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12वीं की छात्रा बनी सरपंच, सिलेक्शन की कहानी 'नायक' की याद दिलाएगी

Mon, 15 Aug 2016 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Mon, 15 Aug 2016 09:18 AM IST
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12th class topper sushila selected as one day sarpanch of village like naayak movie one day cm
12वीं की टॉपर सुशीला बनी गांव की एक दिन की सरपंच - फोटो : अमर उजाला
12वीं की छात्रा गांव की सरपंच बनने जा रही है, लेकिन इसके सिलेक्शन की कहानी सुनेंगे तो आपको 'नायक' की याद आ जाएगी। हरियाणा के हिसार में नायक फिल्म की तर्ज पर एक बेटी को एक दिन का सरपंच बनाया जाएगा। गांव धांसू में एक दिन की सरपंच के लिए 12वीं पास तीन टॉपर्स लड़कियों ने दावा किया था।
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मामला बढ़ने पर पंचायत को दखल देना पड़ा और शनिवार को पंचायत बुलाई गई। शाम तक चली पंचायत ने फैसला लिया कि सरकारी स्कूल में पढ़कर 12वीं कक्षा में सबसे अधिक अंक लेने वाली बेटी सुशीला खटोड़ 15 अगस्त के दिन गांव की सरपंच रहेगी। धांसू के सरपंच मनोहर लाल ने बताया कि गांव में सरकारी स्कूलों के विकास के लिए सुशीला खटोड़ को एक दिन के लिए सरपंच बनाया जाएगा।
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सुशीला ने पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में ही की है। इसी बात को देखते हुए पंचायत और ग्रामीणों ने सुशीला को एक दिन का सरपंच बनाने का फैसला लिया है। हालांकि निजी स्कूलों से 12वीं पास करने वाली आरती सैनी, कविता खिलेरी के सुशीला से अधिक अंक हैं, लेकिन सुशीला के सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए भी 81 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से चुना गया।
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15 अगस्त को स्कूल में फहराएंगी तिरंगा

12th class topper sushila selected as one day sarpanch of village like naayak movie one day cm
तिरंगा
एक दिन के लिए सरपंच चुने जाने पर बनी सहमति के बाद सुशीला स्वतंत्रता दिवस पर गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में तिरंगा फहराएंगी, उसके बाद पंचायत संबंधी काम करेगी।

गांव में स्कूल की दशा सुधारने को देंगी प्राथमिकता
सुशीला खटोड़ से ये पूछने पर कि एक दिन की सरपंच बनने पर उसकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी तो उसने बताया कि गांव के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वह बचपन से पढ़ी है, उस स्कूल की दशा सुधारने के लिए प्रयास करेगी। स्कूल की इमारत काफी पुरानी हो गई है।

स्कूल में छात्रों के लिए कमरों की भी कमी है। इन कमियों को दूर करने का प्रयास करूंगी और साथ ही स्कूल में पानी, बाथरूम की सुविधाओं को बढ़ावा देंगी। ग्रामीणों को लड़कियों को पढ़ाने के लिए भी जागरूक करूंगी।

गांवों में बसों की समस्या करूंगी दूर
सुशीला ने बताया कि गांव में बाहर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं है। इस कारण गांव की लड़कियां जो बीए, बीकॉम आदि करने के लिए शहर के कॉलेजों में जाती हैं। उन्हें आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान की दिशा में भी कुछ काम करना चाहूंगी।
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