बिहार: पहले अस्पताल से लौटाया, फिर गर्भ में बच्चे की मौत का खुलासा; अब जांच के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
बेगूसराय के बखरी अनुमंडल के डरहा इलाके में गर्भवती महिला संजना को प्रसव पीड़ा के दौरान पहले बखरी पीएचसी ले जाया गया, जहां परिजनों के मुताबिक पर्याप्त जांच के बिना उसे वापस घर भेज दिया गया। कई घंटे दर्द से परेशान रहने के बाद उसे रात में दोबारा अस्पताल लाया गया।
विस्तार
बखरी अनुमंडल के डरहा इलाके से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को परिजनों के मुताबिक पहले बखरी पीएचसी ले जाया गया, लेकिन वहां समुचित जांच किए बिना उसे वापस घर भेज दिया गया। महिला घर लौटने के बाद भी घंटों दर्द से तड़पती रही। रात में हालत बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां अल्ट्रासाउंड में गर्भ में पल रहे शिशु की मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद महिला को बेगूसराय के एक निजी नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां दोबारा जांच के बाद ऑपरेशन कर मृत शिशु को गर्भ से बाहर निकाला गया।
मामले के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और संबंधित आशा बहू की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद बखरी एसडीओ सन्नी कुमार सौरव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करा दी है। संबंधित रिपोर्ट भी मांगी गई है। अब प्रशासनिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला को शुरुआती दौर में उचित चिकित्सकीय जांच और उपचार मिला था या नहीं और अगर लापरवाही हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
सुबह प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंची थी संजना, फिर घर क्यों भेजा गया?
परिजनों की शिकायत के मुताबिक 9 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे संजना को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने इसकी जानकारी डरहा की आशा बहू सुनीता देवी को दी। इसके बाद सुनीता देवी महिला को एंबुलेंस के जरिए बखरी पीएचसी लेकर पहुंचीं। परिवार का आरोप है कि पीएचसी पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि संजना किसी दूसरी आशा बहू के क्षेत्र की लाभार्थी है। इसके बाद महिला को बिना समुचित चिकित्सकीय जांच कराए ई-रिक्शा से वापस घर भेज दिया गया।
यहीं से इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि उस समय संजना की चिकित्सकीय स्थिति की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं। अगर जांच नहीं हुई थी तो प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को अस्पताल से वापस घर भेजने का फैसला किस आधार पर लिया गया? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच में तलाशा जाएगा।
घर लौटने के बाद भी जारी रहा दर्द, फोन नहीं उठाने का आरोप
परिजनों के अनुसार संजना के घर लौटने के बाद भी उसकी प्रसव पीड़ा कम नहीं हुई। वह लगातार दर्द से परेशान रही। शिकायतकर्ता महेंद्र राय का आरोप है कि उन्होंने संबंधित आशा बहू सुनीता देवी से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद रात करीब 9 बजे दूसरी आशा बहू रीना देवी को मामले की जानकारी दी गई। करीब 10 बजे संजना को दोबारा बखरी पीएचसी लाया गया।
अल्ट्रासाउंड में सामने आई गर्भ में शिशु की मौत की बात
पीएचसी में भर्ती किए जाने के बाद डॉक्टरों ने संजना का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। परिजनों के मुताबिक रात के समय जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके चलते अगले दिन सुबह अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद परिवार के सामने बेहद दर्दनाक स्थिति आई। जांच में गर्भ में शिशु की मौत की बात सामने आई। इसके बाद परिजन संजना को इलाज के लिए बेगूसराय के एक निजी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। निजी नर्सिंग होम में दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया। वहां भी गर्भ में शिशु की मौत की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और मृत शिशु को गर्भ से बाहर निकाला।
परिवार का दावा- और देर होती तो महिला की जान को भी खतरा था
परिजनों का दावा है कि निजी अस्पताल के डॉक्टर ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन में अगर और देरी होती तो महिला के शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा था और उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। हालांकि, इस चिकित्सकीय दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की स्थिति कितनी गंभीर थी और इलाज में देरी का उसकी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ा।
जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल
इस पूरे मामले में अब तीन अहम सवाल सामने हैं। पहला, प्रसव पीड़ा के दौरान जब संजना को पहली बार बखरी पीएचसी लाया गया था, तब उसकी चिकित्सकीय जांच किस स्तर पर हुई थी? दूसरा, अगर पर्याप्त जांच नहीं हुई थी तो उसे अस्पताल से वापस घर भेजने का फैसला क्यों लिया गया? तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या महिला को समय पर उचित चिकित्सकीय जांच और उपचार मिल जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी? इन सभी सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच के जरिए तलाशे जाएंगे।
SDO ने शुरू कराई जांच, रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की बात
परिजनों की शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद बखरी एसडीओ सन्नी कुमार सौरव ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू करा दी। संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संजना को समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा मिली थी या नहीं। अगर जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।