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Haryana : खेतों से लेकर मंडियों तक फसलों को भारी नुकसान, तिरपाल के बिना भीग गया 10 लाख मीट्रिक टन धान

Wed, 12 Oct 2022 12:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 12 Oct 2022 12:55 AM IST
सार

सितंबर माह में प्रदेश में हुई बारिश के चलते 87 हजार से अधिक किसानों की 3.28 लाख एकड़ में खड़ी फसल खराब हुई है। इसके लिए सरकार ने ई-क्षति पूर्ति पोर्टल लांच किया था। किसानों ने फसल खराब की फोटो समेत पूरी जानकारी पोर्टल पर दे रखी है।

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10 lakh metric tonnes of paddy soaked in the mandis of Haryana
इंद्री अनाज मंडी में बारिश में भीगी धान की बोरियों को उठाते मजदूर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा में चल रही बेमौसम बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। खेतों से लेकर मंडियों तक फसलों को नुकसान हो रहा है। पिछले चार दिन से लगातार बारिश से धान की कटाई बाधित हो गई है, जबकि मंडियों में पड़ी 10 लाख मीट्रिक टन फसल भीग गई है। इससे खरीद प्रक्रिया भी बाधित हो गई है। धान में नमी अधिक होने के चलते किसानों को पूरा रेट नहीं मिल रहा। 

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अभी तक प्रदेशभर की मंडियों में 26 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसमें से 16.92 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है, शेष 10 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा है। इस साल 50 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। उठान धीमा होने से मंडियां धान से अटी हुई हैं। 
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पिछले चार दिन से हो रही बारिश का सबसे ज्यादा असर धान और कपास की फसलों पर पड़ रहा है। खेतों में खड़ी बासमती धान की फसल जमीन पर गिर गई है, जबकि पीआर की कटाई प्रभावित हुई है। बारिश व हवा से कपास के फूल नीचे गिरने से उसका उत्पादन भी कम होगा। 
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दूसरी ओर, तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के चलते मंडियों में फसलें भीग रही हैं। हालांकि, लाइसेंस लेते समय आढ़ती की जिम्मेदारी होती है कि वह तिरपाल की व्यवस्था करे लेकिन मंडियों के अधिकारियों की लापरवाही के चलते किसानों की फसलें खराब हो रही हैं। 

10 lakh metric tonnes of paddy soaked in the mandis of Haryana
कैथल में बारिश से भीगी धान की ढेरी को सुखाता मजदूर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सितंबर में 87 हजार किसानों की खराब हो चुकी फसल
सितंबर माह में प्रदेश में हुई बारिश के चलते 87 हजार से अधिक किसानों की 3.28 लाख एकड़ में खड़ी फसल खराब हुई है। इसके लिए सरकार ने ई-क्षति पूर्ति पोर्टल लांच किया था। किसानों ने फसल खराब की फोटो समेत पूरी जानकारी पोर्टल पर दे रखी है। अब सरकार किसानों के इन खराबे के दावों को फिजिकली चेक करा रही है। इसके लिए सप्ताह का समय दिया गया था। पटवारी और कानूनगो इसकी जांच कर रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेजी जाएगी। 

जीटी रोड की मंडियों में भीगा 2.33 लाख मीट्रिक टन धान
जीटी बेल्ट के जिलों की मंडियों में सोमवार तक करीब 7.77 लाख मीट्रिक टन धान अभी उठान के इंतजार में पड़ा है। यह धान ढेरियों और बोरियों में है। पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से मंडियों में 2.33 लाख मीट्रिक टन धान भीग गया है। स्थिति यह है कि कई मंडियों में तिरपालों से ढका धान अंकुरित होने लगा है, जो कि बिक्री योग्य नहीं रह गया, जबकि बोरियों में रखे भीग चुके धान के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। किसानों ने नुकसान के लिए सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई है।

कैथल में अब तक 467565 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, उठान 253832 मीट्रिक टन हुई है। अभी 213733 मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा है। इसी तरह अंबाला में अब तक 301125 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, उठान 201011 मीट्रिक टन हुई है। अभी 100114 मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा है। यमुनानगर में अब तक 286000 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, उठान 217272 मीट्रिक टन हुई है। अभी 68728 मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा है।

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जगाधरी अनाज मंडी में खुले में रखी धान की बोरियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल में धान की कुल खरीद 585475 मीट्रिक टन, उठान 430516 मीट्रिक टन और मंडियों में 154959 मीट्रिक टन धान पड़ा है। पानीपत में अभी उठान शुरू नहीं हुई है। वहां कुल खरीद 48867 मीट्रिक टन और मंडियों में 48867 मीट्रिक टन धान पड़ा है। कुरुक्षेत्र में कुल खरीद 724000 मीट्रिक टन, उठान 527000 मीट्रिक टन और मंडियों में 197000 मीट्रिक टन पड़ा है।

महेंद्रगढ़ में 30 हजार 703 बैग बाजरा खराब होने की आशंका
मौसम खुलने के बाद मंगलवार को मंडियों में भी खरीद शुरू हुई। रोहतक में शाम तक 1200 क्विंटल पीआर धान पहुंचा। इसमें से 950 क्विंटल की खरीद हुई। वहीं महेंद्रगढ़ क्षेत्र की तीन मंडियों में 30 हजार 703 बैग बाजरे पर खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। 

शुक्रवार से रविवार तक तीन दिन में 66 एमएम बारिश हुई थी। महेंद्रगढ़, कनीना व सतनाली मंडियों में खुले आसमान के नीचे बाजरे को तिरपालों के सहारे बचाने का प्रयास किया गया था। भीगे बाजरे में जमवार शुरू हो चुकी है। झज्जर अनाज मंडी में अब तक करीब 75 हजार क्विंटल बाजरे की आवक हो चुकी है। हैफेड एजेंसी की ओर से कुल 35964 क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। मंगलवार को 480 क्विंटल बाजरे की खरीद और 3074 क्विंटल बाजरे का उठान हुआ। अब तक कुल 17695 क्विंटल बाजरे का उठान हो चुका है।

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इंद्री अनाज मंडी में बारिश में भीगी धान की बोरियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

कासंडी और रेवाड़ी में नहीं हुई खरीद
मंगलवार को सोनीपत की नई अनाज मंडी में 1509 किस्म का 4125 क्विंटल, पीआर किस्म का 86 क्विंटल धान खरीदा गया। इसके अलावा गोहाना मंडी में 1509 किस्म का 1500 क्विंटल धान व पीआर किस्म का 83 क्विंटल धान खरीदा गया। कासंडी में धान में नमी होने के कारण खरीद नहीं हो सकी। वहां पर बारिश के चलते 150 क्विंटल पीआर धान की ढेरियां पड़ी हैं। खरखौदा मंडी में भी खरीद जारी रही। गन्नौर अनाज मंडी में 1000 क्विंटल धान की खरीद हुई। वहीं रेवाड़ी की नई अनाज मंडी में मंगलवार को बाजरे की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। 

भिवानी में खेतों में खड़ी फसलों को 30 फीसदी नुकसान 
हिसार में मंगलवार अल सुबह हुई बारिश व तेज हवा चलने से हांसी, नारनौंद,  बरवाला और उकलाना के दर्जनों गांवों में धान की हजारों एकड़ फसल को नुकसान हुआ है। फतेहाबाद में बारिश के चलते अनाज मंडी से लेकर खेतों तक धान की फसल को नुकसान हुआ है। सुबह तेज हवा के साथ आई बारिश के कारण जहां खेतों में पकी धान की फसल बिछ गई, वहीं जिले की अनाज मंडियों में रखी धान की बोरियां व ढेरियां बारिश के पानी के कारण भीग गई। अनाज मंडियों में उठान का काम भी अभी तक 50 फीसदी तक ही हो पाया है।

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भीगी धान की बोरियों को हटाते मजदूर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

जिले में अब तक 61 हजार 739 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसके साथ ही मंडियों से 30 हजार 216 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। भिवानी में लगातार तीन दिन हुई बारिश से किसानों की खेतों में खड़ी फसलों में कृषि विशेषज्ञों ने करीब 30 फीसदी नुकसान दर्शाया है। कृषि उपनिदेशक डॉ आत्माराम गोदारा का कहना है कि बाजरा व मूंग की फसल में करीब 30 फीसदी नुकसान का आकलन हुआ है। चरखी दादरी में रोहतक मंडल के आयुक्त जगदीप सिंह ने पहले दादरी और फिर बाढड़ा मंडी का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली जिसमें बारिश के दौरान मंडियों में पुख्ता प्रबंध करने का निर्देश दिया। 

यकीनन बारिश से फसलों में नुकसान है। इससे फसल उत्पादन पर असर पड़ेगा। धान और कपास को अधिक नुकसान है। अभी विभाग के पास जिलों से खराब फसल का आंकड़ा नहीं आया है। इसके बाद ही पूरे नुकसान की जानकारी मिल पाएगी। -डॉ. जगराज ढांडी, संयुक्त सचिव, कृषि विभाग। 

 

धान खरीद पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक एक सीनियर अधिकारियों को जिला नोडल अधिकारी लगाया गया है। किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।  -जेपी दलाल, कृषि मंत्री। 

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