बिहार: गंगा के बैकवाटर ने मचाई तबाही, नालंदा में 5 फीट पानी में डूबी 200 बीघे धान की फसल
नालंदा के सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैलने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पेंदी और पुरानी इसुआ गांव के खेतों में करीब पांच फीट पानी भर गया है, जिससे 200 बीघे से अधिक धान की फसल जलमग्न हो गई।
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नालंदा जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर शांत पड़ने के बाद अब गंगा के उफान ने नालंदा की पूर्वी सीमा पर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैल रहा है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। चेरो पंचायत के पेंदी गांव से लेकर पूर्वी टाल क्षेत्र के खेतों तक करीब पांच फीट पानी भर गया है। जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से पेंदी और पुरानी इसुआ गांव के किसानों की 200 बीघे से अधिक में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। खून-पसीने से सींची लहलहाती फसल को आंखों के सामने डूबता देख किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। वहीं, पेंदी गांव के मुहाने पर बसे कई घर चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं।
पांच फीट पानी में डूबी धान की फसल, किसानों की लागत और मेहनत बर्बाद
खेतों में करीब पांच फीट पानी भरने से किसानों की पूरी लागत और महीनों की मेहनत बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है। पानी का फैलाव अब तेजी से पुरानी इसुआ गांव की ओर भी बढ़ रहा है। अचानक बिगड़े हालात को देखते हुए प्रखंड 20 सूत्री क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने जिलाधिकारी से प्रभावित इलाकों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि बाढ़ के कारण प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
लोकाइन-पंचाने समेत जिले की दूसरी नदियां शांत, बराज के गेट बंद होने से राहत
एक तरफ गंगा का बैकवाटर सरमेरा के टाल क्षेत्र में दहशत बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर नालंदा की अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी आने से लोगों ने राहत की सांस ली है। जिले के पश्चिमी क्षेत्र में बहने वाली लोकाइन, भूतही और कड़ुआ नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। वहीं पूर्वी क्षेत्र की जिरायन, गोइठवा और सकरी नदियां भी शांत हैं। जिले के मध्य हिस्से से गुजरने वाली पंचाने नदी का जलस्तर भी फिलहाल नियंत्रण में है। जहानाबाद में फल्गु नदी का जलस्तर घटने के बाद उदेरा स्थान बराज के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। इससे लोकाइन नदी में अतिरिक्त पानी का बहाव रुक गया है। इसके चलते हिलसा, एकंगरसराय और करायपरसुराय इलाकों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा भी टल गया है।
टूटे तटबंध की मरम्मत से दर्जनभर गांवों को राहत
उधर, ओंदा गांव के समीप टूटे तटबंध की मरम्मत का काम पूरा होने से आसपास के दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। तटबंध की मरम्मत के बाद पानी के अनियंत्रित फैलाव का खतरा कम हुआ है और ग्रामीणों को तत्काल राहत मिली है।
नूरसराय में सासी नदी का छिलका टूटा, सिंचाई प्रभावित
इधर, नूरसराय प्रखंड की नदिऔना पंचायत के सरगांव में सासी नदी पर बना छिलका अचानक क्षतिग्रस्त हो गया। इसके टूटने से धान की फसल के लिए जरूरी सिंचाई का पानी नदी में व्यर्थ बहने लगा। सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से करीब पांच मौजा के किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद बीडीओ डॉ. जियाउल हक और सीओ दीपक कुमार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के साथ युद्धस्तर पर मरम्मत
सीओ दीपक कुमार ने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के समन्वय से छिलके की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है। अधिकारियों का प्रयास है कि मरम्मत कार्य जल्द पूरा हो, ताकि किसानों को समय पर पटवन के लिए जरूरी पानी मिल सके और धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।