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Chandigarh News: पंजाब में 124 ब्लैक स्पॉट हुए खत्म, हादसों में मौतों की संख्या 35 फीसदी हुई कम
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राज्य की सड़कों पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए पीआरएसटीआरसी एक साल से कर रहा है काम
राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार के लिए 1100 करोड़ की लागत से किया जा रहा है काम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में सड़क हादसों को कम करने के लिए पंजाब सड़क सुरक्षा और यातायात अनुसंधान केंद्र (पीआरएसटीआरसी) सड़कों को सुधारने और हादसे रोकने के लिए काम कर रहा है। संस्थान ने पूरे राज्य में 784 एक्सीडेंट ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है। राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार के लिए 1100 करोड़ की लागत से काम किया जा रहा है। केंद्र ने एनएचएआई के साथ मिलकर गत एक वर्ष में अब तक 239 ब्लैक स्पॉट्स पर काम किया है। 124 ब्लैक स्पॉट्स खत्म हो गए हैं। साथ ही ब्लैक स्पॉट्स में 52 प्रतिशत की महत्वपूर्ण कमी का पता चलता है, जबकि हादसों में मौतों की संख्या में 35 फीसदी कम हुई है। यह खुलासा शनिवार को पीआरएसटीआरसी के अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ट्रैफिक एएस राय ने किया। उन्होंने का कहा कि सेंटर गत एक साल से काम कम रहा है। इसके अच्छे नतीजे आए हैं।
पंजाब ट्रैफिक एडवाइजर-कम-डायरेक्टर पीआरएसटीआरसी डॉ. नवदीप असीजा ने बताया कि 2016-2018 के दौरान ब्लैक स्पॉट्स के कारण 1434 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। जबकि मूल्यांकन के दौरान इन ब्लैक स्पॉट्स पर मौतों की संख्या कम होकर 932 हो गई है। यह इन स्थानों पर होने वाली मौतों में 35 फीसदी की महत्वपूर्ण कमी को दिखाता है। गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज लुधियाना में मेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक मैनेजमेंट में एक क्षेत्रीय अनुसंधान की स्थापना की गई है। 500 से अधिक पुलिस कर्मचारियों को हादसों की जांच और नवीनतम मोटर वाहन संशोधनों के बारे में प्रशिक्षण दिया है। यह सेंटर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को परामर्श सेवाएं भी प्रदान करता है। यह सेंटर अनुसंधान और विकास कार्यों और सामर्थ्य निर्माण संबंधी आईआईटी रुड़की और आईआईटी दिल्ली जैसी प्रसिद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस सेंटर की एक और बड़ी उपलब्धि पाथ्स (पंजाब असेसमेंट टूल ऑफ हाईवे सेफ्टी) भी है। पाथ्स उन क्षेत्रों का आकलन और पहचान करने के लिए अभिनव साधन है, जिन क्षेत्रों को सुरक्षित सड़कों के पक्ष से सुधार की जरूरत होती है।
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राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार के लिए 1100 करोड़ की लागत से किया जा रहा है काम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में सड़क हादसों को कम करने के लिए पंजाब सड़क सुरक्षा और यातायात अनुसंधान केंद्र (पीआरएसटीआरसी) सड़कों को सुधारने और हादसे रोकने के लिए काम कर रहा है। संस्थान ने पूरे राज्य में 784 एक्सीडेंट ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है। राष्ट्रीय राजमार्गों के सुधार के लिए 1100 करोड़ की लागत से काम किया जा रहा है। केंद्र ने एनएचएआई के साथ मिलकर गत एक वर्ष में अब तक 239 ब्लैक स्पॉट्स पर काम किया है। 124 ब्लैक स्पॉट्स खत्म हो गए हैं। साथ ही ब्लैक स्पॉट्स में 52 प्रतिशत की महत्वपूर्ण कमी का पता चलता है, जबकि हादसों में मौतों की संख्या में 35 फीसदी कम हुई है। यह खुलासा शनिवार को पीआरएसटीआरसी के अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ट्रैफिक एएस राय ने किया। उन्होंने का कहा कि सेंटर गत एक साल से काम कम रहा है। इसके अच्छे नतीजे आए हैं।
पंजाब ट्रैफिक एडवाइजर-कम-डायरेक्टर पीआरएसटीआरसी डॉ. नवदीप असीजा ने बताया कि 2016-2018 के दौरान ब्लैक स्पॉट्स के कारण 1434 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। जबकि मूल्यांकन के दौरान इन ब्लैक स्पॉट्स पर मौतों की संख्या कम होकर 932 हो गई है। यह इन स्थानों पर होने वाली मौतों में 35 फीसदी की महत्वपूर्ण कमी को दिखाता है। गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज लुधियाना में मेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक मैनेजमेंट में एक क्षेत्रीय अनुसंधान की स्थापना की गई है। 500 से अधिक पुलिस कर्मचारियों को हादसों की जांच और नवीनतम मोटर वाहन संशोधनों के बारे में प्रशिक्षण दिया है। यह सेंटर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को परामर्श सेवाएं भी प्रदान करता है। यह सेंटर अनुसंधान और विकास कार्यों और सामर्थ्य निर्माण संबंधी आईआईटी रुड़की और आईआईटी दिल्ली जैसी प्रसिद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस सेंटर की एक और बड़ी उपलब्धि पाथ्स (पंजाब असेसमेंट टूल ऑफ हाईवे सेफ्टी) भी है। पाथ्स उन क्षेत्रों का आकलन और पहचान करने के लिए अभिनव साधन है, जिन क्षेत्रों को सुरक्षित सड़कों के पक्ष से सुधार की जरूरत होती है।
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