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Bihar News: बादल हत्याकांड मामले में 14 दिन बाद CID ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, DIG जयंत कांत ने जुटाए सबूत
Fri, 10 Jan 2025 06:14 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 10 Jan 2025 06:14 PM IST
सार
Sasaram Badal Murder Case: सासाराम के बादल हत्याकांड की जांच सरकार ने सीआईडी को सौंप दी है। घटना के 14 दिन बाद सीआईडी ने जांच शुरू की है, जहां डीआईजी ने मौके से सबूत जुटाए। पढ़ें पूरी खबर...।
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हत्या का सीन रीक्रिएट कर की गई जांच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रोहतास के सासाराम का चर्चित बादल हत्याकांड की जांच में शुक्रवार को नया मोड़ आया जब आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) के डीआईजी जयंत कांत ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। यह निरीक्षण घटना के 14 दिन बाद हुआ, जिससे जांच में संभावित तेजी आने की उम्मीद है। डीआईजी की टीम ने फिंगरप्रिंट, मिट्टी, पैरों और जूतों के निशान, बारूद के अवशेष और कांच के टुकड़े जैसे कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए।
क्राइम सीन का किया गया रीक्रिएशन
CID टीम ने घटनास्थल के विभिन्न हिस्सों को चिह्नित कर क्राइम सीन को रीक्रिएट करने का भी प्रयास किया। टीम ने इलाके का गहन निरीक्षण करते हुए हर संभावित सबूत को सुरक्षित किया। डीआईजी जयंत कांत ने रोहतास के पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी वन दिलीप कुमार और सासाराम नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन राय से करीब एक घंटे तक बातचीत कर घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।
घटनास्थल पर कड़ी सुरक्षा, डीआईजी रहे चुप
निरीक्षण के दौरान घटनास्थल और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात था। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर CID टीम ने अपनी जांच पूरी की। हालांकि, डीआईजी जयंत कांत ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामला अभी अनुसंधान के अधीन है।
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राजनीतिक उथल-पुथल और पुलिस की भूमिका पर सवाल
बादल हत्याकांड ने न केवल बिहार की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि यह मामला अब एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हत्या का आरोप राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी यातायात डीएसपी आदिल बिलाल और उनके बॉडीगार्ड पर लगाया गया है। इस हत्याकांड को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अफसरशाही और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। घटना को लेकर बिहार में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
सरकार ने CID को सौंपी जांच
राज्य सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच CID को सौंप दी है। यातायात डीएसपी आदिल बिलाल और उनके बॉडीगार्ड को पुलिस मुख्यालय बुला लिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे जनता में आक्रोश और बढ़ गया है। दरअसल, चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार भी इस मामले को लेकर दबाव में है। विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा है। वहीं, पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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क्राइम सीन का किया गया रीक्रिएशन
CID टीम ने घटनास्थल के विभिन्न हिस्सों को चिह्नित कर क्राइम सीन को रीक्रिएट करने का भी प्रयास किया। टीम ने इलाके का गहन निरीक्षण करते हुए हर संभावित सबूत को सुरक्षित किया। डीआईजी जयंत कांत ने रोहतास के पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी वन दिलीप कुमार और सासाराम नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन राय से करीब एक घंटे तक बातचीत कर घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।
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घटनास्थल पर कड़ी सुरक्षा, डीआईजी रहे चुप
निरीक्षण के दौरान घटनास्थल और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात था। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर CID टीम ने अपनी जांच पूरी की। हालांकि, डीआईजी जयंत कांत ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामला अभी अनुसंधान के अधीन है।
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राजनीतिक उथल-पुथल और पुलिस की भूमिका पर सवाल
बादल हत्याकांड ने न केवल बिहार की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि यह मामला अब एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हत्या का आरोप राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी यातायात डीएसपी आदिल बिलाल और उनके बॉडीगार्ड पर लगाया गया है। इस हत्याकांड को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अफसरशाही और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। घटना को लेकर बिहार में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
सरकार ने CID को सौंपी जांच
राज्य सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच CID को सौंप दी है। यातायात डीएसपी आदिल बिलाल और उनके बॉडीगार्ड को पुलिस मुख्यालय बुला लिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे जनता में आक्रोश और बढ़ गया है। दरअसल, चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार भी इस मामले को लेकर दबाव में है। विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा है। वहीं, पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।