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Bihar: गिरिराज का सीएम पर निशाना, कहा- स्लीपर सेल और शरिया लागू करने पर असहज थे नीतीश
Tue, 23 Aug 2022 06:56 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 23 Aug 2022 06:56 PM IST
सार
गिरिराज सिंह ने दावा किया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के फुलवारी शरीफ मॉड्यूल का भंडाफोड़ ने साबित कर दिया है कि बिहार में स्लीपर सेल सक्रिय हो गया है।
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह। (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह राज्य में सक्रिय स्लीपर सेल का मुद्दा भाजपा द्वारा उठाए जाने और कुछ इलाकों में शरिया लागू करने का विरोध करने पर असहज थे। लोकसभा में बेगूसराय का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह पार्टी के एक कार्यक्रम से इतर सीवान जिले में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के फुलवारी शरीफ मॉड्यूल का भंडाफोड़ ने साबित कर दिया है कि बिहार में स्लीपर सेल सक्रिय हो गया है।
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झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सहित दो लोगों को बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था, जबकि एक अन्य व्यक्ति को तीन दिन बाद लखनऊ से उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां स्कूलों में रविवार को समान रूप से साप्ताहिक अवकाश होता है, वहीं बिहार में कई संस्थान शरिया कानून लागू करने के खुले प्रयास में शुक्रवार को बंद रहते हैं। नीतीश के कटु आलोचक गिरिराज सिंह ने कहा कि भाजपा इन मुद्दों को राष्ट्रहित में उठा रही थी। लेकिन इससे नीतीश कुमार असहज हो गए।
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भाजपा नेता ने कहा, उनकी (नीतीश कुमार) परेशानी के कारण राज्य में हमें सत्ता गंवानी पड़ी। लेकिन अब जब हम विपक्ष में हैं, तो हम राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता के मुद्दे को और भी मजबूती के साथ उठाएंगे। उन्होंने राजद-जद (यू) गठबंधन पर उर्दू माध्यम के स्कूलों के पक्ष में पूर्वाग्रह दिखाने का भी आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरियों के वादे को पूरा करने के लिए रिक्त पदों को भरने की बात कही थी। मुझे पता चला है कि नई कैबिनेट ने इसके बजाय उर्दू शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है। सामान्य स्कूलों और संस्कृत माध्यम के स्कूलों की सरकार को कम चिंता है
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