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Bihar: 'अग्निपथ' पर जदयू के तर्क को भाजपा ने बताया 'हास्यास्पद', संजय जायसवाल बोले- उच्च शिक्षा की स्थिति पर हो पुनर्विचार

Thu, 23 Jun 2022 07:09 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 23 Jun 2022 07:09 PM IST
सार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने जदयू के उस तर्क को 'हास्यास्पद' करार दिया जिसमें कहा गया था कि सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना पर 'पुनर्विचार' होना चाहिए। 

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Bihar BJP calls JDUs argument on Agneepath laughable Sanjay Jaiswal said situation of higher education should be reconsidered
Bihar BJP chief Sanjay Jaiswal - फोटो : ANI

विस्तार

बिहार के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सूबे में उच्च शिक्षा की स्थिति संतोषजनक न होने के लिए जदयू को जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी है। 
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जायसवाल ने जदयू के इस तर्क को भी 'हास्यास्पद' करार दिया कि सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना पर 'पुनर्विचार' होना चाहिए। पिछले सप्ताह 'अग्निपथ योजना' की घोषणा के बाद राज्यभर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। 
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उन्होंने कहा कि जदयू के साथी अग्निपथ योजना में सुधार की बात कर रहे हैं लेकिन मुझे राज्य में शिक्षा की मौजूदा स्थिति देखकर हंसी आती है। यहां 2019 में जिस छात्र ने बीए का फॉर्म भरा था वो 2022 में दूसरे वर्ष की ही परीक्षा दे रहा है जबकि अग्निपथ योजना 22  साल के लड़के को आर्मी की ट्रेनिंग, 10वीं पास लड़का है तो उसको 12वीं पास करेंगे, अगर 12वीं पास है तो उसे ग्रेजुएशन में तीनों साल की परीक्षा नहीं देनी है। 
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'उसको अग्निपथ योजना के तहत जैसे ही चार साल खत्म होगा उसे केवल दो विषय की परीक्षा देनी है और दो विषय की उसको ट्रेनिंग मिल जाएगी अग्निवीर के नाम पर। मतलब वो कंप्यूटर सीखेगा, ड्रोन चलाना सीखेगा, नेवी में जाएगा तो पानी का जहाज चलाना सीखेगा। 22 साल में इतना कुछ सीखकर जब वह बाहर जाएगा तो उनमें से सबसे  बेस्ट 25 फीसदी युवाओं को सेना में वापस लिया जाएगा और बाकि बचे युवाओं को अलग-अलग जगह आरक्षण देकर नौकरी देने का काम किया जाएगा।' 

जायसवाल ने कहा कि उन्हें बिहार में उच्च शिक्षा की स्थिति पर पुनर्विचार करना चाहिए। पोर्टफोलियो उनके पास रहा है और छात्रों को अभी भी विलंबित शैक्षणिक सत्रों से जूझना पड़ रहा है, छात्रों को अपना स्नातक सत्र पूरा करने के लिए तीन साल से ज्यादा समय व्यतीत करना पड़ रहा है। 

वही जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने जायसवाल का नाम लिए बगैर पलटवार किया कि उच्च शिक्षा में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की क्या भूमिका है, यह बात कम से कम स्नातक कर चुके नेताओं को तो बताने की जरूरत नहीं है। 

कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा के सत्र में विलंब के लिए सवाल उठाने वाले को यह जानकारी अवश्य होगी कि सरकार के शिक्षा मंत्री एवं विभाग के पदाधिकारी सत्र नियमित करने के लिए कुलाधिपति, कुलाधिपति कार्यालय, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति व विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के स्तर पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने सत्र के विलंब के लिए बिहार सरकार की कार्यशैली को जिम्मेवार बताने वाले 'राजनीतिक महानुभाव' की नीयत पर सवाल उठाते हुए जानकारी सार्वजनिक करने का अनुरोध किया।  

जदयू नेता ने जायसवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक महानुभाव को इस बात की जानकारी जरूर होगी, क्योंकि वो खुद भी स्नातक हैं। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे के प्रमुख महामहिम कुलाधिपति होते हैं। सवाल उठाने वाले क्या महामहिम कुलाधिपति पर सवाल खड़ा कर रहे हैं?


राजनीतिक महानुभाव को इस बात की जानकारी होगी कि केंद्र सरकार की अनुशंसा पर महामहिम कुलाधिपति जो महामहिम के रूप में पदस्थापित हैं। तो फिर क्या केंद्र सरकार की अनुशंसा के आधार पर नियुक्ति करने वाले पर यह सवाल उठा रहे हैं?
 
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