चंडीगढ़ की 'दबंग' मेयर के 10 चौंकाने वाले राज
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अमर उजाला के ऑफिस पहुंची चंडीगढ़ की नई 'दबंग' मेयर पूनम शर्मा ने अपने बारे में चौंकाने वाले राज बताए। पूनम शर्मा मंगलवार को मेयर का चुनाव जीतने के बाद सेक्टर-9डी स्थित अमर उजाला दफ्तर
पूनम शर्मा का कहना है कि उन्होंने सिर्फ राजनीति में ही जीत हासिल नहीं की है, बल्कि आम ग्रहणी की तरह सभी काम खुद करने में सक्षम हैं।
पेशे से वकील पूनम शर्मा ने कहा कि वह आम महिलाओं की दिक्कतों को बेहतर तरीके से समझती हैं। इस लिए शहर की महिलाओं की दिक्कतों को प्राथमिकता से दूर करने की कोशिश करेंगी।
मेयर बनने के बाद भी बनी रहेंगी आम गृहिणी
अमर उजाला टीम से पूनम शर्मा ने कहा कि मेयर बनने के बाद भी वह आम गृहिणी की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वाह करेंगी। खुद को बेहतरीन कुक बताने वाली पूनम शर्मा ने चैलेंज दिया कि कोई आधे घंटे के भीतर 30 लोगों का खाना तैयार करके दिखाए।
खुद को शाकाहारी मानने वाली शर्मा ने कहा कि घर में परिवार के अन्य सदस्यों के लिए नॉनवेज की भी ढेरों डिश वह मिनटों में तैयार कर देती हैं।
मेयर ने कहा चुनाव को लेकर महीने भर से काफी व्यस्त थीं, लेकिन उन्होंने परिवार के सभी फर्ज बखूबी निभाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि शहर की समस्याओं को हल करने के साथ-साथ वह परिवार को भी पूरा समय देंगी।
गार्डन में कस्सी चलाती हूं...
शर्मा ने बताया कि अगर उनके घर में माली नहीं आए, तो वह खुद गार्र्डन में कस्सी चलाने और घर की सफाई करने में कभी संकोच नहीं करती हैं। मेयर आज के दौर की आत्मविश्वास से भरी युवती की तरह निसंकोच ट्रैक्टर, ओपन जीप और गाड़ी खुद ड्राइव कर सकती हैं।
एक्सीडेंट में बचाई कई युवकों की जान
एक पुरानी घटना को याद करते हुए पूनम शर्मा ने बताया कि एक बार बीच रास्ते में एक्सीडेंट में कई युवक घायल हो गए थे। राहगीर गुजरते रहे, लेकिन किसी ने उनको बचाने का प्रयास नहीं किया। उस समय पूनम शर्मा ने घायल युवकों को गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। शर्मा ने कहा कि मुसीबत में फंसे किसी इंसान की मदद मदद करनी चाहिए।
बारह साल पहले ही दिखाई दबंगई
शहर की नई मेयर पूनम शर्मा को उनकी दबंगई के लिए जाना जाता है। उनकी ये दबंगई 12 साल पहले ही नजर आ गई थी जब उन्होंने प्रशासन के फैसले का विरोध करते हुए जनता के हित में नई सड़क बनवाई।
वर्ष 2002 में उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से धनास के बीच जंगल के रास्ते पर सड़क बनाने का बीड़ा उठाया था। प्रशासन इस पर राजी नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने दम पर ये सड़क बनवा दी। बड़ी बात ये है कि पूनम उस समय पार्षद भी नहीं थीं।
उपचुनाव में अब जीत की उम्मीद
नगर निगम के वार्ड नंबर-10 में उपचुनाव होने हैं। मेयर चुनाव में मिली करिश्माई जीत के बाद उपचुनाव में विजय हासिल करना कांग्रेस के लिए आसान दिख रहा है। अब कांग्रेस का अगला लक्ष्य उपचुनाव जीतना है।
नगर निगम के इतिहास में कांग्रेस ने कभी उपचुनाव नहीं हारा है। पिछले साल अक्टूबर में वार्ड नंबर-10 के पार्षद मलकीयत सिंह का देहांत हो गया था। तब से ये वार्ड खाली है।
पेश से वकील हूं तो सूझबूझ कर बनाई रणनीति
पूनम शर्मा ने बताया कि कांग्रेसी पार्षदों के खेमे में मैं अकेली वकालत के प्रोफेशन से जुड़ी हैं। जबकि भाजपा में 5 पार्षद वकालत कर रहे हैं। भाजपा में सतिंदर सिंह, अरुण सूद, सौरभ जोशी, देवेश मोदगिल और आशा जसवाल पेशे से वकील हैं।
नगर निगम सदन में अक्सर भाजपा के वकीलों की ये फौज कांग्रेस पर भारी पड़ जाती है। कानूनी दांव-पेंच में कई बार भाजपा पार्षद कांग्रेसियों को फंसा लेते हैं।
अब जब मेयर चुनाव जीतने की बारी आई तो भाजपा की ये फौज कांग्रेसियों की चाल को परख न सकी और पूरी बाजी ही उलटी पड़ गई। हाउस में हंगामा करने वालों को कांग्रेस की इस वकील ने अपनी सूझबूझ और शालीनता से पटखनी दे दी।