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Chandigarh News: क्लेम न देने पर बीमा कंपनी पर 10 हजार का हर्जाना

Sun, 03 Sep 2023 01:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 01:58 AM IST
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10,000 fine on the insurance company for not giving the claim
चंडीगढ़। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मरीज के इलाज पर खर्च रकम का भुगतान न करने पर रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दोषी मानते हुए 10 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। आयोग ने केस खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये और उपचार के दौरान खर्च की गई राशि में बकाया 1 लाख 15 हजार 793 रुपये की रकम 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज दर के साथ वापस करने के आदेश दिए हैं। मामले के मुताबिक हादसे का शिकार होने के बाद दांतों के उपचार के बिल की पूरी रकम पीड़िता को नहीं दी गई। वहीं बीमा कंपनी ने कहा कि उपभोक्ता ने 14 सितंबर 2019 को अस्पताल के माध्यम से इलाज के लिए कैशलेस अनुरोध किया था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद 1,18,500 रुपये का क्लेम का दावा किया, जिसमें से आठ हजार रुपये केवल रूट कैनाल थेरेपी के लिए स्वीकृत किए गए थे। हालांकि, दांतों का इंप्लांट शुल्क पॉलिसी के नियमों और शर्तों में नहीं आता। दोनों पक्षों की ओर से पेश तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया है।
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क्या था मामला
जीरकपुर के हरमिलाप नगर फेज-1 की रहने वाली दिव्या ने भोला रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया कि उक्त कंपनी से उन्होंने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसे वह समय-समय पर रिन्यू भी करवाती रहीं। एक दिन 8 दिसंबर 2019 को वह सड़क हादसे में घायल हो गईं। उन्हें पंचकूला के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पता चला कि उनकी नाक की हड्डियाें में गहरी चोट लगने से फ्रैक्चर होने के साथ कुछ दांत टूट गए हैं। उन्होंने कैश लेस क्लेम के लिए कंपनी को सूचित किया। बीमा कंपनी ने उन्हें 44 हजार 897 रुपये के कैशलेस क्लेम को मंजूरी दे दी। शिकायतकर्ता ने डाक्टर की सलाह के अनुसार दांतों का इंप्लांट करवाया, जिसमें 1 लाख 23 हजार 793 रुपये का बिल बना। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी से क्लेम की मांग की तो कंपनी ने केवल 8 हजार रुपये का ही भुगतान किया। कई बार अनुरोध करने के बावजूद शेष राशि का भुगतान नहीं किया।
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