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बिहार में बाढ़ का कहर: पटना समेत कई जिलों के निचले इलाके में फैला पानी, 6.65 लाख लोग प्रभावित; जानिए हाल

Sat, 05 Sep 2026 02:35 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sat, 05 Sep 2026 02:35 PM IST
सार

Bihar Flood Update: गंगा के बढ़ते दबाव को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने निचले इलाकों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है। घाटों की लगातार निगरानी हो रही है। अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है।एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है।

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Bihar flood update: Floodwaters have spread to low-lying areas in several districts, including Patna; Ganga
बिहार में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में गंगा, पुनपुन, दरधा, गंडक समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पटना, भोजपुर, बक्सर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर में गंगा कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं 18 जिलों में बाढ़ का पानी फैलने से 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। दियारा इलाकों से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गंगा, गंडक, पुनपुन, दरधा, कोसी समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि से निचले इलाकों में पानी फैल गया है। कई जगह सड़कें और गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति, तटबंधों की सुरक्षा और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
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जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख ने सभी जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को चेतावनी संवाद भेजकर सतर्क रहने का निर्देश दिया है। विभाग के अनुसार, पांच सितंबर यानी शनिवार को सुबह नौ बजे गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर है और अभी बढ़ने की प्रवृत्ति बनी हुई है। नदी इस स्थल पर अपने उच्चतम जलस्तर (HFL) 50.52 मीटर के बेहद करीब पहुंच गई है। पूर्वानुमान के अनुसार गांधीघाट पर नया उच्चतम जलस्तर बनने की संभावना है। इससे खासकर दियारा और नदी के प्रवाह क्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है। विभाग ने बाढ़ आपदा को देखते हुए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाने, तटबंध के नदी भाग में बसे लोगों को तत्काल इसकी जानकारी देने और जिलास्तर पर गठित बाढ़ आपदा दल की लगातार गश्ती सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
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पटना में गंगा लाल निशान के ऊपर, तीनों प्रमुख गेज पर बढ़ा पानी
पटना में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। दीघा घाट में गंगा खतरे के निशान से 1.34 मीटर, गांधी घाट में 1.93, हाथीदह में 1.63 मीटर ऊपर बह रही है। पुनपुन नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर बढ़ा है। श्रीपालपुर में नदी का स्तर 53.16 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 50.60 मीटर है। यानी नदी करीब 2.56 मीटर ऊपर बह रही है। पटना के दीघा घाट पर गंगा अंडरपास के नीचे तक आ गई है। गायघाट-दीदारगंज सड़क डूब चुकी है। इसके अलावा बिंद टोली, एलसीटी घाट, गांधी घाट, महावीर घाट, पटना सिटी में कई जगह गंगा का पानी घुसने से लोग परेशान हैं। कई जगह तो कमर भर पानी भर गया है। लोग सड़क किनारे आकर टेंट लगाकर रह रहे है। उनका हाल बेहाल है। 

पटना में प्रोटेक्शन वॉल के 108 रास्ते बंद
गंगा के पानी को शहर के निचले हिस्सों में पहुंचने से रोकने के लिए पटना की प्रोटेक्शन वॉल में बने सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया गया है। जहां कहीं पानी का रिसाव सामने आया था, उसे भी बंद करने की कार्रवाई की गई है। कुर्जी इलाके में नालों को भी बंद किया गया है, ताकि गंगा का पानी इनके जरिए शहर की ओर नहीं पहुंच सके। जिला प्रशासन के अनुसार निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।

कई जगह राहत शिविर, सामुदायिक रसोई जारी
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पटना में चार स्थानों पर राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। इनमें पाटलिपुत्र इलाके में दो राहत शिविर और बिंद टोली के पास गंगा पथ पर राहत शिविर शामिल हैं। शिविरों में सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पानी बढ़ने की स्थिति में राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

पुनपुन ने बढ़ाई पटना-गया रेलखंड की परेशानी
पटना-गया रेलखंड पर बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। जट डुमरी के पास पुनपुन नदी का पानी रेलवे के पुल संख्या-21 तक पहुंच गया है। सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया है। इस कारण चार मेमू ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाली कई अन्य ट्रेनें तीन से चार घंटे तक विलंब से चल रही हैं। रेलवे के मुताबिक प्रभावित ट्रैक की सुरक्षा जांच पूरी होने और उसे परिचालन के लिए सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही सेवा सामान्य की जाएगी।

मोकामा में गंगा का पानी गांवों की ओर बढ़ा
मोकामा क्षेत्र में भी गंगा का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। नदी खतरे के निशान 41.70 मीटर से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। इससे तटवर्ती इलाकों में पानी फैलने लगा है। करीब 15 पंचायतों के निचले हिस्सों में कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। मोकामा थाना क्षेत्र के बरहपुर और शिवनार गांव के पास गंगा का पानी एनएच-31 को पार कर गांवों की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षित माने जाने वाले इस मार्ग पर पानी आने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।

सारण में टूटा मही नदी का बांध, एनएच-19 पर भी चढ़ा पानी
सारण जिले में बाढ़ की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। दिघवारा प्रखंड के त्रिलोकचक पंचायत के केशरपुर गांव के पास शुक्रवार देर रात मही नदी का बांध करीब 10 से 12 फीट की चौड़ाई में टूट गया। इसके बाद नदी का पानी आसपास के इलाकों में तेजी से फैलने लगा।वहीं डुमरी गांव के पास एनएच-19 पर भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। सड़क पर पानी बढ़ने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। जलस्तर में और वृद्धि होने पर इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। छपरा सदर प्रखंड में सिंगही चौक के पास भी एनएच-19 पर पानी पहुंच गया है। सड़क पर पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बेगूसराय में दियारा क्षेत्र जलमग्न, नाव बनी सहारा
बेगूसराय में गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर दियारा इलाकों में दिखाई दे रहा है। शाम्हो प्रखंड में खेत और रास्ते पानी में डूब गए हैं। पशुओं के चारे का संकट भी गहराने लगा है। कई स्थानों पर गांवों को जोड़ने वाले रास्ते पानी में समा चुके हैं और लोगों के लिए नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन रह गई है। बलिया प्रखंड के चेचियाही ढाब में तेज बहाव के कारण बिजली का पोल तार सहित गिर गया। घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। समय रहते लोगों को वहां से हटाए जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया।

समस्तीपुर में 56 से अधिक गांव प्रभावित
समस्तीपुर जिले के मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर के तटीय इलाकों में गंगा और बाया नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे 56 से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं और करीब दो लाख की आबादी प्रभावित बताई जा रही है। मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर के दियारा क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। कई गांवों में पानी घरों की दहलीज तक पहुंच चुका है। कुछ स्थानों पर सड़कों पर दो से पांच फीट तक पानी बह रहा है। लोग जरूरी सामान लेकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

खगड़िया के परबत्ता में घर डूबे, रस्सी के सहारे निकल रहे लोग
खगड़िया के परबत्ता प्रखंड में भी बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। 10 से अधिक पंचायतों में पानी प्रवेश कर चुका है। कई घर डूब गए हैं और लोग बच्चों तथा जरूरी सामान को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। कई जगह आवागमन के रास्ते पानी में डूब जाने के कारण ग्रामीण रस्सी के सहारे नाले पार करने को मजबूर हैं।

मुंगेर और भागलपुर में भी गंगा खतरे के निशान के ऊपर
मुंगेर और भागलपुर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है। नदी के बढ़े जलस्तर का असर तटीय और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर बनी हुई है। इसके अलावा भोजपुर और बक्सर में भी गंगा लाल निशान के ऊपर बह रही है। पश्चिम चंपारण, समस्तीपुर, गोपालगंज, बांका, मधेपुरा, सहरसा, लखीसराय, जहानाबाद, सारण, वैशाली और नालंदा के निचले इलाकों को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है।

नौ नदियां खतरे के निशान से ऊपर
राज्य में फिलहाल नौ नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंगा के अलावा गंडक, पुनपुन, दरधा और कोसी समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में पानी बढ़ने से नदी किनारे और दियारा क्षेत्रों में खतरा ज्यादा बढ़ा है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेगूसराय, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, लखीसराय और जहानाबाद में हाई अलर्ट बताया गया है। वहीं अन्य प्रभावित जिलों में भी प्रशासन को निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।



सीएम आज भी कर रहे हवाई सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। वे बेगूसराय, मुंगेर, सुल्तानगंज और नाथनगर के प्रभावित क्षेत्रों का आसमान से जायजा लेने निकले हैं। इस दौरान नदी के जलस्तर, डूबे हुए क्षेत्रों, प्रभावित गांवों और राहत-बचाव अभियान की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री बेगूसराय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। आईओसीएल गेस्ट हाउस में प्रस्तावित बैठक में राहत सामग्री, नावों की उपलब्धता, बचाव अभियान और प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाने की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ अलर्ट
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को तटबंधों की सुरक्षा, राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। सरकार का फोकस बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरत के मुताबिक राहत उपलब्ध कराने पर है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा है। 

 
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