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Bihar: महाराष्ट्र TET पेपर लीक की बिहार तक पहुंची आंच! साइबर कैफे पर STF का छापा, बड़े खुलासे के संकेत
Thu, 02 Jul 2026 08:48 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 08:48 PM IST
सार
Vaishali News: महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले की जांच में महाराष्ट्र पुलिस और पटना एसटीएफ ने हाजीपुर के एक साइबर कैफे पर छापेमारी कर डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि मामले के कथित मास्टरमाइंड के खिलाफ लुकआउट नोटिस की तैयारी चल रही है।
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दुकान में छापेमारी करती मुंबई पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच अब बिहार तक पहुंच गई है। बुधवार रात महाराष्ट्र पुलिस और पटना एसटीएफ ने नगर थाना पुलिस की मदद से हाजीपुर के कचहरी रोड स्थित भागवत मार्केट के एक साइबर कैफे में करीब तीन घंटे तक छापेमारी की। इस दौरान साइबर कैफे संचालक सोनू कुमार और मिथुन कुमार को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कैफे से सीपीयू, हार्ड डिस्क, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
मास्टरमाइंड के विदेश भागने की आशंका
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले के कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता और कपिल दहिया के देश छोड़कर भागने की आशंका है। दोनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि साइबर कैफे संचालक सोनू कुमार ने आरोपियों को शरण देने और फरार होने में मदद की। सोनू कुमार को महाराष्ट्र पुलिस और पटना एसटीएफ ने मंगलवार को वैशाली के सहदेई प्रखंड से गिरफ्तार किया था।
ग्राहक बनकर पहुंची पुलिस, फिर मारा छापा
बुधवार को महाराष्ट्र पुलिस और एसटीएफ की टीम हाजीपुर पहुंची। टीम ने ग्राहक बनकर साइबर कैफे में प्रमाण पत्र बनाने की जानकारी ली। फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की पुष्टि होने के बाद नगर थाना पुलिस को साथ लेकर रात करीब 10 बजे संयुक्त छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में नगर थानाध्यक्ष सिकंदर कुमार, अपर थानाध्यक्ष मोहन कुमार, एसआई गुलाम सरवर समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
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जांच में फर्जी दस्तावेजों का मिला सुराग
जांच के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि वह कथित आरोपियों की मदद से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करने में सहयोग करता था। साइबर कैफे से कंप्यूटर, फोटोकॉपी मशीन, कलर प्रिंटर, पीवीसी प्रिंटर और अन्य उपकरण मिले। कंप्यूटर की जांच में सोनू कुमार के व्हाट्सएप से जुड़े दस्तावेज मिले, जिनमें आरोपी बिजेंद्र कुमार की तस्वीर वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए। इन दस्तावेजों पर अभिषेक महतो नाम दर्ज था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि 29 जून को फर्जी पहचान पत्र तैयार करने के लिए मनमाने नंबर दर्ज करने को कहा गया था।
17 साल से चल रहा था साइबर कैफे
सोनू कुमार के भाई जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि सोनू पिछले 17 वर्षों से साइबर कैफे चला रहा है। परिवार को केवल उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। वहीं, उनके छोटे भाई विकास को पुलिस क्यों तलाश रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। विकास पटना में डाटा ऑपरेटर और टाइपिंग का कार्य करता है।
जांच जारी, कई अहम दस्तावेज जब्त
महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में दर्ज टीईटी परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई है। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
यह भी पढ़ें: Bihar News: अपनी ही सरकार पर नाराज हुए मंत्री मदन सहनी! बोले- 'आरोपी डीएसपी की पोस्टिंग जख्म कुरेदने जैसी'
साइबर कैफे से क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक सीपीयू, कई हार्ड डिस्क, 50 खाली पीवीसी कार्ड, पीवीसी ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी बुक, पैन कार्ड, महाराष्ट्र सरकार का दूरसंचार लाइसेंस कार्ड तथा हिंदी, अंग्रेजी और मराठी भाषा में विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
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मास्टरमाइंड के विदेश भागने की आशंका
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले के कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता और कपिल दहिया के देश छोड़कर भागने की आशंका है। दोनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि साइबर कैफे संचालक सोनू कुमार ने आरोपियों को शरण देने और फरार होने में मदद की। सोनू कुमार को महाराष्ट्र पुलिस और पटना एसटीएफ ने मंगलवार को वैशाली के सहदेई प्रखंड से गिरफ्तार किया था।
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ग्राहक बनकर पहुंची पुलिस, फिर मारा छापा
बुधवार को महाराष्ट्र पुलिस और एसटीएफ की टीम हाजीपुर पहुंची। टीम ने ग्राहक बनकर साइबर कैफे में प्रमाण पत्र बनाने की जानकारी ली। फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की पुष्टि होने के बाद नगर थाना पुलिस को साथ लेकर रात करीब 10 बजे संयुक्त छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में नगर थानाध्यक्ष सिकंदर कुमार, अपर थानाध्यक्ष मोहन कुमार, एसआई गुलाम सरवर समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
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जांच में फर्जी दस्तावेजों का मिला सुराग
जांच के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि वह कथित आरोपियों की मदद से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करने में सहयोग करता था। साइबर कैफे से कंप्यूटर, फोटोकॉपी मशीन, कलर प्रिंटर, पीवीसी प्रिंटर और अन्य उपकरण मिले। कंप्यूटर की जांच में सोनू कुमार के व्हाट्सएप से जुड़े दस्तावेज मिले, जिनमें आरोपी बिजेंद्र कुमार की तस्वीर वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए। इन दस्तावेजों पर अभिषेक महतो नाम दर्ज था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि 29 जून को फर्जी पहचान पत्र तैयार करने के लिए मनमाने नंबर दर्ज करने को कहा गया था।
17 साल से चल रहा था साइबर कैफे
सोनू कुमार के भाई जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि सोनू पिछले 17 वर्षों से साइबर कैफे चला रहा है। परिवार को केवल उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। वहीं, उनके छोटे भाई विकास को पुलिस क्यों तलाश रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। विकास पटना में डाटा ऑपरेटर और टाइपिंग का कार्य करता है।
जांच जारी, कई अहम दस्तावेज जब्त
महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में दर्ज टीईटी परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई है। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
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साइबर कैफे से क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक सीपीयू, कई हार्ड डिस्क, 50 खाली पीवीसी कार्ड, पीवीसी ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी बुक, पैन कार्ड, महाराष्ट्र सरकार का दूरसंचार लाइसेंस कार्ड तथा हिंदी, अंग्रेजी और मराठी भाषा में विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।