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Chandigarh News: पीयू में सुरक्षा कर्मियों के 200 पद खाली, एक कर्मी पर दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सुरक्षा कर्मियों के लगभग 200 पद खाली पड़े हैं। एक सुरक्षाकर्मी पर दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी है। वर्ष 2015 में 127 पदों पर पक्की भर्ती की गई थी, लेकिन लगातार सेवानिवृत्ति होने के कारण वर्तमान में लगभग 30 पदों पर ही नियमित सुरक्षाकर्मी काम कर रहे हैं। अन्य लगभग 200 पदों पर ठेकेदारी प्रणाली में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। छात्रावासों में हो रहीं लगातार चोरियों, परिसर में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ इत्यादि वारदातों के कारण छात्र लंबे समय से नियमित सुरक्षाकर्मियों की भर्ती की मांग कर रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि हर माह सुरक्षाकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इसके कारण उन्हें 30 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से ओवरटाइम लगाना पड़ता है।
इस सत्र में जीएच-4 में अनजान लड़के का घुसना सुरक्षा में पहली चूक नहीं है। सत्र के शुरुआत से बहुत बार पीयू में छात्रों की सुरक्षा में चूक हो चुकी है। छात्र कई बार पीयू प्रशासन को सुरक्षाकर्मियों की भर्ती के लिए ज्ञापन दे चुके हैं और प्रदर्शन भी कर चुके हैं। परिसर खुलने पर लड़कियों के साथ बाहरी युवकों की ओर से छेड़छाड़ की कई शिकायतें लगातार दर्ज की गईं। इसके बाद गाड़ी का शीशा तोड़कर पर्स चोरी, छात्रावासों से लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामानों, साइकिलें और बाइक चोरी की वारदातें हो रही हैं। लेकिन पीयू प्रशासन हाथ पर हाथ धरा बैठा है और एक भी मामले में कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा कई जगह खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को भी न तो ठीक करवाया गया और न ही छात्रावासों, विभागों, कैंटीनों के पास व पार्किंग में सीसीटीवी कैमरे इंस्टाल किए गए हैं।
जीएच-4 की घटना पर उठ रहे सवाल
पूर्व पीयू सुरक्षा प्रमुखों ने बातचीत में बताया कि रात के समय वरिष्ठ अफसर ड्यूटी होती है, जो हर स्पॉट पर जाकर जांच करता है कि सुरक्षाकर्मी जाग कर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं और इसकी रिपोर्ट भी बनाई जाती है। अगर अफसर जीएच-4 में जांच के लिए गए थे तो उस दौरान सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी, इसकी रिपोर्ट मांगी जाए। घटना से कितने समय पहले जांच की गई। घटना के दौरान ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी अगर मौके पर नहीं थे तो छात्रावास का दरवाजा अंदर से बंद क्यों नहीं किया गया।
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इस सत्र में जीएच-4 में अनजान लड़के का घुसना सुरक्षा में पहली चूक नहीं है। सत्र के शुरुआत से बहुत बार पीयू में छात्रों की सुरक्षा में चूक हो चुकी है। छात्र कई बार पीयू प्रशासन को सुरक्षाकर्मियों की भर्ती के लिए ज्ञापन दे चुके हैं और प्रदर्शन भी कर चुके हैं। परिसर खुलने पर लड़कियों के साथ बाहरी युवकों की ओर से छेड़छाड़ की कई शिकायतें लगातार दर्ज की गईं। इसके बाद गाड़ी का शीशा तोड़कर पर्स चोरी, छात्रावासों से लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामानों, साइकिलें और बाइक चोरी की वारदातें हो रही हैं। लेकिन पीयू प्रशासन हाथ पर हाथ धरा बैठा है और एक भी मामले में कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा कई जगह खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को भी न तो ठीक करवाया गया और न ही छात्रावासों, विभागों, कैंटीनों के पास व पार्किंग में सीसीटीवी कैमरे इंस्टाल किए गए हैं।
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जीएच-4 की घटना पर उठ रहे सवाल
पूर्व पीयू सुरक्षा प्रमुखों ने बातचीत में बताया कि रात के समय वरिष्ठ अफसर ड्यूटी होती है, जो हर स्पॉट पर जाकर जांच करता है कि सुरक्षाकर्मी जाग कर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं और इसकी रिपोर्ट भी बनाई जाती है। अगर अफसर जीएच-4 में जांच के लिए गए थे तो उस दौरान सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी, इसकी रिपोर्ट मांगी जाए। घटना से कितने समय पहले जांच की गई। घटना के दौरान ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी अगर मौके पर नहीं थे तो छात्रावास का दरवाजा अंदर से बंद क्यों नहीं किया गया।
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