फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   पंचकूला के मेडिसिन बिक्रेताओं ने दवाइयों का खेप मैन्युफेक्चरों वापस भेजना शुरू कर दिया

पंचकूला के मेडिसिन बिक्रेताओं ने दवाइयों का खेप मैन्युफेक्चरों वापस भेजना शुरू कर दिया

Wed, 28 Jun 2017 01:21 AM IST
Updated Wed, 28 Jun 2017 01:21 AM IST
विज्ञापन
पंचकूला के मेडिसिन बिक्रेताओं ने दवाइयों का खेप मैन्युफेक्चरों वापस भेजना शुरू कर दिया
जीएसटी से घबराए विक्रेता, लौटा रहे दवाएं
विज्ञापन

5 से बढ़कर 12 प्रतिशत तक जीएसटी की संभावना
जिले में हो सकती है दवाओं की किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
जीएसटी के मद्देनजर थोक और फुटकर विक्रेताओं ने स्टॉक में रखीं दवाएं वापस मैन्युफेक्चरर्स को भेजनी शुरू कर दी हैं। क्योंकि दवाओं पर अब 5 से बढ़कर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। अब लोगों को दवाओं पर 7 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ेगा। स्टॉकिस्ट वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के तौर-तरीकों की अनिश्चितता से आशंकित हैं। यही वजह है कि वो दवाओं के भंडारण घटा रहे हैं। यहां तक कि कई थोक व्यापारी भारी मात्रा में पड़ी दवाएं वापस कर रहे हैं।

दवाओं की कमी की आशंका
देवेंद्र गोयल ने बताया कि उन्हें इस बात की चिंता है कि जीएसटी लागू होने के बाद कर अदायगी (टैक्स पेआउट्स) और कर वापसी (टैक्स रिफंड्स) के बीच तालमेल की संभावित कमी से नुकसान उठाना पड़ सकता है। दवाओं की कमी की आशंका पर कोहराम मच रहा है और मरीजों से कहा जा रहा है कि वो एक जुलाई से होने वाले गंभीर संकट के मद्देनजर दवाएं अभी ही जमा कर लें। जीएसटी के तहत दवाओं पर लगभग 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। ऐसे में डीलर और स्टॉकिस्ट वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं।
विज्ञापन


खुदरा दुकानदारी पर कोई असर नहीं
दुकानदार नरेश नारंग ने बताया कि इसका खुदरा दुकानदारी पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। दवाओं की कोई कमी नहीं होगी और भंडारण के अभाव को जुलाई के पहले हफ्ते में पूरा कर लिया जाएगा। लोगों को किसी प्रकार से समस्या नहीं आने देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


घबराने की जरूरत नहीं : दीपक
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स दीपक बंसल का मानना है कि स्टॉक कम होने के कारण कुछ दिनों के लिए कुछ दवाओं की मांग और आपूर्ति में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। हालांकि, यह समस्या लंबे वक्त के लिए नहीं रहेगी, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल जीएसटी की रेट को लेकर कुछ असमंजस जरूर है।

दवाओं पर टैक्स लगाना गलत
हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर ने कहा कि दवाएं लोग खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में खाते हैं। इस पर टैक्स लगाने से लोगों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ेगा। दवाइयां लोग बहुत मजबूरी में खरीदता है। कई दवाओं के रेट तो आसमान छू रहे हैं। अरुण पराशर ने कहा कि हालांकि हरियाणा के अस्पतालों में लोगों को दवाएं मुफ्त मिल रही हैं। लेकिन अधिकतर दवाएं लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।


डिस्ट्रीब्यूटर्स ने घटाया स्टॉक
हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के प्रधान केसी गोयल ने बताया कि दवा वितरकों के पास अक्सर 40 दिनों का भंडार रहता है। जबकि खुदरा दुकानदार अपने पास 10 दिन की दवाएं रखते हैं। अब जीएसटी 5 से बढ़कर 12 प्रतिशत हो रहा है। इसलिए जून के आखिरी हफ्ते में डिस्ट्रीब्यूटर अपने स्टॉक 40 दिन से घटाकर 10 दिनों का कर रहे हैं। केसी गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को पत्र लिखकर दवाओं पर जीएसटी लागू करने का निर्णय तुरंत वापस लेने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed