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Bihar News : बीच शहर में कचरा निस्तारण केंद्र बनने पर विरोध, कहा- सरकार लोगों की जान के साथ न करे खिलवाड़
सार
Bihar : राजधानी पटना के एक पॉश एरिया के लोग आने वाली परेशानी को लेकर चिंतित है। आने वाली यह परेशानी न सिर्फ आमलोगों की है बल्कि विधान मंडल आने वाले उन विधायकों और वहां पर काम कर रहे लगभग 3500 कर्मियों को भी होने वाली है। चिंता तो करनी होगी।
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पटना में बन रहा कचरा निस्तारण केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के पॉश इलाकों में शुमार गर्दनीबाग अब कचरे की राजनीति का अखाड़ा बनने जा रहा है। यहाँ प्रस्तावित कचरा निस्तारण केंद्र के निर्माण के खिलाफ स्थानीय लोग अब विरोध करने लगे हैं। स्थानीय लोग इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रिहाइशी इलाके के बीचों-बीच कचरा निस्तारण केंद्र के बनने से न केवल दुर्गंध फैलेगी, बल्कि महामारी का खतरा भी बढ़ जाएगा।
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विधान मंडल के पास निस्तारण केंद्र बनना कितना जरुरी?
इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्दनीबाग एक पुराना और व्यवस्थित मोहल्ला है। यहाँ अस्पताल, स्कूल, कई सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ विधान मंडल भी है। ऐसे में यहाँ कचरे का डंपिंग या निस्तारण केंद्र बनाना न सिर्फ स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है, बल्कि विधान मंडल में आने वाले वीआईपी लोगों की भी परेशानी है। इसलिए हमलोग इसका विरोध करेंगे। वहीं यारपुर निवासी डॉक्टर पियूष कुमार सिन्हा का कहना है कि यहां पर कचरा निस्तारण केंद्र नहीं बनना चाहिए, क्यों कि अगर ऐसा हुआ तो इस इलाके में रहना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्दनीबाग सदर अस्पताल के पास कचरा डंप किया जा रहा है, जिससे लोग काफी परेशान हैं और उपर से अब गर्दनीबाग मोहल्ले में कचरा निस्तारण केंद्र का बनना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे कहीं और स्थापित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।
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कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से स्वास्थ्य को खतरा
स्थानीय निवासियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कचरा प्रोसेसिंग के दौरान उठने वाली सड़ांध से सांस लेना दूषित हो जाएगा। लोगों को डर है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन के अंदर जाकर पेयजल को जहरीला बना देगा। कचरा ढोने वाली भारी गाड़ियों के आवागमन से गर्दनीबाग के मुख्य सड़क अब हमेशा जाम रहेंगे। इस संबंध में उपेन्द्र पाठक का कह्नना है कि यहां आवासीय परिवेश है, अस्पताल है, स्कूल है और कार्यालय हैं। उन्होंने कहा कि इस पॉश एरिया में कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से विकास नहीं होगा, बल्कि कचरा को हटाने से विकास होगा। कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से लोग बीमार होंगे और सिर्फ स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ेगी।
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चुनावी वादे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
वहीं खुदरा दवा विक्रेता संघ के महासचिव संजय वेदानी का कहना है कि अभी कचरा निस्तारण केंद्र गर्दनीबाग सदर अस्पताल के पास है। उस कचरा निस्तारण केंद्र से परेशानी इस कदर हो रही है कि सचिवालय हाल्ट पर ट्रेन के रुकते ही यात्रियों को दुर्गंध से बचने के लिए खिड़की बंद करनी पड़ती है। उस कचरा निस्तारण केंद्र से उठे दुर्गंध से गर्दनीबाग मोहल्ले तक के लोग परेशान रहते हैं। अब अगर गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र बन जाएगा तब यहां के लोग कैसे जी पाएंगे यह कहना बहुत ही मुश्किल है। उन्होंने बताया कि बिहार विधान सभा चुनाव के समय निर्दलीय उम्मीदवार बिट्टू सिंह और दीघा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार संजीव चौरसिया से भी इस समस्या के समाधान के लिए कहा था। संजीव चौरसिया ने कहा कि जीतने के बाद इस समस्या का समाधान कर दूंगा लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र से हटाकर अब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करा दिया। चूंकि यह क्षेत्र दोनों विधानसभा का बॉर्डर है यानी सड़क के इस पार और सड़क के उस पार। समस्या का समाधान तो नहीं हुआ बस विधान सभा क्षेत्र बदल गया यानी परेशानी जस की तस बनी रह गई।
सरकार करे फिर से विचार
वहां से स्थानीय लोगों का कहना है कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर हमारी सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर प्रशासन, सरकार एयर नगर निगम ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो हम अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। लोगों का स्पष्ट कहना है कि घनी आबादी के बीच कचरा निस्तारण केंद्र बनना कहीं से भी उचित नहीं है। अगर यह बनाना बहुत जरुरी है तो नगर निगम बायपास के उन इलाकों का चयन करे जहां आबादी नहीं है। फिलहाल गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र बनाना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करना है न कि विकास करना। इसलिए सरकार को इसपर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।
नगर निगम का पक्ष
दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारियों का तर्क है कि यह एक आधुनिक और क्लोज्ड प्लांट होगा, जिससे किसी प्रकार की गंदगी बाहर नहीं फैलेगी। शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए वार्ड स्तर पर कचरा निस्तारण आवश्यक है। हालांकि, जनता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है।
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विधान मंडल के पास निस्तारण केंद्र बनना कितना जरुरी?
इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्दनीबाग एक पुराना और व्यवस्थित मोहल्ला है। यहाँ अस्पताल, स्कूल, कई सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ विधान मंडल भी है। ऐसे में यहाँ कचरे का डंपिंग या निस्तारण केंद्र बनाना न सिर्फ स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है, बल्कि विधान मंडल में आने वाले वीआईपी लोगों की भी परेशानी है। इसलिए हमलोग इसका विरोध करेंगे। वहीं यारपुर निवासी डॉक्टर पियूष कुमार सिन्हा का कहना है कि यहां पर कचरा निस्तारण केंद्र नहीं बनना चाहिए, क्यों कि अगर ऐसा हुआ तो इस इलाके में रहना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्दनीबाग सदर अस्पताल के पास कचरा डंप किया जा रहा है, जिससे लोग काफी परेशान हैं और उपर से अब गर्दनीबाग मोहल्ले में कचरा निस्तारण केंद्र का बनना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे कहीं और स्थापित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।
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कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से स्वास्थ्य को खतरा
स्थानीय निवासियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कचरा प्रोसेसिंग के दौरान उठने वाली सड़ांध से सांस लेना दूषित हो जाएगा। लोगों को डर है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन के अंदर जाकर पेयजल को जहरीला बना देगा। कचरा ढोने वाली भारी गाड़ियों के आवागमन से गर्दनीबाग के मुख्य सड़क अब हमेशा जाम रहेंगे। इस संबंध में उपेन्द्र पाठक का कह्नना है कि यहां आवासीय परिवेश है, अस्पताल है, स्कूल है और कार्यालय हैं। उन्होंने कहा कि इस पॉश एरिया में कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से विकास नहीं होगा, बल्कि कचरा को हटाने से विकास होगा। कचरा निस्तारण केंद्र बनाने से लोग बीमार होंगे और सिर्फ स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ेगी।
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चुनावी वादे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
वहीं खुदरा दवा विक्रेता संघ के महासचिव संजय वेदानी का कहना है कि अभी कचरा निस्तारण केंद्र गर्दनीबाग सदर अस्पताल के पास है। उस कचरा निस्तारण केंद्र से परेशानी इस कदर हो रही है कि सचिवालय हाल्ट पर ट्रेन के रुकते ही यात्रियों को दुर्गंध से बचने के लिए खिड़की बंद करनी पड़ती है। उस कचरा निस्तारण केंद्र से उठे दुर्गंध से गर्दनीबाग मोहल्ले तक के लोग परेशान रहते हैं। अब अगर गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र बन जाएगा तब यहां के लोग कैसे जी पाएंगे यह कहना बहुत ही मुश्किल है। उन्होंने बताया कि बिहार विधान सभा चुनाव के समय निर्दलीय उम्मीदवार बिट्टू सिंह और दीघा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार संजीव चौरसिया से भी इस समस्या के समाधान के लिए कहा था। संजीव चौरसिया ने कहा कि जीतने के बाद इस समस्या का समाधान कर दूंगा लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र से हटाकर अब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करा दिया। चूंकि यह क्षेत्र दोनों विधानसभा का बॉर्डर है यानी सड़क के इस पार और सड़क के उस पार। समस्या का समाधान तो नहीं हुआ बस विधान सभा क्षेत्र बदल गया यानी परेशानी जस की तस बनी रह गई।
सरकार करे फिर से विचार
वहां से स्थानीय लोगों का कहना है कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर हमारी सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर प्रशासन, सरकार एयर नगर निगम ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो हम अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। लोगों का स्पष्ट कहना है कि घनी आबादी के बीच कचरा निस्तारण केंद्र बनना कहीं से भी उचित नहीं है। अगर यह बनाना बहुत जरुरी है तो नगर निगम बायपास के उन इलाकों का चयन करे जहां आबादी नहीं है। फिलहाल गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र बनाना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करना है न कि विकास करना। इसलिए सरकार को इसपर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।
नगर निगम का पक्ष
दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारियों का तर्क है कि यह एक आधुनिक और क्लोज्ड प्लांट होगा, जिससे किसी प्रकार की गंदगी बाहर नहीं फैलेगी। शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए वार्ड स्तर पर कचरा निस्तारण आवश्यक है। हालांकि, जनता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है।