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समागम
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:55 AM IST
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गुरु पूर्णिमा सद्गुरु के पूजन का पर्व
सेक्टर 5 स्थित शालीमार ग्राउंड में दु:ख निवारण समागम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर 5 स्थित शालीमार ग्राउंड में शनिवार को आयोजित दु:ख निवारण समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा का दिवस गुरु को समर्पित है और पूरे कालचक्र में इससे ऊपर महत्व रखने वाली कोई तिथि नहीं है। गुरु पूर्णिमा सद्गुरु के पूजन का पर्व है। हमारी सनातन संस्कृति वेदों पर आधारित है। वेद स्वयं ईश्वर द्वारा रचित हैं, जिन्हें हमारे ऋषि मुनियों ने अपनी ध्यानावस्था में ग्रहण किया था। महर्षि व्यास ने वेदों को चार भागों में बांटा था और महाभारत ग्रंथ की रचना संपूर्ण की थी। यह दिन उनका जन्मदिन भी है। अत: इस पूर्णिमा को उन्हें समर्पित करके व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है और गुरु की पूजा को व्यास पूजा भी कहा जाता है। वहीं इस मौके पर देश-विदेश से उमड़े भक्तों ने ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी से प्रभु कृपा प्राप्त की। वहीं ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा समागम में दिव्य पाठ की शक्तियों का साक्षात्कार आज विश्व के करोड़ों लोग कर रहे हैं।
आज समागम का दूसरा दिन
रविवार को प्रभु कृपा के दूसरे दिन शाम 4 बजे से समागम में बीज मंत्र प्रदान किए जाएंगे। अगला समागम 15 और 16 जुलाई को वृदांवन प्रभुकृपा महाशक्तिपीठ में होगा। ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा कि प्रभु कृपा नाम पाठ कोई जादू या चमत्कार नहीं है बल्कि प्रभु कृपा का वह दुर्लभ आलोक है। जो हमारी सनातन पुरातन मर्यादा के शास्त्रों में छुपा हुआ था। मैं वही आपको दे रहा हूं। ुछ समय के पाठ से आप स्वयं देखेंगे कि आपका जीवन कैसे बदल रहा है।
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सेक्टर 5 स्थित शालीमार ग्राउंड में दु:ख निवारण समागम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर 5 स्थित शालीमार ग्राउंड में शनिवार को आयोजित दु:ख निवारण समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा का दिवस गुरु को समर्पित है और पूरे कालचक्र में इससे ऊपर महत्व रखने वाली कोई तिथि नहीं है। गुरु पूर्णिमा सद्गुरु के पूजन का पर्व है। हमारी सनातन संस्कृति वेदों पर आधारित है। वेद स्वयं ईश्वर द्वारा रचित हैं, जिन्हें हमारे ऋषि मुनियों ने अपनी ध्यानावस्था में ग्रहण किया था। महर्षि व्यास ने वेदों को चार भागों में बांटा था और महाभारत ग्रंथ की रचना संपूर्ण की थी। यह दिन उनका जन्मदिन भी है। अत: इस पूर्णिमा को उन्हें समर्पित करके व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है और गुरु की पूजा को व्यास पूजा भी कहा जाता है। वहीं इस मौके पर देश-विदेश से उमड़े भक्तों ने ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी से प्रभु कृपा प्राप्त की। वहीं ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा समागम में दिव्य पाठ की शक्तियों का साक्षात्कार आज विश्व के करोड़ों लोग कर रहे हैं।
आज समागम का दूसरा दिन
रविवार को प्रभु कृपा के दूसरे दिन शाम 4 बजे से समागम में बीज मंत्र प्रदान किए जाएंगे। अगला समागम 15 और 16 जुलाई को वृदांवन प्रभुकृपा महाशक्तिपीठ में होगा। ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा कि प्रभु कृपा नाम पाठ कोई जादू या चमत्कार नहीं है बल्कि प्रभु कृपा का वह दुर्लभ आलोक है। जो हमारी सनातन पुरातन मर्यादा के शास्त्रों में छुपा हुआ था। मैं वही आपको दे रहा हूं। ुछ समय के पाठ से आप स्वयं देखेंगे कि आपका जीवन कैसे बदल रहा है।
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