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निगम कमिश्रर का पद खाली, बढ़ेगी पंचकूला में और बदहाली
Updated Wed, 13 Sep 2017 01:19 AM IST
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निगम कमिश्नर का पद खाली, बढ़ेगी पंचकूला में बदहाली
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे पंचकूला वासियों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद काफी कम हो गई है। साल में तीसरी बार नगर निगम के कमिश्नर के बदलने के बाद विकास कार्यों से संबंधित दर्जनों फाइलें एक फिर अटक गईं हैं। साल के नौ महीने में तीसरी बार कमिश्नर बदले गए। खास बात यह है कि इस बार तो फिलहाल कमिश्नर पद पर किसी और नियुक्ति भी नहीं हुई।
हाल ही में पंचकूला के करीब एक दर्जन पार्षदों ने विकास कार्य न होने पर धरने की तैयारी कर ली थी। आठ दिन पहले निगम आयुक्त एके मीणा से कार्यों की जल्द शुरुआत का आश्वासन मिलने के बाद धरना स्थगित कर दिया गया। लेकिन अब यह पद फिलहाल खाली है। हालांकि पिछले दिनों कुछ फाइलें साइन की गईं, बावजूद इसके कमिश्नर अशोक कुमार मीणा से उनका चार्ज वापस लिए जाने के बाद तमाम विकास कार्य होने की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं।
विकास कार्य ठप होने की कगार पर
पंचकूला नगर निगम में कमिश्नर के तबादलों की फेहरिस्त में एक और नाम शामिल हो गया। पूर्व कमिश्नर जगदीप ढांडा के बाद कोई भी अधिकारी मेयर के साथ तालमेल बनाने में सफल नहीं रहा है। नतीजतन करीब डेढ़ वर्ष से विकास की रफ्तार ठप होने के कगार पर है। इससे पहले ललित सिवाच, डॉक्टर शालीन और फिर एके मीणा को पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर का कार्यभार दिया गया था।
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बुनियादी सुविधाएं लगी हैं चरमराने
पहले आए कमिश्नरों का भी मेयर से विवाद रहा, नतीजतन कार्य आगे नहीं बढ़ सके। हर बाद होने वाले विवाद को सुलझने में वक्त लगा और फिर राजनीति के कारण शहरवासियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। निगम कमिश्नर के पास चूंकि वित्तीय शक्तियां हैं, लेकिन इस पद पर आसीन होने वाले अधिकारियों के तबादले से पंचकूला वासियों की परेशानियां इतनी बढ़ा दी है कि नगर निगम के वजूद पर भी सवाल उठने लगे हैं। विकास कार्यों को लेकर निगम के पार्षद भी अपने वार्डों की समस्याओं को जानकर भी कुछ नहीं करवा पा रहे हैं और पंचकूला में बुनियादी सुविधाएं और चरमराने लगी हैं।
मौजूदा हालत
-शहर के 90 फीसदी सीसीटीवी कैमरे खराब।
-सड़कों पर सैकड़ों गड्ढों को देखने की जरूरत नहीं, खुद होते हैं महसूस।
-स्ट्रीट लाइट्स की बेतरतीबी के कारण करंट लगने और गड्ढों की वजह से अब तक हो चुकी हैं तीन मौतें।
-हॉर्टिकल्चर विंग ट्रांसफर होने के बाद भी दर्जनों कार्य रुके।
-प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड अब तक पूरी तरह नहीं हो सके हैं अपडेट।
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अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे पंचकूला वासियों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद काफी कम हो गई है। साल में तीसरी बार नगर निगम के कमिश्नर के बदलने के बाद विकास कार्यों से संबंधित दर्जनों फाइलें एक फिर अटक गईं हैं। साल के नौ महीने में तीसरी बार कमिश्नर बदले गए। खास बात यह है कि इस बार तो फिलहाल कमिश्नर पद पर किसी और नियुक्ति भी नहीं हुई।
हाल ही में पंचकूला के करीब एक दर्जन पार्षदों ने विकास कार्य न होने पर धरने की तैयारी कर ली थी। आठ दिन पहले निगम आयुक्त एके मीणा से कार्यों की जल्द शुरुआत का आश्वासन मिलने के बाद धरना स्थगित कर दिया गया। लेकिन अब यह पद फिलहाल खाली है। हालांकि पिछले दिनों कुछ फाइलें साइन की गईं, बावजूद इसके कमिश्नर अशोक कुमार मीणा से उनका चार्ज वापस लिए जाने के बाद तमाम विकास कार्य होने की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं।
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विकास कार्य ठप होने की कगार पर
पंचकूला नगर निगम में कमिश्नर के तबादलों की फेहरिस्त में एक और नाम शामिल हो गया। पूर्व कमिश्नर जगदीप ढांडा के बाद कोई भी अधिकारी मेयर के साथ तालमेल बनाने में सफल नहीं रहा है। नतीजतन करीब डेढ़ वर्ष से विकास की रफ्तार ठप होने के कगार पर है। इससे पहले ललित सिवाच, डॉक्टर शालीन और फिर एके मीणा को पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर का कार्यभार दिया गया था।
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बुनियादी सुविधाएं लगी हैं चरमराने
पहले आए कमिश्नरों का भी मेयर से विवाद रहा, नतीजतन कार्य आगे नहीं बढ़ सके। हर बाद होने वाले विवाद को सुलझने में वक्त लगा और फिर राजनीति के कारण शहरवासियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। निगम कमिश्नर के पास चूंकि वित्तीय शक्तियां हैं, लेकिन इस पद पर आसीन होने वाले अधिकारियों के तबादले से पंचकूला वासियों की परेशानियां इतनी बढ़ा दी है कि नगर निगम के वजूद पर भी सवाल उठने लगे हैं। विकास कार्यों को लेकर निगम के पार्षद भी अपने वार्डों की समस्याओं को जानकर भी कुछ नहीं करवा पा रहे हैं और पंचकूला में बुनियादी सुविधाएं और चरमराने लगी हैं।
मौजूदा हालत
-शहर के 90 फीसदी सीसीटीवी कैमरे खराब।
-सड़कों पर सैकड़ों गड्ढों को देखने की जरूरत नहीं, खुद होते हैं महसूस।
-स्ट्रीट लाइट्स की बेतरतीबी के कारण करंट लगने और गड्ढों की वजह से अब तक हो चुकी हैं तीन मौतें।
-हॉर्टिकल्चर विंग ट्रांसफर होने के बाद भी दर्जनों कार्य रुके।
-प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड अब तक पूरी तरह नहीं हो सके हैं अपडेट।