हैं। रात के समय कई साइकिल ट्रैक पर लाइटिंग की व्यवस्था भी नहीं है, जिसके कारण साइकिलिस्ट मजबूरन मुख्य मार्गों पर साइकिलिंग करते हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। मनदीप ढुल्ल, साइक्लिस्ट
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