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हरियाणाः 14वीं विस के पहले सत्र में भाजपा में आक्रामकता का अभाव दिखा, पूरे रंग में थे हुड्डा
Fri, 08 Nov 2019 11:32 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 08 Nov 2019 11:32 AM IST
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की 14वीं विधानसभा के पहले सत्र में भाजपा में आक्रामकता का पूरी तरह से अभाव दिखा। सत्तारूढ़ दल को तीन दिवसीय सत्र में दिग्गज नेताओं के हारने की कमी काफी खली। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को घेरने की व्यूह रचना भी सत्ता पक्ष नहीं कर पाया। सीएम मनोहर लाल के अलावा पूर्व मंत्री अनिल विज, पूर्व स्पीकर कंवर पाल, महिपाल ढांडा, असीम गोयल, घनश्याम दास, जगदीश नायर सरीखे विधायक ही कांग्रेस से लोहा लेते दिखे। नए विधायक पहले सत्र में पक्ष और विपक्ष के रवैये को भांपने में ही लगे रहे।
कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूरे रंग में दिखे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद भाजपा को हर मुद्दे पर घेरा। प्रदेश के सामने खड़ी अपराध, बेरोजगारी, किसानी इत्यादि की समस्याओं को लेकर सरकार पर कटाक्ष तो किए ही, इनके समाधान के लिए सुझाव भी दिए। हुड्डा सरकार पर व्यंग्य कसने में भी पीछे नहीं रहे। उन्हें पुराने किस्से भी खूब सुनाए। नई विधानसभा में पूर्व संसदीय कार्य मंत्री रामबिलास शर्मा के व्यंग्य व किस्सागोई की हर किसी को याद आई। शर्मा इस बार विधानसभा नहीं पहुंच पाए हैं, जिसका भी भाजपा को नुकसान हुआ है।
मुश्किल से मुश्किल घड़ी में शर्मा सदन में माहौल को खुशनुमा बना देेते थे। कांग्रेस व इनेलो को घेरने वाले पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ भी इस बार सदन में नहीं थे, जिसका कांग्रेस ने पूरा फायदा उठाया। वह पूर्व विधानसभा में जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर कांग्रेस व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पूरी तरह से हमलावर रहते थे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन, पूर्व सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी के हारने से भी भाजपा सदन में पहले के मुकाबले कमजोर दिखी
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। बेदी भी मुखरता के साथ विपक्ष की बोलती बंद कराने में आगे रहते थे। पंचकूला से दूसरी बार विधायक बने ज्ञानचंद गुप्ता अब स्पीकर बन चुके हैं। वह भी कांग्रेस और इनेलो पर पूर्व सरकार के समय चुन-चुनकर शब्दवाण छोड़ते थे।
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कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूरे रंग में दिखे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद भाजपा को हर मुद्दे पर घेरा। प्रदेश के सामने खड़ी अपराध, बेरोजगारी, किसानी इत्यादि की समस्याओं को लेकर सरकार पर कटाक्ष तो किए ही, इनके समाधान के लिए सुझाव भी दिए। हुड्डा सरकार पर व्यंग्य कसने में भी पीछे नहीं रहे। उन्हें पुराने किस्से भी खूब सुनाए। नई विधानसभा में पूर्व संसदीय कार्य मंत्री रामबिलास शर्मा के व्यंग्य व किस्सागोई की हर किसी को याद आई। शर्मा इस बार विधानसभा नहीं पहुंच पाए हैं, जिसका भी भाजपा को नुकसान हुआ है।
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मुश्किल से मुश्किल घड़ी में शर्मा सदन में माहौल को खुशनुमा बना देेते थे। कांग्रेस व इनेलो को घेरने वाले पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ भी इस बार सदन में नहीं थे, जिसका कांग्रेस ने पूरा फायदा उठाया। वह पूर्व विधानसभा में जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर कांग्रेस व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पूरी तरह से हमलावर रहते थे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन, पूर्व सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी के हारने से भी भाजपा सदन में पहले के मुकाबले कमजोर दिखी
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। बेदी भी मुखरता के साथ विपक्ष की बोलती बंद कराने में आगे रहते थे। पंचकूला से दूसरी बार विधायक बने ज्ञानचंद गुप्ता अब स्पीकर बन चुके हैं। वह भी कांग्रेस और इनेलो पर पूर्व सरकार के समय चुन-चुनकर शब्दवाण छोड़ते थे।
कांग्रेस से अनेक अनुभवी विधायक पहुंचे विधानसभा
विधानसभा में टीम हुड्डा इस बार भी मजबूत है। पूर्व सीएम हुड्डा के करीबी कुलदीप शर्मा, समधी करण दलाल व आनंद सिंह दांगी बेशक हारे हैं, लेकिन रघुबीर सिंह कादियान, गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, आफताब अहमद, बीबी बत्रा, धर्म सिंह छोक्कर, राव दान सिंह, बिशन लाल, मोहम्मद इलियास जैसे पुराने धुरंधर जीतकर विधानसभा में भी पहुंचे हैं। नए चेहरों में अमित सिहाग, वरुण मुलाना व नीरज शर्मा भी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। भाजपा को घेरने में टीम हुड्डा पहले सत्र में काफी हद तक सफल रही है।
डिप्टी सीएम दुष्यंत ने भी दिखाया दम
डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पहली बार ही चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। पांच साल का उनका सांसद का अनुभव है, जिसके बूते उन्होंने पहले सत्र में खुद के परिपक्व होने का परिचय दिया। वह सीएम व अनिल विज से सलाह-मशविरा करने से भी नहीं हिचकिचाए। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब भी मजबूती के साथ दिया। कहीं से भी उन्होंने यह आभास नहीं होने दिया कि वह पहली बार विधायक बने हैं।
डिप्टी सीएम दुष्यंत ने भी दिखाया दम
डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पहली बार ही चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। पांच साल का उनका सांसद का अनुभव है, जिसके बूते उन्होंने पहले सत्र में खुद के परिपक्व होने का परिचय दिया। वह सीएम व अनिल विज से सलाह-मशविरा करने से भी नहीं हिचकिचाए। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब भी मजबूती के साथ दिया। कहीं से भी उन्होंने यह आभास नहीं होने दिया कि वह पहली बार विधायक बने हैं।