{"_id":"2c37b00343b146315d06a28a00fdb631","slug":"2-doga-death-after-sterlization-due-to-infection","type":"story","status":"publish","title_hn":"लावारिस कुत्ते फिर बने नगर निगम की मुसीबत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लावारिस कुत्ते फिर बने नगर निगम की मुसीबत
रवि अटवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 06 Jun 2014 09:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में लावारिस कुत्तों के मसले ने नगर निगम के लिए एक बार फिर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सोसायटी फॉर द प्रीवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल(एसपीसीए)ने एक बार फिर नसबंदी का काम रोक दिया है। एसपीसीए परिसर में दो दिनों में दो कुत्तों की इंफेक्शन से मौत हो गई, जिसके बाद वहां नसबंदी का काम बंद कर दिया गया है।
विज्ञापन
एसपीसीए प्रबंधन का कहना है कि यहां इंफेक्शन से दूसरे कुत्तों के भी मरने का डर है। वहीं स्टाफ के लिए भी यहां काम करना मुश्किल हो गया है। अभी कुछ दिन पहले यहां डॉक्टर के छोड़कर जाने से भी नसबंदी का काम रुक गया था।
विज्ञापन
ढाई महीने से यहीं था कुत्ता
जिस कुत्ते की वीरवार सुबह मौत हुई, वह पिछले करीब ढाई महीने से एसपीसीए में ही था। जबकि नियमों के मुताबिक कुत्ते को स्टर्लाइजेशन के कुछ दिन बाद छोड़ना होता है। यहां उसकी नसबंदी 23 मार्च को हो गई थी। उसके बाद उसे जख्म ठीक नहीं हुए। यहां रहते-रहते वह डिस्टेंपर बीमारी की चपेट में आ गया। बुधवार को भी इसी बीमारी से एक कुत्ते की और मौत हो गई थी।
विज्ञापन
नवंबर में 23 कुत्तों की हुई थी मौत
एसपीसीए में नवंबर माह में भी नसबंदी का काम बंद कर दिया गया था। उस महीने वहां 23 कुत्तों की इसी इंफेक्शन से मौत हो गई थी। एसपीसीए प्रबंधन का कहना है कि यहां कुत्ते कई-कई दिन तक रहते हैं, जिससे यहां अक्सर इंफेक्शन फैल जाता है।
एसपीसीए के पास एबीसी के लिए अलग यूनिट बना रखी है। कुत्तों की मौत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। वैसे हमने पीएफए से भी कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू करवा दिया है। पंचकूला के पेट एनिमल हेल्थ सेंटर में भी जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा। वहां अभी निर्माण कार्य चल रहा है।
एमएस कंबोज, सुपरिंटेंडेंट स्लॉटर हाउस, नगर निगम
यहां पहले भी कई बार कुत्ते इंफेक्शन से मर जाते हैं। हमने कई बार निगम को कहा कि एबीसी के लिए अलग यूनिट बनाई जाए। शेल्टर में यह काम सफल नहीं चल रहा है। ऐसी नसबंदी का क्या फायदा कि बाद में कुत्ते ही मर जाएं। ये भी कुत्तों के साथ क्रूएलिटी ही है।
नंदिनी कक्कड़, कार्यकारी सदस्य, एसपीसीए
इसलिए फैल रहा इंफेक्शन
एसपीसीए सूत्रों का कहना है कि यहां समय-समय पर दवा का छिड़काव नहीं हो रहा है। यहां इंफेक्शन फैलने का यह बड़ा कारण है। इसके अलावा यहां कुत्तों के ऑपरेशन में टूल्स को बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा यहां कुत्तों को रखने की जगह कम है।
स्ट्रे डॉग्स के लिए हेल्पलाइन 155304
शहर में आवारा कुत्तों की समस्या के लिए नगर निगम को हेल्पलाइन नंबर मिल गया। यह नंबर है 155304 और इस नंबर पर सिर्फ कुत्तों की ही नहीं बल्कि निगम से संबंधित हर तरह की समस्या की सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के आदेशों पर निगम ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (डीओटी) से नंबर इश्यू करने को कहा था। यह नंबर सिर्फ चंडीगढ़ नहीं बल्कि डीओटी ने देश के सभी शहरों की नगर निगम के लिए जारी किया है। इसे टोल फ्री बनाने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर्स से भी बात की जा रही है।