फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   10th Chandigarh Literary International Lit Festival begins at Lake Club, litterateurs and leaders from across the country gather

Chandigarh News: लेक क्लब में 10वां चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल शुरू, जुटे देशभर के साहित्यकार और नेता

Sun, 18 Dec 2022 09:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 18 Dec 2022 09:00 AM IST
विज्ञापन
10th Chandigarh Literary International Lit Festival begins at Lake Club, litterateurs and leaders from across the country gather
चंडीगढ़। सेक्टर-एक स्थित लेक क्लब में चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की ओर से 10वें चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल का शनिवार को शुभारंभ हुआ। इसमें देशभर से कई जाने-माने लेखक और नेता पहुंचे और अपनी बात रखी। सोसायटी की प्रधान डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी का स्वागत किया और कई यादें साझा कीं।
विज्ञापन

कार्यक्रम का उद्घाटन लेखक गुरचरण दास ने किया। उन्होंने अपने बचपन से लेकर पढ़ाई, अपने काम और लेखन के बारे में बताया। इसके बाद सूफीवाद पर चर्चा के लिए एक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर, राणा साफवी, अफ्फन येसवी, दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के गद्दीनशीन पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन

इस दौरान पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने कहा कि आज के बंटे हुए माहौल में दरगाहें सबको एक मंच पर लाने का माध्यम हैं। यहां पर सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोग बैठकर बातें कर सकते हैं। दरगाहें हमेशा से धार्मिक सद्भावना और प्रेम का संदेश देती आईं हैं। सूफियों का पैगाम ही मोहब्बत है। वे हमेशा से आपसी प्यार का पैगाम देते हैं। उन्होंने कहा कि 750 वर्षों से दरगाहों में बसंत मनाई जाती है, यह हिंदू त्योहार है। यही तो कौमी एकता का पैगाम है। सभी मोहब्बत से रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

राणा साफवी ने कहा कि सूफीवाद भारत के पंजाब में आया, बाबा गंज बक्श के माध्यम से। उस वक्त दक्षिण में भक्ति आंदोलन चल रहे थे। सूफीवाद और भक्ति आंदोलन एक दूसरे के साथ थे। उन्होंने कहा कि नाथ योगी और सूफी संत मिलते थे। सूफियों ने योगी से योग सीखे। उन्होंने कहा कि जो दूसरे के लिए जीते हैं, उन्हें बहुत सवाब मिलता है।

डॉ. सुरजीत पातर ने कहा कि सूफी धारा से पंजाबी साहित्य की सवेर है। पंजाबी के पहले कवि बाबा फरीद हैं। बुल्लेशाह दोपहर की शिखर धारा हैं। कहा कि सूफीवाद में कवियों ने लिखा है कि ‘मोहब्बत मेरी किस्मत नहीं थी, इबादत से गुजारा कर रहा हूं...’ उन्होंने यह भी कहा कि चार नैन घुल मिल जाएं तो बिचौलिए की क्या जरूरत है। डॉ. पातर ने कहा कि पांच दरिया है। इसमें पांच धाराएं अदबी की हैं। इसमें फोकलोर धारा, सूफी धारा, गुरमुखी धारा, किस्सा कव्वाली और वीर काव्य शामिल हैं। इस सत्र के बाद हरफ, कलाम ते स्याही : पूंजी जिंदगी दी विषय पर डॉ. सुरजीत पातर और डॉ. लखविंदर जौलह के बीच बातचीत हुई। इसमें डॉ. पातर ने कविताओं पर चर्चा की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed