फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   मैंगों मेले मे हाथी चिंघाड़ 4 किलो का है तो अ्गूंरलता 5 ग्राम की।

मैंगों मेले मे हाथी चिंघाड़ 4 किलो का है तो अ्गूंरलता 5 ग्राम की।

Sun, 08 Jul 2018 01:48 AM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
मैंगों मेले मे हाथी चिंघाड़ 4 किलो का है तो अ्गूंरलता 5 ग्राम की।
मैंगों मेले में पहुंचा चार किलो का हाथी चिंघाड़ और 5 ग्राम की अंगूरलता
विज्ञापन


- शुगर के मरीजों के लिए भी लो शुगर का आम मेले में प्रदर्शित किया गया
- मेले में अपनी खूबसूरती और स्वाद के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुस्नआरा

अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर। यादविंद्रा गार्डन में दो दिवसीय 27वें मैंगो मेले के प्रथम दिन विदेशों से निर्यात होने वाली किस्मों के अलावा देश-विदेश में अपने स्वाद का डंका बजाने वाली विभिन्न किस्में प्रदर्शित की गई। एक तरफ जहां चार किलो वजन का हाथी चिंघाड़ था, तो वहीं दूसरी ओर पांच ग्राम का अंगूरलता आम भी मैंगो मेले में देखने को मिला। अपनी खूबसूरती और स्वाद के लिए हुस्नआरा आम भी था तो दूसरी ओर शुगर के मरीजों के लिए लो शुगर आम भी मेले में प्रदर्शित किया गया। मैंगो मेले में पहुंचने वालों को हैरानी तब होती है जब पूरे देश से आई आमों की विभिन्न किस्मों को एक साथ देखते हैं और विशेष कर वो किस्में जो उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखी।

- अंबिका: आम की हाइब्रिड किस्म और स्वाद के लिए पसंद की जा रही है। इसका फ्लेवर भी लाजवाब है।

- टामी एंटकिन: स्वाद के साथ-साथ इसमें लो शुगर होने के चलते इसे डायबिटीज के मरीज भी स्वाद से खाते हैं। इसके अलावा इस पर फ्रूट फ्लाई का असर भी कम होता है। सामान्य आमों की तुलना में इस आम को 10 से 15 दिनों तक स्टोर किया जा सकता। इसकी लो शुगर और स्वाद के कारण इसे विदेशों से भी निर्यात किया जाता है।
विज्ञापन


- अंबिका: इसकी मिठास अच्छी व टीटीएस वैल्यू के चलते एक्सपोर्ट क्वालिटी है। इसका टीटीएस आम तौर पर 24 होता है। जैसे-जैसे आम पकने लगता है इसकी खूबसूरती और रंग पर और निखार आता जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


- पूसा अरुणिमा: आम की यह किस्म जुलाई के अंत में तैयार होती है जिस वजह से इसका किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।

- हाथी चिंघाड़: बड़ा आम जिसका वजन चार किलो तक होता है।

- अंगूर लता: यह आम अंगूर की तरह होता है जिसका वजन पांच ग्राम तक हो सकता है।

मेले में आम के पौध की भी कर सकते हैं खरीददारी
मैंगो मेले में आम के पौधे को बेचने के लिए भी रखा गया, जिसमें आमों की विभिन्न किस्में मौजूद थी। फ्रूट एक्सपर्ट राकेश कुमार ने बताया कि जहां पहले आम के पेड़ों की विभिन्न किस्मों की ऊंचाई और चौड़ाई अधिक होती थी। वहीं, दूसरी ओर आम की फसल कम आती थी। लेकिन अब आम की विभिन्न किस्में और हाइब्रिड तैयार हो चुकी हैं जिनमें कम समय में ही आम की फसल आ जाती है। राकेश ने बताया कि यहां से खरीद कर ले जा रहे तकरीबन सभी आम के पौधों में तीन साल में ही आम आने शुरू हो जाते हैं और समय के साथ-साथ हर साल पेड़ पर आम लगने की क्षमता बढ़ती जाती है। आजकल आम के बौने पौधे भी आ रहे हैं। आम की अब ऐसी किस्में भी आई हैं जिसमें आम हर साल आते हैं जबकि पहले एक सीजन में आम अधिक आते थे तो दूसरे सीजन में या तो आते ही नहीं थे या बहुत कम आते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed