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नगर निगम में नौकरी लगवाने के नाम पर 18 लोगों से 2 लाख 25 हजार रुपये ऐंठे

Thu, 12 May 2022 02:09 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 02:09 AM IST
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2 lakh 25 thousand rupees were extorted from 18 people in the name of getting jobs in Municipal Corporation
चंडीगढ़। नगर निगम में माली, हेल्पर, ड्राइवर, चपरासी और सुपरवाइजर की नौकरी लगवाने के नाम पर 18 लोगों से 2.25 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि आरोपी कई पीड़ितों को फर्जी पहचान पत्र जारी कर उन्हें पार्कों की देखभाल के लिए भेजता रहा लेकिन महीने बाद जब तनख्वाह नहीं आई तब मामले का खुलासा हुआ। हल्लोमाजरा, रामदरबार, मौलीजागरां और जीरकपुर के 18 पीड़ित लोगों ने रामदरबार निवासी आरोपी के खिलाफ एसएसपी विंडो पर शिकायत दी। कहा कि आरोपी ने नगर निगम में नौकरी लगवाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 10 से 33 हजार रुपये लिए हैं।
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गांव हल्लोमाजरा निवासी राकेश कुमार जायसवाल ने बताया कि वह बेरोजगार थे और नौकरी तलाश रहे थे। करीब तीन महीने पहले आरोपी से उनकी मुलाकात हल्लोमाजरा के दुकानदार के जरिए हुई। आरोपी ने कहा कि वह नगर निगम का कर्मचारी है और उसे भी निगम में माली की नौकरी पर लगवा देगा। इसके लिए उसने 15 हजार रुपये ले लिए। राकेश ने बताया कि आरोपी कहता था कि पार्कों में पौधे या फूल तोड़ने वालों की तस्वीरें खींचकर लाना है। साथ ही बगीचों की देखभाल करनी है। आरोपी शहर के अलग अलग पार्क में रोजाना माली का काम करने के लिए भेजता था। बताया कि 16500 रुपये तनख्वाह होगी, जो हर माह 2 से 5 तारीख के बीच खाते में आ जाएगी। राकेश ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की मुहर के साथ एमसी बागवानी विभाग का पहचान पत्र भी जारी किया है।
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सचिवालय में चपरासी की नौकरी लगाने के नाम पर ऐंठे 33 हजार
जीरकपुर निवासी रॉकी ने बताया कि आरोपी ने चपरासी की नौकरी लगवाने के नाम पर उनसे 33 हजार रुपये ले लिए। वह उसे यूटी सचिवालय में भी ले गया और वहां पर नौकरी पर लगवाने का आश्वासन दिया। कहा कि जल्द उसकी नौकरी लग जाएगी, लेकिन कोई नौकरी नहीं लगी।
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जब तनख्वाह नहीं आई तो हुआ खुलासा
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि पूरे अप्रैल महीने में काम किया लेकिन मई के पहले सप्ताह में उनके खाते में तनख्वाह नहीं आई। पांच मई को उन्होंने आरोपी से संपर्क किया तब वह बहाने बनाने लगा। बोला कि आज अधिकारी नहीं बैठे हैं। इसके बाद उन्होंने आरोपी के बारे में जब नगर निगम में जाकर पूछा तो पता चला कि वह नगर निगम का कर्मचारी ही नहीं है। आई कार्ड के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि यह भी फर्जी है।

थाना पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप
इसके बाद पीड़ितों ने आरोपी के खिलाफ सेक्टर-31 पुलिस थाने में शिकायत दी। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रामदरबार बीट बॉक्स पर भेज दिया। वहां भी शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने 9 मई को सेक्टर-9 स्थित पुलिस मुख्यालय में एसएसपी विंडो पर शिकायत दी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिकायत के बाद अब तक उन्हें पुलिस की ओर से कोई कॉल नहीं आई है।
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