Haryana News: साइबर अपराधों में 136 प्रतिशत की वृद्धि, 5000 पुलिसकर्मियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
इस साल अगस्त तक 8,516 फोन नंबर पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी उन शीर्ष तीन जिलों में शामिल हैं, जिन्होंने साइबर अपराध करने में वाले फोन नंबरों को सबसे अधिक संख्या में पोर्टल पर अपलोड किया किया।
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हरियाणा में पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराधों की शिकायतों की रिपोर्टिंग में 136 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ते साइबर अपराध को देखते हरियाणा पुलिस ने पांच हजार पुलिस कर्मचारियों को साइबर का प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया है। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रशिक्षण केंद्र (साइट्रेन) के पोर्टल पर ऑनलाइन होगा। इसमें इच्छा के अनुसार पुलिस कर्मचारी और अधिकारी हिस्सा ले सकेंगे। यह कोर्स पूरा करने के बाद जवान साइबर के तमाम मामलों को सुलझाने में निपुण होंगे।
एडीजीपी ओपी सिंह ने 29 साइबर पुलिस थाना एसएचओ और सभी जिला नोडल अधिकारियों (डीएसपी और एएसपी) की बैठक ली। बैठक में बताया गया कि इस साल अगस्त तक साइबर क्राइम की 36,996 शिकायतें साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930, पोर्टल cybercrime.gov.in, 309 साइबर-डेस्क और 29 साइबर पुलिस स्टेशनों पर प्राप्त हुई थीं।
इनमें से 20,484 प्रक्रियाधीन हैं और 15,057 का निपटारा किया जा चुका है। हाई वैल्यू के 88 मामलों पर काम करने पर विशेष जोर दिया, जिसमें धोखाधड़ी की राशि पांच लाख रुपये से अधिक थी। उन्होंने ऐसे आठ मामलों के जांच अधिकारियों की सराहना की, जिन्हें सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया और 58 जालसाजों को गिरफ्तार किया गया। 1930 पर शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने और अगस्त तक लगभग 13 करोड़ रुपये की वसूली के लिए साइबर इकाइयों की प्रशंसा की।
तीन थानों ने निपटाई सबसे अधिक शिकायतें
शिकायतों के अधिकतम निपटान करने में राज्य अपराध शाखा के साइबर पुलिस स्टेशन, पानीपत और सोनीपत शामिल हैं। जांच पूरी करने वाले शीर्ष तीन जिलों में करनाल, सिरसा और भिवानी शामिल हैं। एडीजीपी ने अधिकारियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित साइबर सेफ पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करने और साइबर अपराध करने के लिए दुरुपयोग किए जाने वाले फोन नंबर अपलोड करने के लिए कहा। ताकि इन्हें अवरुद्ध किया जा सके। इस साल अगस्त तक 8,516 नंबर इस पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी उन शीर्ष तीन जिलों में शामिल हैं, जिन्होंने साइबर अपराध करने में वाले फोन नंबरों को सबसे अधिक संख्या में पोर्टल पर अपलोड किया किया।
1930 नंबर के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ताकि वे साइबर धोखाधड़ी की शीघ्र रिपोर्ट कर सकें और फर्जी खातों से साइबर अपराधियों द्वारा पैसे निकालने से पहले धोखाधड़ी के पैसे को रोका जा सके। पांच हजार पुलिस कर्मचारियों को साइबर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। - ओपी सिंह, एडीजीपी, नोडल अधिकारी, साइबर अपराध।