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तकनीक की दौड़ में पीछे रह गई जेलों की सुरक्षा
Updated Wed, 19 Jul 2017 01:55 AM IST
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तकनीक की दौड़ में पीछे रह गई जेलों की सुरक्षा
मोबाइल के आधुनिक इस्तेमाल पर बोले तिहाड़ जेल के डीजी
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
देश की जेलों को सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से लैस किया जा रहा है। लेकिन तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के मुताबिक सुरक्षा मानकों में बदलाव आसान नहीं है। जेलों में मोबाइल का इस्तेमाल न हो, इसके सभी प्रयास किए जा रहे हैं। पंचकूला के मोगीनंद में इंटरनेशनल नेल्सन मंडेला दिवस के मौके पर आयोजित एक सेमिनार के दौरान मौजूद तिहाड़ जेल के महानिदेशक सुधीर यादव ने अमर उजाला से बातचीत में ये बातें कहीं। जेलों में सुरक्षा के लिहाज से जैमर लगाए जाने के बावजूद सुरक्षा में सेंध से संबंधित पूछे सवाल के जवाब में डीजी ने कहा कि टू जी, थ्री जी, फोर जी के बाद कई देशों में तकनीक 7 जी तक पहुंच गई है। लेकिन तकनीक में इतनी तेजी से हो रहे बदलाव के मुताबिक सरकारी बदलाव थोड़ा मुश्किल है। हां, कैदियों को फोन पर बातचीत की सुविधा देने के लिए सभी जेलों में इंतजाम हैं, ताकि उन्हें परिजनों से बातचीत में किसी तरह की परेशानी न हो।
नाभा जेल ब्रेक के बारे में पूछे सवाल के जवाब में तिहाड़ जेल के डीजी ने कहा कि ऐसी वारदात सभी से साझा की जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अगर कमी हो तो उसे तत्काल दूर कर, माकूल तैयारियां की जा सकें।
सुधारात्मक पहल की जा रही है
सुरक्षा के बारे में पूछे सवाल के जवाब में डीजी ने कहा कि तिहाड़ में जेल कर्मियों के साथ साथ पैरा मिलिट्री की भी तैनाती है, ताकि हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा में किसी तरह की कमी न रहे। कैदियों को उनके अधिकार देने सहित सुधारात्मक पहल की जा रही है, ताकि मानवाधिकारों की रक्षा में कहीं कमी न रहे।
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नई तकनीक के सामने फीके पड़े पुराने जैमर
देश की जेलों में कैदियों की ओर से मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जेलों में लगे पुराने जैमर, नई तकनीक के लिए तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। नतीजतन व्हाट्सएप कॉलिंग सहित कई अन्य सुविधाओं को कैदी अपना रहे हैं। सेमिनार के दौरान इस मुद्दे पर भी विशेषज्ञों के बीच चर्चा हुई।
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तकनीक की दौड़ में पीछे रह गई जेलों की सुरक्षा
मोबाइल के आधुनिक इस्तेमाल पर बोले तिहाड़ जेल के डीजी
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
देश की जेलों को सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से लैस किया जा रहा है। लेकिन तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के मुताबिक सुरक्षा मानकों में बदलाव आसान नहीं है। जेलों में मोबाइल का इस्तेमाल न हो, इसके सभी प्रयास किए जा रहे हैं। पंचकूला के मोगीनंद में इंटरनेशनल नेल्सन मंडेला दिवस के मौके पर आयोजित एक सेमिनार के दौरान मौजूद तिहाड़ जेल के महानिदेशक सुधीर यादव ने अमर उजाला से बातचीत में ये बातें कहीं। जेलों में सुरक्षा के लिहाज से जैमर लगाए जाने के बावजूद सुरक्षा में सेंध से संबंधित पूछे सवाल के जवाब में डीजी ने कहा कि टू जी, थ्री जी, फोर जी के बाद कई देशों में तकनीक 7 जी तक पहुंच गई है। लेकिन तकनीक में इतनी तेजी से हो रहे बदलाव के मुताबिक सरकारी बदलाव थोड़ा मुश्किल है। हां, कैदियों को फोन पर बातचीत की सुविधा देने के लिए सभी जेलों में इंतजाम हैं, ताकि उन्हें परिजनों से बातचीत में किसी तरह की परेशानी न हो।
नाभा जेल ब्रेक के बारे में पूछे सवाल के जवाब में तिहाड़ जेल के डीजी ने कहा कि ऐसी वारदात सभी से साझा की जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अगर कमी हो तो उसे तत्काल दूर कर, माकूल तैयारियां की जा सकें।
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सुधारात्मक पहल की जा रही है
सुरक्षा के बारे में पूछे सवाल के जवाब में डीजी ने कहा कि तिहाड़ में जेल कर्मियों के साथ साथ पैरा मिलिट्री की भी तैनाती है, ताकि हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा में किसी तरह की कमी न रहे। कैदियों को उनके अधिकार देने सहित सुधारात्मक पहल की जा रही है, ताकि मानवाधिकारों की रक्षा में कहीं कमी न रहे।
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नई तकनीक के सामने फीके पड़े पुराने जैमर
देश की जेलों में कैदियों की ओर से मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जेलों में लगे पुराने जैमर, नई तकनीक के लिए तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। नतीजतन व्हाट्सएप कॉलिंग सहित कई अन्य सुविधाओं को कैदी अपना रहे हैं। सेमिनार के दौरान इस मुद्दे पर भी विशेषज्ञों के बीच चर्चा हुई।