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चुनाव परिणाम 2019: केजरीवाल का ‘दिल्ली मॉडल’, राजकुमार सैनी का ‘ओबीसी’ पैंतरा, ध्वस्त हो सकता
Mon, 20 May 2019 10:22 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 20 May 2019 10:22 AM IST
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आज जजपा गठबंधन
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम कई राजनीतिक पार्टियों को आइना दिखा सकते हैं। साथ ही वर्तमान की झलक दिखाते हुए उन्हें भविष्य के लिए इशारा भी करेंगे। ऐसी ही पार्टियों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी भी शामिल है।
आप ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी हरियाणा की सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। लेकिन दस की दस सीटों पर आम आदमी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। खैर, उस वक्त आप नई पार्टी थी। लेकिन अब वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पहले तो आप हरियाणा की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करती रही। लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आया, तो आप ने हरियाणा में ‘महागठबंधन’ की संभावनाओं को हवा दे दी।
आप हरियाणा में कांग्रेस और इनेलो से अलग हुए नए दल जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ महागठबंधन कर लोकसभा के रण में उतरना चाहती थी। आखिरी समय तक आप हरियाणा में इस गठबंधन के लिए जोर लगाती रही। लेकिन आप की दाल नहीं गली। हरियाणा में कांग्रेसी दिग्गजों ने सूबे में आप के साथ कदमताल करने से साफ इनकार करते हुए सूबे में अकेले ही लड़ने के अपने इरादे से कांग्रेस हाईकमान को अवगत करवा दिया था।
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मायूस आप ने आखिरकार जजपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस गठबंधन में आप को सिर्फ 3 सीटें फरीदाबाद, अंबाला और कुरुक्षेत्र ही मिलीं। यानी पिछली बार 10 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आप इस बार 3 सीटों पर सिमट गई।
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आप ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी हरियाणा की सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। लेकिन दस की दस सीटों पर आम आदमी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। खैर, उस वक्त आप नई पार्टी थी। लेकिन अब वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पहले तो आप हरियाणा की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करती रही। लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आया, तो आप ने हरियाणा में ‘महागठबंधन’ की संभावनाओं को हवा दे दी।
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आप हरियाणा में कांग्रेस और इनेलो से अलग हुए नए दल जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ महागठबंधन कर लोकसभा के रण में उतरना चाहती थी। आखिरी समय तक आप हरियाणा में इस गठबंधन के लिए जोर लगाती रही। लेकिन आप की दाल नहीं गली। हरियाणा में कांग्रेसी दिग्गजों ने सूबे में आप के साथ कदमताल करने से साफ इनकार करते हुए सूबे में अकेले ही लड़ने के अपने इरादे से कांग्रेस हाईकमान को अवगत करवा दिया था।
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मायूस आप ने आखिरकार जजपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस गठबंधन में आप को सिर्फ 3 सीटें फरीदाबाद, अंबाला और कुरुक्षेत्र ही मिलीं। यानी पिछली बार 10 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आप इस बार 3 सीटों पर सिमट गई।
आप-जजपा गठबंधन ने ‘दिल्ली मॉडल’ को बड़ा मुद्दा बनाया
खैर, आप-जजपा गठबंधन ने प्रदेश में जनता से किए नए चुनावी वादों और दिल्ली में आप सरकार के ‘दिल्ली मॉडल’ को हरियाणा में बड़ा मुद्दा बनाया। खुद दिल्ली के सीएम केजरीवाल और जजपा नेता एवं सांसद दुष्यंत चौटाला ने रोड शो, रैलियां और जनसभाएं कर मतदाताओं को यह बताने का प्रयास किया कि यदि प्रदेश में जजपा-आप गठबंधन के प्रत्याशी जीतते हैं तो प्रदेश में दिल्ली सरकार की तर्ज पर हरियाणा का विकास होगा। लेकिन अब नतीजे तय करेंगे कि हरियाणा में केजरी के ‘दिल्ली मॉडल’ का जादू चलता है या नहीं।
सैनी को सिर्फ ओबीसी का सहारा
वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट से सांसद बने राजकुमार सैनी ने जाट आरक्षण हिंसा के बाद पार्टी लाइन क्रास कर विवादित बयानबाजी शुरू की। प्रदेश में सैनी ने अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति शुरू की और ओबीसी कैटगिरी को साधना शुरू किया। बाद में भाजपा से बगावत कर सैनी ने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी बनाई और इस चुनाव में बसपा से हाथ मिलाकर सिर्फ दो सीटों सोनीपत और भिवानी-महेंद्रगढ़ पर चुनाव लड़ा। सैनी ने ओबीसी पैंतरा खेलते हुए इन क्षेत्रों में पिछड़े मतदाताओं को साथ जोड़ने का प्रयास किया। लेकिन लोसुपा के दोनों ही प्रत्याशी मुकाबले से बाहर ही दिखाई दिए।
सैनी को सिर्फ ओबीसी का सहारा
वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट से सांसद बने राजकुमार सैनी ने जाट आरक्षण हिंसा के बाद पार्टी लाइन क्रास कर विवादित बयानबाजी शुरू की। प्रदेश में सैनी ने अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति शुरू की और ओबीसी कैटगिरी को साधना शुरू किया। बाद में भाजपा से बगावत कर सैनी ने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी बनाई और इस चुनाव में बसपा से हाथ मिलाकर सिर्फ दो सीटों सोनीपत और भिवानी-महेंद्रगढ़ पर चुनाव लड़ा। सैनी ने ओबीसी पैंतरा खेलते हुए इन क्षेत्रों में पिछड़े मतदाताओं को साथ जोड़ने का प्रयास किया। लेकिन लोसुपा के दोनों ही प्रत्याशी मुकाबले से बाहर ही दिखाई दिए।