बिहार: IGIMS में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के बाद प्रबंधन ने क्या कदम उठाया, कहां-कहां होगी सीधी निगरानी?
आईजीआईएमएस में 13.89 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान पर कैग की आपत्ति और 45 लाख के फर्जी क्लेम के बाद अब अस्पताल प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रबंधन ने सीधी निगरानी की व्यवस्था की है। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में आयुष्मान भारत योजना के तहत होने वाले इलाज और क्लेम की प्रक्रिया पर अब विशेष निगरानी रखी जाएगी। अस्पताल में राजस्व नुकसान को लेकर कैग की आपत्ति और आयुष्मान योजना में करीब 45 लाख रुपये के कथित फर्जी क्लेम का मामला सामने आने के बाद प्रबंधन ने नई समिति गठित की है। समिति आयुष्मान से जुड़े रिकॉर्ड और क्लेम की नियमित जांच करेगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हर शुक्रवार शाम चार बजे निदेशक की अध्यक्षता में आयुष्मान योजना से जुड़े किसी एक क्लेम और संबंधित मरीज के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। हालांकि, उप निदेशक डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पात्र मरीजों को बिना परेशानी समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।
कैग ने 13.89 करोड़ रुपये के नुकसान पर उठाया था सवाल
मामले में कैग की ओर से उठाई गई आपत्ति भी अहम है। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 नवंबर 2025 को निदेशक को भेजे गए पत्र में 13 करोड़ 89 लाख 47 हजार 358 रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख किया गया था। आरोप था कि अस्पताल में मरीजों का इलाज किए जाने के बावजूद निर्धारित समय पर क्लेम नहीं किए गए, जिससे संस्थान को आर्थिक नुकसान हुआ।
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बिना अस्पताल आए मरीज के नाम पर उठा था क्लेम
करीब पांच महीने पहले आयुष्मान योजना में करीब 45 लाख रुपये के फर्जी क्लेम का मामला सामने आया था। आरोप है कि एक मरीज के अस्पताल आए बिना ही उसके आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज के नाम पर क्लेम किया गया। शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में अस्पताल की आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों द्वारा हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई थी।
इन छह स्तरों पर होगी जांच
- रिकॉर्ड की जांच: मरीज के भर्ती होने से डिस्चार्ज तक के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
- समय पर क्लेम: इलाज पूरा होने के बाद निर्धारित अवधि में पोर्टल पर क्लेम दर्ज हुआ या नहीं, इसकी निगरानी होगी।
- डेटा मिलान: हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम और आयुष्मान पोर्टल के रिकॉर्ड में अंतर की जांच की जाएगी।
- मरीज का सत्यापन: क्लेम स्वीकृत होने से पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित मरीज वास्तव में अस्पताल में भर्ती हुआ था या नहीं।
- आउटसोर्सिंग कर्मियों की निगरानी: बिलिंग और कंप्यूटर ऑपरेटरों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी।
- वित्तीय ऑडिट: लंबित क्लेम और सरकार से मिलने वाले फंड का नियमित मिलान किया जाएगा।
हर शुक्रवार को होगी बैठक, कमेटी में कौन-कौन?
आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेहतर प्रबंधन और मरीजों को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्व की व्यवस्था में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रो. (डॉ.) संजय कुमार, विभागाध्यक्ष, सामुदायिक औषधि विभाग को मुख्य नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। सर्जरी और मेडिसिन के नोडल पदाधिकारियों के साथ डॉ. तुलिका सिंह, डॉ. अमित कुमार, डॉ. विनय कुमार पाण्डेय, सुनीता कुमारी, कौशल किशोर और सरिता राज को सहायक नोडल पदाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मेडिसिन में डॉ. शालिनी सिन्हा, शल्यक्रिया में डॉ. एम. अली, क्षेत्रीय चक्षु संस्थान में डॉ. विद्या भूषण और राज्य कैंसर संस्थान में डॉ. मुकेश जोपे को क्लीनिकल समन्वय अधिकारी बनाया गया है। समिति की बैठक प्रत्येक शुक्रवार को अपराह्न चार बजे आयोजित होगी। बैठक में उप निदेशक (प्रशासन), चिकित्सा अधीक्षक, अधीक्षक अभियंता और वित्तीय सलाहकार स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होंगे। सभी सदस्यों की बैठक संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में होगी। समिति का उद्देश्य आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच इलाज, समन्वय और संबंधित सेवाओं की व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाना है।