Bihar News : पटना के इस इलाके में डेढ़ सौ बीघा फसल बर्बाद, रासायनिक पानी का बुरा असर बता रहे किसान
Bihar : केमिकल युक्त पानी से फसलें तो बर्बाद हो रही हैं, साथ ही जमीनें भी बंजर हो रही हैं। यह समस्या बिहार के कई क्षेत्रों में हैं। बरौनी के बाद अब पटना के बाढ़ से इस तरह की परेशानी सामने आयी है।
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पटना जिले के बाढ़ में रासायनिक पानी के कारण सैकड़ो बीघा तैयार घान की फसल बर्बाद हो गई है। इस वजह से किसान धान की फसल को काटकर खाट पर रखते हैं और फिर घर ले जाते हैं। कई बीघा में तैयार धान की फसल बर्बाद हो गई है। वहीं पच्चास एकड़ दलहन की फसल भी डूब गई है। किसानों को भीषण ठंढ़ में भी घुटने भर पानी में घुसकर फसल काटना पड़ रहा है, जिसके कारण कई किसान बीमार भी हो चुके हैं। किसानों का आरोप है कि यह पानी एनटीपीसी के प्लांट से आ रहा है, लेकिन फरियाद के बावजूद पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
खाट पर फसल ले जाने को मजबूर हैं किसान
इस संबंध में पीड़ित किसानों का कहना है कि लगभग सात वर्षों से यह समस्या अनवरत जारी है। फसल तैयार करने या काटने के दौरान केमिकल युक्त पानी के कारण बीमारी और पैर में समस्या होती है। दो किसान खाट के सहारे दो कट्ठा फसल काटने के बाद बीमार हो गए जिसके बाद से अन्य किसान भी डरे हुए है। उनका कहना है कि 15-20 मिनट पानी में धान काटने के बाद इसका असर दिखने लगता है, जिससे कई किसान बीमार हो चुके हैं।
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केमिकल युक्त रिसाइकल पानी से बंजर हो रही जमीन
इस केमिकल युक्त रिसाइकल पानी से जमीन भी धीरे-धीरे बंजर हो रही है। कुछ सक्षम किसान ही घान की फसल काट कर ले जा रहे है, बाकी अस्सी फीसदी फसल बर्बाद हो रहे हैं। वहीं लगभग अस्सी फीसदी से ज्यादा किसानो की फसल बर्बाद हुई है।
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किसान मुआवजा मांग रहे, एनटीपीसी ने कहा- हमारे प्लांट का पानी नहीं
किसान जहां कह रहे कि वह एनटीपीसी को इस पानी के रिसाव से निजात दिलाने और नुकसान का मुआवजा देने की मांग करते-करते थक चुके हैं, वहीं NTPC का दावा है कि यह पानी उसका नहीं है। एनटीपीसी बाढ़ के कार्यकारी (कॉर्पोरेट संचार) विकास धर द्विवेदी ने कहा कि जिस जल की बात की जा रही है, वह किसी भी प्रकार से एनटीपीसी बाढ़ परियोजना से संबंधित नहीं है। एनटीपीसी बाढ़ में Zero Liquid Discharge (ZLD) नीति का सख्ती से पालन किया जाता है, जिसके तहत संयंत्र से किसी भी प्रकार का पानी बाहर नहीं छोड़ा जाता है। एनटीपीसी बाढ़ द्वारा संयंत्र संचालन के दौरान ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया गया है, जिससे आसपास के कृषि क्षेत्रों को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा हो।
बर्बाद हो गई फसलें
ढीबर, सहनौरा, रैली ईंग्लिश, लक्ष्मीपुर, बरियारपुर मौजा में परसावां और मंगरचक के किसान खेती करते हैं। उन किसानों का कहना है कि पानी की निकासी के लिए रेल की पटरी के किनारे पईन बना हुआ था, लेकिन प्लांट द्वारा डंप में पाईप ले जाने के लिए उसे बाधित कर दिया गया। किसानों ने पिछले सोमवार को इसकी लिखित शिकायत प्लांट के अधिकारी और पंडारक सीओ से की है। किसानों की मांग है कि प्लांट से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को कहीं और गिराया जाए और उनके नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
इनपुट : गोविंद कुमार, बाढ़ पटना