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अमृतसर के बहुचर्चित बिक्रमजीत हत्याकांड में 11 पूर्व पुलिसवालों समेत 13 को उम्रकैद

Tue, 09 Jul 2019 12:03 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 09 Jul 2019 12:03 AM IST
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13 convicts Sentenced to Life Imprisonment In Bikramjit Murder case
पूर्व इंस्पेक्टर नौरंग सिंह को ले जाते हुए - फोटो : अमर उजाला

मई 2014 में गुरु नानक देव अस्पताल से उठाए गए हत्यारोपी बिक्रमजीत सिंह की पुलिस टॉर्चर के दौरान हुई मौत के मामले में सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 13 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने दोषी पूर्व इंस्पेक्टर नौरंग सिंह, गुलशन वीर सिंह, सविंदर सिंह (थानेदार), जगजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, लखविंदर सिंह (हेड कांस्टेबल), अमनदीप सिंह, मखतूल सिंह, अंग्रेज सिंह, रणधीर सिंह, लखविंदर सिंह (कांस्टेबल) और बटाला के गैंसपुर निवासी दीपराज सिंह और अमृतसर के चाटीविंड निवासी जगतार सिंह को धारा 302 के साथ-साथ अन्य कई धाराओं के अंतर्गत सजा सुनाई है। सभी पुलिसकर्मी बर्खास्त हैं। मामले में एक आरोपी एएसआई बलजीत सिंह भगौड़ा है। 
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बिक्रमजीत सिंह तरनतारन के अलगोकोठी गांव के अकाली नेता गुरदियाल सिंह सहित छह लोगों की हत्या के आरोप में अमृतसर की केंद्रीय जेल में सजा काट रहा था।

सात मई 2014 को गुमटाला जेल में बंद बिक्रमजीत सिंह की सेहत खराब होने के बाद जेल प्रबंधन ने उसे गुरुनानक देव अस्पताल में दाखिल करवाया था। बिक्रमजीत के जीएनडीएच में दाखिल होने की भनक मिलते ही इंस्पेक्टर नौरंग सिंह अपनी पुलिस पार्टी के साथ अस्पताल पहुंचा और बिक्रमजीत को जबरदस्ती अस्पताल से उठाकर ले गया। 

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इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस के तत्कालीन उच्चाधिकारियों को दे दी थी। जिला पुलिस दो दिन तक बिक्रमजीत सिंह के अपहरण के बारे में कोई भी जानकारी नहीं जुटा पाई। दो दिन बाद बिक्रम की लाश श्री कीरतपुर साहिब के पास नहर से बरामद हुई थी। जिला पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर इंस्पेक्टर नौरंग सिंह और उसके सहयोगियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की थी।

पुलिस जांच में पाया गया कि इंस्पेक्टर नौरंग सिंह अपनी पुलिस पार्टी के साथ बिक्रमजीत सिंह को बटाला स्थित एक ट्रैक्टर मरम्मत वाली वर्कशाप में ले गया था, जहां बिक्रमजीत को पहले टॉर्चर किया गया फिर उसकी हत्या कर दी गई। नौरंग और उसे साथियों ने बिक्रम पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया था। बाद में उसके शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए उसे कीरतपुर की नहर में फेंक दिया था। 

नौरंग सिंह ने कहा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे 
उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर दोषी इंस्पेक्टर नौरंग सिंह ने कहा कि, बिक्रम सिंह के परिवार ने पुलिस के सामने रोष प्रदर्शन से दबाव बनाकर उस पर मामला दर्ज करवाया है, जबकि बिक्रम का परिवार आतंकवाद से संबंध रखता है। वह जिला अदालत के फैसले के विरुद्ध पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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