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खबर का असर: गया में लापरवाह 14 सफाईकर्मियों का वेतन रोका, एक को पद से हटाया गया; एजेंसी पर 50,000 का जुर्माना
Tue, 27 May 2025 08:29 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Tue, 27 May 2025 08:29 PM IST
सार
Bihar: नगर आयुक्त ने साफ कहा कि प्रत्येक वार्ड की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित सफाईकर्मी की है। अगर सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाई गई तो सफाईकर्मी को पद से हटाकर जिम्मेदारी किसी अन्य को सौंपी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर...
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नगर आयुक्त
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
‘बेमौसम बारिश में जलमग्न हुई मुख्य सड़कें, खोखले साबित हुए नगर निगम के दावे’ का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर प्रकाशित होने के बाद नगर आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे शहर के नालों की सफाई की समीक्षा की। इस दौरान 14 वार्डों में लापरवाही उजागर होने पर संबंधित जमादारों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया। वहीं, एक जमादार को पद से मुक्त कर दिया गया है। साथ ही सफाई एजेंसी पर 50,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
आयुक्त ने की समीक्षा बैठक, अधिकारियों को लगाई फटकार
नगर आयुक्त द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में स्वच्छता पदाधिकारी समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इसमें उन वार्डों के जमादारों को विशेष रूप से तलब किया गया, जहां नाले की सफाई की स्थिति सबसे खराब पाई गई। बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि बरसात के दौरान जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह फेल रही, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। स्वच्छता पदाधिकारी ने बताया कि दो घंटे की तेज बारिश के बाद मुख्य स्थानों से जलभराव हटाने का दावा किया गया है, लेकिन नगर आयुक्त ने इसे असंतोषजनक मानते हुए कहा कि बारिश के एक घंटे के भीतर जल निकासी सुनिश्चित करना निगम की जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी नालों की नियमित और प्रभावी सफाई जरूरी है।
पढ़ें: राज्य में जल संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन के लिए उपयोगी है 'वाटर एटलस', बैठक में कही गई ये बात
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14 वार्डों के जमादारों पर गिरी गाज
समीक्षा में पाया गया कि वार्ड संख्या 06, 11, 15, 17, 26, 27, 35, 37, 38, 39, 41, 43, 44 और 46 में नालों की सफाई सही तरीके से नहीं हुई। इन सभी वार्डों के जमादारों के कार्यों की समीक्षा में लापरवाही और निगरानी में कमी पाई गई। इसके बाद आयुक्त ने इनका वेतन रोकने का आदेश दिया। विशेष रूप से वार्ड 37 के जमादार को कार्य में रुचि न लेने और बैठक में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया है।
मानव बल एजेंसी पर 50,000 जुर्माना
नगर निगम द्वारा नियुक्त एजेंसी, जिसे सफाई कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी थी, वह भी अपने दायित्वों में विफल रही। इकरारनामा की शर्तों के उल्लंघन के चलते एजेंसी पर 50,000 का जुर्माना लगाया गया है। नगर आयुक्त ने चेतावनी दी कि भविष्य में अनुशासनहीनता पाई गई तो एजेंसी का अनुबंध भी समाप्त किया जा सकता है।
गठित हुई चार सदस्यीय जांच कमेटी
नगर निगम कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर जैसे वर्षों से जलभराव से ग्रसित स्थानों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह टीम 24 घंटे के भीतर स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपेगी और जलजमाव रोकने के स्थायी उपाय सुझाएगी।
दो पालियों में होगी सफाई, बनी क्विक रिस्पॉन्स टीम
तेज बारिश के दौरान जलनिकासी कार्य में तेजी लाने के लिए नगर निगम ने यूआईटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) का गठन किया है। यह टीम दो पालियों में कार्य करेगी और जरूरत के अनुसार मशीनों एवं मानव बल की मदद से जलनिकासी सुनिश्चित करेगी।
आयुक्त की सख्त चेतावनी
नगर आयुक्त ने साफ कहा कि प्रत्येक वार्ड की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित सफाईकर्मी की है। अगर सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाई गई तो सफाईकर्मी को पद से हटाकर जिम्मेदारी किसी अन्य को सौंपी जाएगी। आयुक्त ने निर्देश दिया कि अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी क्षेत्र बारिश के बाद जलमग्न न हो।
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आयुक्त ने की समीक्षा बैठक, अधिकारियों को लगाई फटकार
नगर आयुक्त द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में स्वच्छता पदाधिकारी समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इसमें उन वार्डों के जमादारों को विशेष रूप से तलब किया गया, जहां नाले की सफाई की स्थिति सबसे खराब पाई गई। बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि बरसात के दौरान जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह फेल रही, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। स्वच्छता पदाधिकारी ने बताया कि दो घंटे की तेज बारिश के बाद मुख्य स्थानों से जलभराव हटाने का दावा किया गया है, लेकिन नगर आयुक्त ने इसे असंतोषजनक मानते हुए कहा कि बारिश के एक घंटे के भीतर जल निकासी सुनिश्चित करना निगम की जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी नालों की नियमित और प्रभावी सफाई जरूरी है।
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पढ़ें: राज्य में जल संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन के लिए उपयोगी है 'वाटर एटलस', बैठक में कही गई ये बात
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14 वार्डों के जमादारों पर गिरी गाज
समीक्षा में पाया गया कि वार्ड संख्या 06, 11, 15, 17, 26, 27, 35, 37, 38, 39, 41, 43, 44 और 46 में नालों की सफाई सही तरीके से नहीं हुई। इन सभी वार्डों के जमादारों के कार्यों की समीक्षा में लापरवाही और निगरानी में कमी पाई गई। इसके बाद आयुक्त ने इनका वेतन रोकने का आदेश दिया। विशेष रूप से वार्ड 37 के जमादार को कार्य में रुचि न लेने और बैठक में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया है।
मानव बल एजेंसी पर 50,000 जुर्माना
नगर निगम द्वारा नियुक्त एजेंसी, जिसे सफाई कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी थी, वह भी अपने दायित्वों में विफल रही। इकरारनामा की शर्तों के उल्लंघन के चलते एजेंसी पर 50,000 का जुर्माना लगाया गया है। नगर आयुक्त ने चेतावनी दी कि भविष्य में अनुशासनहीनता पाई गई तो एजेंसी का अनुबंध भी समाप्त किया जा सकता है।
गठित हुई चार सदस्यीय जांच कमेटी
नगर निगम कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर जैसे वर्षों से जलभराव से ग्रसित स्थानों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह टीम 24 घंटे के भीतर स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपेगी और जलजमाव रोकने के स्थायी उपाय सुझाएगी।
दो पालियों में होगी सफाई, बनी क्विक रिस्पॉन्स टीम
तेज बारिश के दौरान जलनिकासी कार्य में तेजी लाने के लिए नगर निगम ने यूआईटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) का गठन किया है। यह टीम दो पालियों में कार्य करेगी और जरूरत के अनुसार मशीनों एवं मानव बल की मदद से जलनिकासी सुनिश्चित करेगी।
आयुक्त की सख्त चेतावनी
नगर आयुक्त ने साफ कहा कि प्रत्येक वार्ड की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित सफाईकर्मी की है। अगर सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाई गई तो सफाईकर्मी को पद से हटाकर जिम्मेदारी किसी अन्य को सौंपी जाएगी। आयुक्त ने निर्देश दिया कि अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी क्षेत्र बारिश के बाद जलमग्न न हो।