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कुप्रबंधन की मार: हरियाणा में करोड़ों की 1472 रोडवेज बसें हुईं कबाड़, कलपुर्जों ने भी किया बर्बाद

Wed, 05 Dec 2018 09:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 05 Dec 2018 09:16 AM IST
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1472 roadways buses junk condition in Haryana
कबाड़ बनी बसें

कुप्रबंधन की मार ने हरियाणा रोडवेज की कमर तोड़कर रख दी है। प्रदेश के 24 डिपो और 13 सब डिपो में करोड़ों रुपये की 1472 बसें कबाड़ बन गई हैं। 872 बसें कंडम न होने के बावजूद डिपो में जंग खा रही हैं। ये चालू हालत में हैं और किलोमीटर भी पूरे नहीं हुए हैं, मगर टायर, बैटरी और स्टाफ के संकट के कारण इनका पहिया वर्षों से जाम है। 250 रोडवेज बसें कुप्रबंधन के कारण खड़ी हो गई हैं। 

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कुछ समय पहले तक डिपो से निकलकर 100 किलोमीटर तक सफर रोजाना तय करती थीं, अब इनकी सेवाएं भी नहीं ली जा रहीं। 350 लो फ्लोर बसें सरकारी तंत्र की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के समय इन्हें पूर्व हुड्डा सरकार ने खरीदा था। ये बसें भी चंडीगढ़, गुरुग्राम और फरीदाबाद डिपो में कबाड़ बन गई हैं। 
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इन्हें परिवहन विभाग ने अगर कुछ समय और नहीं चलाया तो ये सफेद हाथी बनकर रह जाएंगी। इसके अलावा रोडवेज डिपों में पूर्व परिवहन मंत्री मांगे राम गुप्ता के समय खरीदी नीली एसी बसें भी कबाड़ बन चुकी हैं। पचास बसें उस समय खरीदी गईं, एक बस 55 से 65 लाख के बीच पड़ी थी। ये बसें एक साल से भी कम समय तक सड़कों पर उतरीं, उसके बाद से डिपो से बाहर निकली ही नहीं हैं। वर्तमान में ये बदतर हालात में हैं।

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हर डिपो में कंडम बसों का जखीरा

1472 roadways buses junk condition in Haryana
हरियाणा रोडवेज की बसें

रोडवेज के हर डिपो में कंडम बसें भारी तादात में बरसों से खड़ी हैं। परिवहन विभाग ने इनकी नीलामी ही नहीं करवाई। अकेले चंडीगढ़ डिपो में ऐसी बसों की संख्या लगभग पचास है। अन्य डिपो में 20 से 30 बसें कंडम होने के कारण वर्षों से खड़ी हैं। चंडीगढ़ डिपो में तो 10 वोल्वो भी कबाड़ में शामिल हैं, जिन्हें समय रहते नीलाम किया जाता तो प्रति बस कम से कम 25 लाख रुपये मिलते, अब इन्हें कोई 2 लाख रुपये में भी लेने को तैयार नहीं है। इनमें से अनेक बसें मरम्मत के अभाव और घटिया कलपुर्जों का भी शिकार बनी हैं।

डिपो स्तर पर कलपुर्जों की खरीद में गड़बड़ी, एसीएस-डीजी से जांच की मांग 
परिवहन विभाग के अलावा डिपो स्तर पर भी कलपुर्जों की खरीद जरूरत पड़ने पर की जाती है। इसमें लोकल परचेज पूरे रेट पर होती है, लेकिन कलपुर्जे कम गुणवत्ता के खरीदे जाते हैं। जिससे बसों में आए दिन ब्रेक डाउन और फाल्ट हो रहे हैं। ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन के महासचिव व तालमेल कमेटी के सदस्य बलवान सिंह ने कलपुर्जों की खरीद और डीजल घोटाले की जांच की मांग को लेकर एसीएस परिवहन धनपत सिंह और महानिदेशक आरसी बिढान को पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर जांच हो तो करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आएगा।

चंडीगढ़-पानीपत डिपो घोटाले में जांच ठंडे बस्ते में

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हरियाणा रोडवेज

रोडवेज के चंडीगढ़ डिपो में लगभग डेढ़ साल पहले दो करोड़ रुपये का फर्जी बिल घोटाला सामने आया था। इसमें उन कंपनियों को अदायगी कर दी गई, जिनसे रोडवेज ने खरीद ही नहीं की। इसमें आरोपी कर्मचारी निलंबित होने के बाद से भूमिगत है। पानीपत डिपो में भी बिल बनाने का घोटाला उजागर हुआ था। उसमें भी कर्मचारी को निलंबित करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। दोनों ही मामलों में राशि की रिकवरी नहीं हो पाई है।

लो फ्लोर बसों सहित हर अनियमितता की कराएंगे जांच : पंवार
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार का कहना है कि लो फ्लोर बसों की खरीद की जांच कराने को लेकर सरकार स्तर पर सहमति बन चुकी है। जल्दी इसकी उच्च स्तरीय जांच कराएंगे। डिपो में कलपुर्जों की खरीद में गड़बड़ी और चालू स्थिति वाली बसें के खड़ा होने का मामला उनके अभी संज्ञान में आया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को इसकी भी जांच के आदेश देंगे।

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