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20 साल के नौजवानों को ब्रेन स्ट्रोक
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Oct 2013 10:29 AM IST
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आम तौर पर ब्रेन स्ट्रोक 45 साल के व्यक्तियों की बीमारी मानी जाती है, लेकिन लोगों को अब यह धारणा बदलनी होगी। अब 20 वर्ष के नौजवान ब्रेन स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं।
पीजीआई के विशेषज्ञों को मानना है कि वर्ष 2025 में भारत व विकासशील देशों में सबसे ज्यादा मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोकहोगा।
पीजीआई में हर साल इस बीमारी से पीड़ित 600 मरीज आते हैं। इनमें से 25 प्रतिशत युवा होते हैं। इनकी उम्र 20 से 40 साल है। हाल ही में ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित 20 साल का एक नौजवान पीजीआई में आया था। आज वर्ल्ड स्ट्रोक डे है।
पीजीआई ने इस बीमारी के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एक अभियान छेड़ा है। अभियान का नाम स्ट्राइक आउट स्ट्रोक रखा गया है।
न्यूरोलॉजी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. प्रभाकर व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. धीरज खुराना ने ब्रेन अटैक के बारे में अपने अपडेट और अनुभवों को साझा किए।
क्या हैं ब्रेन स्ट्रोक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन स्ट्रोक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं के रक्त में से आक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है, जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
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छोटा ब्रेन स्ट्रोक
छोटा ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण भी ब्रेन अटैक के सामान ही होते हैं, लेकिन ये 24 घंटों से कम के लिए होते हैं। यह मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त की कमी के कारण होते हैं।
इसे ट्रान्सिएट एस्केमिक स्ट्रोक भी कहते हैं। ब्रेन स्ट्रोक की अपेक्षा इसके लक्षण जल्द ही दूर हो जाते हैं। फिर भी छोटे ब्रेन स्ट्रोक की अवस्था में जल्द ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इसमें ब्रेन स्ट्रोक के खतरे बढ़ जाते हैं।
इसमें मरीज को बोलने में दिक्कत होगी, कमजोरी लगेगी और फिर बोलने की क्षमता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
ब्रेन स्ट्रोकऔर ब्रेन हेमरिज में अंतर
दोनों में काफी अंतर है। जब दिमाग की नस खून की सप्लाई कम करे तो उसे छोटा ब्रेन स्ट्रोककहते हैं। जब नस बंद हो जाए तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन स्ट्रोककहते हैं और जब दिमाग की नस फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरिज कहते हैं।
यह 20 में से 3 लोगों में होता है। ब्रेन हेमरिज उन लोगों में ज्यादा होने की संभावनाए होती जिनका बीपी अनकंट्रोल होता है। खास तौर पर सुबह चार बजे। इस दौरान लोगों का सबसे ज्यादा बीपी हाई होता है।
ब्रेन स्ट्रोकके लक्षण
1. चेहरे, बाजू व टांग में अचानक कमजोरी
2. अचानक बोलने व समझने में कठिनाई
3. अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना
4. अचानक चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
5. बिना किसी कारण अचानक तेज सिर दर्द
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
1. उम्रदराज
2. ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री
3. स्मोकिंग करने वालों को
4. दिल के मरीज
5. शुगर के मरीज
6. कॉलेस्ट्राल के मरीज
7. ब्लड प्रेशर के मरीज
ऐसे बचे ब्रेन स्ट्रोक से
1. बीपी को कंट्रोल रखें
2. धूम्रपान से बचे
3. कॉलेस्ट्राल युक्त खाना खाने से बचे
4. रोजाना सैर करें
5. फल और हरी सब्जियां खाएं
6. शुगर कंट्रोल रखें
7. मोटापा व शराब से बचे
एक घंटे में पहुंचाए पीजीआई
पीजीआई में ब्रेन स्ट्रोक का हाइटेक इलाज उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज को जितनी जल्द पीजीआई पहुंचाया जा सके उतना ही उसके लिए फायदेमंद होगा। यदि एक से तीन घंटे में मरीज पहुंच जाए तो उसके ठीक होने के चांस बढ़ जाते हैं।
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पीजीआई के विशेषज्ञों को मानना है कि वर्ष 2025 में भारत व विकासशील देशों में सबसे ज्यादा मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोकहोगा।
पीजीआई में हर साल इस बीमारी से पीड़ित 600 मरीज आते हैं। इनमें से 25 प्रतिशत युवा होते हैं। इनकी उम्र 20 से 40 साल है। हाल ही में ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित 20 साल का एक नौजवान पीजीआई में आया था। आज वर्ल्ड स्ट्रोक डे है।
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पीजीआई ने इस बीमारी के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एक अभियान छेड़ा है। अभियान का नाम स्ट्राइक आउट स्ट्रोक रखा गया है।
न्यूरोलॉजी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. प्रभाकर व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. धीरज खुराना ने ब्रेन अटैक के बारे में अपने अपडेट और अनुभवों को साझा किए।
क्या हैं ब्रेन स्ट्रोक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन स्ट्रोक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं के रक्त में से आक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है, जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
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छोटा ब्रेन स्ट्रोक
छोटा ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण भी ब्रेन अटैक के सामान ही होते हैं, लेकिन ये 24 घंटों से कम के लिए होते हैं। यह मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त की कमी के कारण होते हैं।
इसे ट्रान्सिएट एस्केमिक स्ट्रोक भी कहते हैं। ब्रेन स्ट्रोक की अपेक्षा इसके लक्षण जल्द ही दूर हो जाते हैं। फिर भी छोटे ब्रेन स्ट्रोक की अवस्था में जल्द ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इसमें ब्रेन स्ट्रोक के खतरे बढ़ जाते हैं।
इसमें मरीज को बोलने में दिक्कत होगी, कमजोरी लगेगी और फिर बोलने की क्षमता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
ब्रेन स्ट्रोकऔर ब्रेन हेमरिज में अंतर
दोनों में काफी अंतर है। जब दिमाग की नस खून की सप्लाई कम करे तो उसे छोटा ब्रेन स्ट्रोककहते हैं। जब नस बंद हो जाए तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन स्ट्रोककहते हैं और जब दिमाग की नस फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरिज कहते हैं।
यह 20 में से 3 लोगों में होता है। ब्रेन हेमरिज उन लोगों में ज्यादा होने की संभावनाए होती जिनका बीपी अनकंट्रोल होता है। खास तौर पर सुबह चार बजे। इस दौरान लोगों का सबसे ज्यादा बीपी हाई होता है।
ब्रेन स्ट्रोकके लक्षण
1. चेहरे, बाजू व टांग में अचानक कमजोरी
2. अचानक बोलने व समझने में कठिनाई
3. अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना
4. अचानक चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
5. बिना किसी कारण अचानक तेज सिर दर्द
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
1. उम्रदराज
2. ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री
3. स्मोकिंग करने वालों को
4. दिल के मरीज
5. शुगर के मरीज
6. कॉलेस्ट्राल के मरीज
7. ब्लड प्रेशर के मरीज
ऐसे बचे ब्रेन स्ट्रोक से
1. बीपी को कंट्रोल रखें
2. धूम्रपान से बचे
3. कॉलेस्ट्राल युक्त खाना खाने से बचे
4. रोजाना सैर करें
5. फल और हरी सब्जियां खाएं
6. शुगर कंट्रोल रखें
7. मोटापा व शराब से बचे
एक घंटे में पहुंचाए पीजीआई
पीजीआई में ब्रेन स्ट्रोक का हाइटेक इलाज उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज को जितनी जल्द पीजीआई पहुंचाया जा सके उतना ही उसके लिए फायदेमंद होगा। यदि एक से तीन घंटे में मरीज पहुंच जाए तो उसके ठीक होने के चांस बढ़ जाते हैं।