फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   जीएसटी स्लैब को लेकर नहीं है स्पष्टता

जीएसटी स्लैब को लेकर नहीं है स्पष्टता

Sat, 08 Jul 2017 01:23 AM IST
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:23 AM IST
विज्ञापन
जीएसटी स्लैब को लेकर नहीं है स्पष्टता
जीएसटी स्लैब पर असमंजस में लोग
विज्ञापन

उद्यमी और व्यापारियों में संशय की स्थिति
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
जीएसटी लागू होने के एक सप्ताह बाद भी छोटे उद्यमियों, व्यापारियों के साथ उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बनी हुई है। उद्यमियों में जहां स्लैब को लेकर स्थिति क्लीयर नही है। वहीं उपभोक्ताओं को चिंता है कि उत्पाद विशेष पर टैक्स की दरें क्या होंगी। टैक्स स्लैब के आधार पर सॉफ्टवेयर अपडेशन की प्रक्रिया पूरी न होने से बाजार में उत्पादों की खरीद-बिक्री में थोड़ी कमी आई है। उद्यमियों और कारोबारियों से बातचीत के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि जीएसटी लागू होने का सर्वाधिक असर एंड यूजर यानी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। हालांकि आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई है। लेकिन अलग अलग उत्पादों पर लगने वाली जीएसटी, माल ढुलाई किराया सहित अन्य पहलुओं को लेकर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है।

फर्नीचर के स्लैब में स्पष्टता नहीं
पंचकूला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव राकेश गर्ग ने बताया कि उनका फर्नीचर का कारोबार है। स्टील फर्नीचर पर टैक्स की दरें पहले से करीब 15 फीसदी अधिक हो गई हैं, लेकिन फर्नीचर के स्लैब में स्पष्टता नहीं है। ऐसे में स्टील फर्नीचर की कीमतें बढ़ेंगी।
विज्ञापन

कैटल फीड के कारोबार से जुड़े सतपाल गुप्ता ने बताया कि जीएसटी से टैक्स में एकरूपता आएगी। लेकिन अभी भी कई उत्पाद हैं, जिनके स्लैब का पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने बताया कि कैटल फीड के लिए जरूरी ब्वॉल्ड ऑयल केक पर कुछ राज्यों में टैक्स, जबकि कुछ में यह टैक्स फ्री था। ऑयल केक पर टैक्स लगाए जाने से कीमत पर थोड़ा बहुत असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मार्केट में स्लो डाउन की स्थिति
टाइल कारोबारी राजीव गोयल ने बताया कि टैक्स की दरें बढ़ने से बीच में चूंकि कई लोगों के हाथों से गुजरने के बाद उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुंचता है। हालांकि व्यापारियों या उद्यमियों को टैक्स इनपुट का फायदा मिलेगा। लेकिन उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ने की पूरी उम्मीद है। टाइल्स पर प्रदेश में टैक्स की दरें 13 फीसदी थी जो बढ़कर 28 फीसदी हो गई हैं। इससे रिहायश के निर्माण पर भी होने वाला खर्च बढ़ जाएगा। टैक्स दर के अलावा इससे संबंधित प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी न होने से मार्केट में स्लो डाउन की स्थिति है। हालांकि अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed