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लव-कुश की जोड़ी : उपेंद्र कुशवाहा जदयू में हुए शामिल, नीतीश ने गले लगाकर किया स्वागत

Sun, 14 Mar 2021 04:21 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अजय सिंह Updated Sun, 14 Mar 2021 04:21 PM IST
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RLSP merge Upendra Kushwaha with JD(U)  Bihar CM Nitish Kumar present on the occasion
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का जनता दल यूनाइटेड में हुआ विलय - फोटो : सोशल मीडिया

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का रविवार को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में विलय हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पूरी पार्टी का जदयू में विलय किए जाने का औपचारिक एलान किया। जेडीयू का दामन थामते ही नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी में बड़ा पद देते हुए संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया।

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इससे पहले कुशवाहा ने पार्टी के विलय को लेकर प्रेसवार्ता में पत्रकारों से बातचीत भी की। प्रेसवार्ता के बाद उपेंद्र कुशवाहा जदयू कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका पूरे जोश के साथ स्वागत किया। नीतीश कुमार ने कुशवाहा को फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद दोनों नेता गले मिलते नजर आए।
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उल्लेखनीय है कि उपेंद्र कुशवाहा करीब आठ साल बाद जदयू में वापस आए हैं। जदयू से अलग होने के बाद उन्होंने वर्ष 2013 में रालोसपा का गठन किया था। जदयू में शामिल होने पर कुशवाहा ने कहा कि यह जनता का जनादेश है। उन्होंने आगे कहा कि यह मेरा नहीं बल्कि पार्टी की राष्ट्रीय परिषद का फैसला है।
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वहीं इस मौके पर कुशवाहा ने नीतीश कुमार को अपना बड़ा भाई बताया और कहा कि उन्हें पार्टी या सरकार में किसी पद का कोई लालच नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम बिहार के लोगों के लिए काम करना चाहते हैं। इस विलय से बिहार के न्याय पसंद और गरीब लोग मजबूत होंगे।'

कोईरी बिरादरी से आने वाले कुशवाहा राजनीति में लंबे अरसे से सक्रिय रहे हैं। वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है कि बिहार में विधानसभा चुनाव 2020 में जदयू को कम सीटें मिली थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक समीकरण को मजबूत करने में लग गए। इसी के तहत उन्होंने रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मिलकर पार्टी का विलय जदयू में कराया।

बिहार में कुर्मी समाज की आबादी लगभग चार प्रतिशत है। नीतीश कुमार भी इसी समाज से आते हैं, जिसकी संख्या सबसे कम है। माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा का नीतीश कुमार से हाथ मिलाने के बाद जदयू को काफी फायदा होगा।

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश के करीबी सहयोगियों में से एक अशोक चौधरी ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि सभी यह समझ रहे हैं कि आगे का राजनीतिक भविष्य नीतीश कुमार के ब्रांड में ही है। हाल के दिनों में कई लोग दूसरे दल छोड़कर जदयू में शामिल हुए हैं। उपेंद्र कुशवाहा की वापसी एक और अध्याय जोड़ती है। भविष्य में कई और लोग भी इसका अनुसरण कर सकते हैं।

लोकदल के अलावा नीतीश के दल समता पार्टी और बाद में जदयू में रहे कुशवाहा जब 2004 में पहली बार विधायक बनकर आए तो कई वरिष्ठ विधायकों की नजरंअदाज करके नीतीश ने उन्हें बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया था।

नीतीश कुर्मी समाज से आते हैं वहीं कुशवाहा कोयरी समाज से हैं। ऐसी चर्चा रही है कि नीतीश ने यह कदम कुर्मी और कुशवाहा (लव-कुश) जातियों के साथ एक शक्तिशाली राजनीतिक साझेदारी को ध्यान में रखकर किया था।

2013 में जदयू के राज्यसभा सदस्य रहे कुशवाहा ने विद्रोही तेवर अपनाते हुए जदयू ने नाता तोड़कर रालोसपा नामक नई पार्टी का गठन कर लिया तथा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नीत राजग का हिस्सा बन गए। इस चुनाव बाद कुशवाहा नरेंद्र मोदी सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री बनाए गए थे।

जुलाई 2017 में जदयू की राजग में वापसी ने समीकरणों को एक बार फिर बदल दिया और रालोसपा ने इस गठबंधन ने नाता तोड़कर राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन का हिस्सा बन गए थे।


2019 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा ने काराकाट और उजियारपुर लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार मिली। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कुशवाहा ने महागठबंधन से नाता तोड़कर मायावती की बसपा और एआईएमआईएम के साथ नया गठबंधन बनाकर यह चुनाव लड़ा।

विधानसभा चुनाव में रालोसपा प्रमुख कुशवाहा को उनके गठबंधन द्वारा मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया था पर इनके गठबंधन में शामिल हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में जहां पांच सीट जीत पाई थी वहीं रालोसपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही थी ।

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