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Chandigarh News: लेक क्लब में 10वां चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल शुरू, जुटे देशभर के साहित्यकार और नेता
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चंडीगढ़। सेक्टर-एक स्थित लेक क्लब में चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की ओर से 10वें चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल का शनिवार को शुभारंभ हुआ। इसमें देशभर से कई जाने-माने लेखक और नेता पहुंचे और अपनी बात रखी। सोसायटी की प्रधान डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी का स्वागत किया और कई यादें साझा कीं।
कार्यक्रम का उद्घाटन लेखक गुरचरण दास ने किया। उन्होंने अपने बचपन से लेकर पढ़ाई, अपने काम और लेखन के बारे में बताया। इसके बाद सूफीवाद पर चर्चा के लिए एक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर, राणा साफवी, अफ्फन येसवी, दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के गद्दीनशीन पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने हिस्सा लिया।
इस दौरान पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने कहा कि आज के बंटे हुए माहौल में दरगाहें सबको एक मंच पर लाने का माध्यम हैं। यहां पर सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोग बैठकर बातें कर सकते हैं। दरगाहें हमेशा से धार्मिक सद्भावना और प्रेम का संदेश देती आईं हैं। सूफियों का पैगाम ही मोहब्बत है। वे हमेशा से आपसी प्यार का पैगाम देते हैं। उन्होंने कहा कि 750 वर्षों से दरगाहों में बसंत मनाई जाती है, यह हिंदू त्योहार है। यही तो कौमी एकता का पैगाम है। सभी मोहब्बत से रहें।
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राणा साफवी ने कहा कि सूफीवाद भारत के पंजाब में आया, बाबा गंज बक्श के माध्यम से। उस वक्त दक्षिण में भक्ति आंदोलन चल रहे थे। सूफीवाद और भक्ति आंदोलन एक दूसरे के साथ थे। उन्होंने कहा कि नाथ योगी और सूफी संत मिलते थे। सूफियों ने योगी से योग सीखे। उन्होंने कहा कि जो दूसरे के लिए जीते हैं, उन्हें बहुत सवाब मिलता है।
डॉ. सुरजीत पातर ने कहा कि सूफी धारा से पंजाबी साहित्य की सवेर है। पंजाबी के पहले कवि बाबा फरीद हैं। बुल्लेशाह दोपहर की शिखर धारा हैं। कहा कि सूफीवाद में कवियों ने लिखा है कि ‘मोहब्बत मेरी किस्मत नहीं थी, इबादत से गुजारा कर रहा हूं...’ उन्होंने यह भी कहा कि चार नैन घुल मिल जाएं तो बिचौलिए की क्या जरूरत है। डॉ. पातर ने कहा कि पांच दरिया है। इसमें पांच धाराएं अदबी की हैं। इसमें फोकलोर धारा, सूफी धारा, गुरमुखी धारा, किस्सा कव्वाली और वीर काव्य शामिल हैं। इस सत्र के बाद हरफ, कलाम ते स्याही : पूंजी जिंदगी दी विषय पर डॉ. सुरजीत पातर और डॉ. लखविंदर जौलह के बीच बातचीत हुई। इसमें डॉ. पातर ने कविताओं पर चर्चा की।
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कार्यक्रम का उद्घाटन लेखक गुरचरण दास ने किया। उन्होंने अपने बचपन से लेकर पढ़ाई, अपने काम और लेखन के बारे में बताया। इसके बाद सूफीवाद पर चर्चा के लिए एक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर, राणा साफवी, अफ्फन येसवी, दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के गद्दीनशीन पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने हिस्सा लिया।
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इस दौरान पीरजादा सैयद अल्तमश निजामी ने कहा कि आज के बंटे हुए माहौल में दरगाहें सबको एक मंच पर लाने का माध्यम हैं। यहां पर सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोग बैठकर बातें कर सकते हैं। दरगाहें हमेशा से धार्मिक सद्भावना और प्रेम का संदेश देती आईं हैं। सूफियों का पैगाम ही मोहब्बत है। वे हमेशा से आपसी प्यार का पैगाम देते हैं। उन्होंने कहा कि 750 वर्षों से दरगाहों में बसंत मनाई जाती है, यह हिंदू त्योहार है। यही तो कौमी एकता का पैगाम है। सभी मोहब्बत से रहें।
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राणा साफवी ने कहा कि सूफीवाद भारत के पंजाब में आया, बाबा गंज बक्श के माध्यम से। उस वक्त दक्षिण में भक्ति आंदोलन चल रहे थे। सूफीवाद और भक्ति आंदोलन एक दूसरे के साथ थे। उन्होंने कहा कि नाथ योगी और सूफी संत मिलते थे। सूफियों ने योगी से योग सीखे। उन्होंने कहा कि जो दूसरे के लिए जीते हैं, उन्हें बहुत सवाब मिलता है।
डॉ. सुरजीत पातर ने कहा कि सूफी धारा से पंजाबी साहित्य की सवेर है। पंजाबी के पहले कवि बाबा फरीद हैं। बुल्लेशाह दोपहर की शिखर धारा हैं। कहा कि सूफीवाद में कवियों ने लिखा है कि ‘मोहब्बत मेरी किस्मत नहीं थी, इबादत से गुजारा कर रहा हूं...’ उन्होंने यह भी कहा कि चार नैन घुल मिल जाएं तो बिचौलिए की क्या जरूरत है। डॉ. पातर ने कहा कि पांच दरिया है। इसमें पांच धाराएं अदबी की हैं। इसमें फोकलोर धारा, सूफी धारा, गुरमुखी धारा, किस्सा कव्वाली और वीर काव्य शामिल हैं। इस सत्र के बाद हरफ, कलाम ते स्याही : पूंजी जिंदगी दी विषय पर डॉ. सुरजीत पातर और डॉ. लखविंदर जौलह के बीच बातचीत हुई। इसमें डॉ. पातर ने कविताओं पर चर्चा की।