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Lok Sabha : घर पर पड़ा था पिता का शव, कहा- पहले चुकाऊंगा देश का कर्ज, फिर अदा करूंगा पुत्र का फर्ज
Sat, 20 Apr 2024 03:00 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Sat, 20 Apr 2024 03:00 AM IST
सार
Bihar : घर में पिता की लाश पड़ी थी। शमशान घाट ले जाने की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थी, लेकिन तभी एकलौते बेटे ने कहा- पहले मतदान करेंगे फिर पिता का अंतिम संस्कार करेंगे।
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धर्मेन्द्र कुमार।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
शुक्रवार को गया जिला लोकतंत्र का महापर्व मनाने में जुटा था। इस दौरान मतदाताओं ने जमकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौरान औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में एक अनोखा मामला देखने को मिला, जहां एक युवा ने पहले देश का कर्ज उतारा उसके बाद अपने पिता का अंतिम संस्कार कर पुत्र होने का फर्ज पूरा किया।
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क्या है मामला
औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत गया जिला के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बभंडीह गांव निवासी 100 वर्षीय जद्दू ठाकुर की मौत गुरुवार की रात हो गई थी। शुक्रवार की सुबह मृतक जद्दू ठाकुर के पुत्र धर्मेंद्र ठाकुर ने पिता के अंतिम संस्कार की सारी तैयारियां कर ली। लेकिन, अचानक उन्हें यह ध्यान आया कि आज क्षेत्र में मतदान चल रहा है। इसके बाद धर्मेंद्र ने पहले मतदान करना जरुरी समझा। हालांकि उसके घर वाले और आसपास के लोगों ने उसे पहले पिता का अंतिम संस्कार करने की बात कही, लेकिन धर्मेन्द्र ने किसी की एक नहीं सुनी और फिर उसने इस निश्चय कर पिता की अर्थी को घर में ही छोड़कर पहले मतदान किया। इसके बाद इकलौते पुत्र धर्मेंद्र ठाकुर ने पिता का अंतिम संस्कार किया।
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देश के प्रति प्रेम के इस जज्बे की लोग कर रहे प्रशंसा
शुक्रवार की सुबह जब धर्मेंद्र क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 124 पर अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचा तो आसपास के लोग उसे वहां देख आश्चर्यचकित रह गए। चूंकि सभी को इस बात की जानकारी थी कि बीती रात ही धर्मेंद्र के पिता की मृत्यु हो गई है और धर्मेंद्र ही उनकी एकमात्र संतान है। ऐसे में लोग पिता के अंतिम संस्कार को छोड़ मतदान केंद्र पर वोट देने पहुंचा देख आश्चर्यचकित रह गए। लेकिन, जब धर्मेंद्र ने लोगों को अपनी सोच के बारे में बताया कि पहले देश का कर्ज चुकाना जरुरी है। इसके बाद पुत्र का फर्ज पूरा करेगा। धर्मेंद्र के इस कदम की लोग मुक्त हृदय से प्रशंसा कर रहे हैं।
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