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Bihar News: शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों ने पूर्णकालिक नियुक्ति की मांग की तेज, CM को सौंपेंगे ज्ञापन
Tue, 21 Jan 2025 08:45 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 21 Jan 2025 08:45 PM IST
सार
Kishanganj News: शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में मात्र आठ हजार रुपये में अपने परिवार का भरण-पोषण करना संभव नहीं है। कई अनुदेशक अन्य काम करने के लिए मजबूर हैं, जबकि उन्हें पूर्णकालिक सेवा देने के लिए नियुक्त किया गया है।
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प्रदर्शन करते शारीरिक शिक्षा अनुदेशक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों (अंशकालिक) ने अपनी सेवाओं को पूर्णकालिक करने की मांग तेज कर दी है। किशनगंज जिले के हिम्मत नगर पंचायत स्थित मध्य विद्यालय शाहपुर में पदस्थापित अनुदेशक प्रशांत यादव ने बताया कि अनुदेशक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे।
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आठ हजार रुपये मानदेय पर काम कर रहे 2,350 अनुदेशक
जानकारी के मुताबिक, मई-जून 2022 में बिहार पंचायत प्रारंभिक शिक्षक (नियोजन एवं सेवा शर्त) नियमावली 2012 के तहत राज्यभर के मध्य विद्यालयों में लगभग 2,350 शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। इन अनुदेशकों को केवल आठ हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर रखा गया, जिसमें हर साल मात्र 200 रुपये की बढ़ोतरी का प्रावधान है। अनुदेशकों का कहना है कि इतने कम वेतन में बढ़ती महंगाई के बीच काम करना बेहद कठिन हो गया है।
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‘महत्वपूर्ण कार्यों में दे चुके हैं अपनी सेवाएं’
प्रशांत यादव ने बताया कि बीते दो साल और छह महीने के दौरान अनुदेशकों से अंशकालिक नहीं बल्कि पूर्णकालिक कार्य लिया गया है। इनमें तरंग प्रतियोगिता, दक्ष प्रतियोगिता, जातीय जनगणना, होमगार्ड की नियुक्ति और मतदान एवं मतगणना जैसे कार्य शामिल हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर चयनित खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों में कोच के रूप में भी भेजा गया। अनुदेशकों का कहना है कि जब उनसे पूर्णकालिक कार्य लिया जा रहा है, तो उन्हें अंशकालिक मानदेय पर रखना अन्यायपूर्ण है।
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‘मंहगाई के दौर में आठ हजार रुपये पर्याप्त नहीं’
अनुदेशकों ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में मात्र आठ हजार रुपये में अपने परिवार का भरण-पोषण करना संभव नहीं है। कई अनुदेशक अन्य काम करने के लिए मजबूर हैं, जबकि उन्हें पूर्णकालिक सेवा देने के लिए नियुक्त किया गया है।
सीएम को सौंपेंगे ज्ञापन
इन सभी मुद्दों को लेकर अनुदेशक अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे अपील करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी सेवाओं को अंशकालिक से पूर्णकालिक किया जाए और वेतन में उचित बढ़ोतरी की जाए। यह ज्ञापन अनुदेशकों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास है।