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तीन घंटे तक अपनी मांग को लेकर माजरी चौक पर डटे रहे, पुलिस को रूट डायबर्ट करना पड़ा
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:49 AM IST
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सीएम आवास का घेरने जा रहे कंप्यूटर टीचर्स और लैब सहायकों को रोका
- तीन घंटे तक अपनी मांग को लेकर माजरी चौक पर डटे रहे, पुलिस को करना पड़ा रूट डायवर्ट
- ओएसडी ने सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीएम से मुलाकात कराने का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
अपनी मांग को लेकर सीएम आवास का घेराव करने जा रहे कंप्यूटर टीचर्स और लैब सहायकों को पुलिस ने बुधवार को माजरी चौक के पास रोक लिया। जब शिक्षकों ने रोष प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस को हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा, लेकिन शिक्षक अपनी मांग को लेकर माजरी चौक पर ही डटे रहे। इस दौरान करीब तीन घंटे तक पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा। बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री से हुई बैठक में निष्कर्ष नहीं निकलने के चलते पंचकूला में हजारों कंप्यूटर शिक्षक और लैब सहायक सड़क पर उतर आए थे। इनकी मांग है कि मुख्यमंत्री ने जो वादा उनसे तीन माह पहले किया था, उसे पूरा किया जाए।
बुधवार को कंप्यूटर टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन और कंप्यूटर लैब अटेंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के हजारों सदस्य अपनी मांगों को लेकर सुबह ही सेक्टर-पांच स्थित धरना स्थल पर एकत्रित होने शुरू हो गए थे। जिसके बाद उन्होंने शिक्षा सदन की ओर कूच किया। शिक्षा सदन के गेट के समक्ष एक घंटे के करीब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यालय में मौजूद न होने के कारण मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। उपायुक्त कार्यालय के नजदीक उनकी पुलिस से बहस हुई। लेकिन वे आगे बढ़ते रहे।
पुलिस ने उन्हें माजरी चौक पर रोक दिया। जिस कारण नेशनल हाईवे पर आने जाने वाले ट्रैफिक पर प्रभाव पड़ा। जहां पर उनसे मिलने के लिए एसडीएम पंकज सेतिया आए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात करवा देगे। लेकिन सदस्य नहीं माने और कहा कि उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री से मुलाकात आज ही कराई जाए। इस दौरान वे आगे की ओर कूच करने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस के साथ हाथापाई भी हुई। महिला कंप्यूटर शिक्षक महिला पुलिस कर्मियों पर भारी पड़ती नजर आई। मौके पर मौजूद एसडीएम ने मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। सात सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल की ओएसडी से चंडीगढ़ में मुलाकत करवाई। जहां पर उन्हें आश्वासन मिला कि उनकी जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाई जाएगी। जिसके बाद शिक्षक नेशनल हाईवे से पीछे हटे और उसके बाद ट्रैफिक सुचारु हो सका। इस दौरान तहसीलदार वरिंद्र भी स्थिति पर नजर बनाए रखे हुए थे।
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कंप्यूटर टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के स्टेट अध्यक्ष बलराम धीमान ने बताया कि 20 दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई जिसमें उनकी प्रमुख मांग वेतन बढ़ोतरी को स्वीकार कर लिया गया था। तीन माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकों की मांग पूरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि सेवा अवधि टुकड़ों में ना बढ़ाकर स्थायी पालिसी के तहत सेवाएं स्थायी की जाए। विषय को नियमित की जाए और किताबें उपलब्ध कराई जाए। समय पर वेतन दिया जाए।
कंप्यूटर लैब अटेंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र प्योंत ने बताया कि उन्हें भी मुख्यमंत्री की ओर से वेतन बढ़ोतरी का भरोसा दिया गया था लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके साथ न्याय नहीं किया गया है। सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं कर रही है। दोनों ने सरकार को दो अप्रैल तक का समय देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांग पूरी न हुई तो वे उग्र आंदोलन आरंभ कर देंगे। जिसके लिए सरकार की जिम्मेवार होगी।
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- तीन घंटे तक अपनी मांग को लेकर माजरी चौक पर डटे रहे, पुलिस को करना पड़ा रूट डायवर्ट
- ओएसडी ने सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीएम से मुलाकात कराने का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
अपनी मांग को लेकर सीएम आवास का घेराव करने जा रहे कंप्यूटर टीचर्स और लैब सहायकों को पुलिस ने बुधवार को माजरी चौक के पास रोक लिया। जब शिक्षकों ने रोष प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस को हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा, लेकिन शिक्षक अपनी मांग को लेकर माजरी चौक पर ही डटे रहे। इस दौरान करीब तीन घंटे तक पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा। बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री से हुई बैठक में निष्कर्ष नहीं निकलने के चलते पंचकूला में हजारों कंप्यूटर शिक्षक और लैब सहायक सड़क पर उतर आए थे। इनकी मांग है कि मुख्यमंत्री ने जो वादा उनसे तीन माह पहले किया था, उसे पूरा किया जाए।
बुधवार को कंप्यूटर टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन और कंप्यूटर लैब अटेंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के हजारों सदस्य अपनी मांगों को लेकर सुबह ही सेक्टर-पांच स्थित धरना स्थल पर एकत्रित होने शुरू हो गए थे। जिसके बाद उन्होंने शिक्षा सदन की ओर कूच किया। शिक्षा सदन के गेट के समक्ष एक घंटे के करीब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यालय में मौजूद न होने के कारण मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। उपायुक्त कार्यालय के नजदीक उनकी पुलिस से बहस हुई। लेकिन वे आगे बढ़ते रहे।
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पुलिस ने उन्हें माजरी चौक पर रोक दिया। जिस कारण नेशनल हाईवे पर आने जाने वाले ट्रैफिक पर प्रभाव पड़ा। जहां पर उनसे मिलने के लिए एसडीएम पंकज सेतिया आए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात करवा देगे। लेकिन सदस्य नहीं माने और कहा कि उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री से मुलाकात आज ही कराई जाए। इस दौरान वे आगे की ओर कूच करने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस के साथ हाथापाई भी हुई। महिला कंप्यूटर शिक्षक महिला पुलिस कर्मियों पर भारी पड़ती नजर आई। मौके पर मौजूद एसडीएम ने मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। सात सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल की ओएसडी से चंडीगढ़ में मुलाकत करवाई। जहां पर उन्हें आश्वासन मिला कि उनकी जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाई जाएगी। जिसके बाद शिक्षक नेशनल हाईवे से पीछे हटे और उसके बाद ट्रैफिक सुचारु हो सका। इस दौरान तहसीलदार वरिंद्र भी स्थिति पर नजर बनाए रखे हुए थे।
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कंप्यूटर टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के स्टेट अध्यक्ष बलराम धीमान ने बताया कि 20 दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई जिसमें उनकी प्रमुख मांग वेतन बढ़ोतरी को स्वीकार कर लिया गया था। तीन माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकों की मांग पूरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि सेवा अवधि टुकड़ों में ना बढ़ाकर स्थायी पालिसी के तहत सेवाएं स्थायी की जाए। विषय को नियमित की जाए और किताबें उपलब्ध कराई जाए। समय पर वेतन दिया जाए।
कंप्यूटर लैब अटेंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र प्योंत ने बताया कि उन्हें भी मुख्यमंत्री की ओर से वेतन बढ़ोतरी का भरोसा दिया गया था लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके साथ न्याय नहीं किया गया है। सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं कर रही है। दोनों ने सरकार को दो अप्रैल तक का समय देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांग पूरी न हुई तो वे उग्र आंदोलन आरंभ कर देंगे। जिसके लिए सरकार की जिम्मेवार होगी।