Bihar : नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली में सीरियल ब्लास्ट केस; 10 साल बाद गिरफ्तारी से कई बातें खुल रहीं
2013 Gandhi Maidan Patna Blasts Case : गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तब भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा थे। 2013 में धमाके हुए, 2021 में 9 आतंकियों को सजा मिली। अब फिर जाग उठा है यह केस।
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लोकसभा चुनाव 2014 की राजनीतिक तैयारियां 2013 में ही तेज हो गई थीं। प्रधानमंत्री पद पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से लाए गए चेहरे, यानी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पटना में 27 अक्टूबर 2013 को हुंकार रैली कर रहे थे। इस दिन की शुरुआत धमाके से हुई। सुबह पटना जंक्शन पर एक धमाका हुआ। तत्कालीन एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में पुलिस टीम का ध्यान उधर गया और इधर एक घंटे के दरम्यान छह धमाकों से गांधी मैदान गूंजता रहा। धमाकों में छह की मौत हुई थी। इस केस में 27 अक्टूबर 2021 को नौ अपराधियों को सजा दी गई। अब घटना के 19 महीने बाद 20 मई 2023 को उस आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जिसे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने तब हत्थे चढ़ने के बाद फरार बताया था। इतने लंबे समय बाद यह गिरफ्तारी सवालों के घेरे में भी है।
जब तीन दिन में रिहा हो गया 7 साल सजा पाने वाला
27 अक्टूबर 2021 को एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकियों नोमान अंसारी, हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी उर्फ अब्दुल्लाह, इम्तियाज अंसारी उर्फ आलम और मो. मोजिबुल्लाह अंसारी को फांसी की सजा सुनाई थी। दो आतंकियों उमर सिद्दीकी और अजहरुद्दीन को उम्रकैद दी गई थी। यह छह आतंकी IPC के सेक्शन 302, 120B के साथ UAPA की गंभीर धाराओं में दोषी पाए गए थे। एनआईए कोर्ट ने फिरोज आलम उर्फ पप्पू और अहमद हुसैन को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। छह आतंकियों को रांची बस स्टैंड पहुंचाने के कारण दोषी पाए गए इफ्तिखार आलम को 7 साल की सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाते समय तक इफ्तिखार 7 साल जेल में रह चुका था, इसलिए कागजी प्रक्रिया पूरी कर उसे 04 नवंबर 2021 को बेउर जेल से रिहा कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के थे आतंकवादी
जेल से बाहर आ चुका इफ्तिखार रांची का रहने वाला है। सजायाफ्ता आतंकी इम्तियाज अंसारी, मोजिबुल्लाह, नोमान अंसारी, हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी और फिरोज अलाम उर्फ पप्पू भी झारखंड का रहने वाला है। अजहरुद्दीन व उमेर सिद्दीकी छत्तीसगढ़ और अहमद हुसैन उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
फांसी की सजा वाले भी 19 महीने से जेल में बंद
कोर्ट ने तभी कहा है कि किसी आतंकी को विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करनी है तो वह 30 दिनों के अंदर कर लें, अन्यथा सजा पर अमल किया जाएगा। लेकिन, कानूनी प्रक्रिया का आलम यह है कि किसी-न-किसी आधार पर फांसी की सजा पाने वाले भी अबतक बाकी सजायाफ्ता की तरह जेल में हैं।
गवाह बनने के बाद फरार मेहरे अब क्यों गिरफ्तार
दरभंगा से शनिवार को इस केस में दोबारा गिरफ्तार किए गए आरोपी मेहरे आलम को लेकर अजीब स्थिति बनती दिख रही है। बड़ा सवाल है कि अगर वह गवाह बनने के बाद फिर फरार था तो लंबे समय से अपने घर में कैसे रह रहा था। गांधी मैदान ब्लास्ट के तत्कालीन जांच अधिकारी NIA के एसपी विकास वैभव थे, जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से काफी पहले लौट चुके हैं और अभी पुलिस मुख्यालय में बतौर IG पोस्टिंग की प्रतीक्षा में हैं। दरभंगा के एपीएम थाना क्षेत्र निवासी मेहरे आलम के पिता महमूद आलम ने कहा कि शनिवार की रात एपीएम थाना और मुजफ्फरपुर थाना की पुलिस आई औऱ मेहरे को गिरफ्तार कर साथ लेती गई। गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई गई। महमूद आलम के अनुसार "गांधी मैदान बम ब्लास्ट मामले में NIA ने उसे गिरफ्तार किया था। पटना-मुजफ्फरपुर, दोनों जगह खूब दौड़भाग किए तो गवाह बनने के बाद पुलिस ने छोड़ दिया। मैं ही मेहरे आलम को लेकर घर आया था। इतने लंबे समय से न कोई नोटिस आया, न कोई सम्मन, सीधे पुलिस उठाकर ले गई।"
क्यों हुई गिरफ्तारी, जिन्हें फांसी वह क्यों जेल में; जानें
NIA या STF की ओर से इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही, हालांकि कानून के जानकारों की मानें तो गवाह बनने के बाद भी फरार हो तो नया केस बन जाता है। गिरफ्तारी के बाद जमानत के बगैर छोड़े जाने की बात संभव नहीं है। जमानत पर छूटने वालों को भी नोटिस-सम्मन जाता है, नहीं हाजिर होने पर गिरफ्तारी का आदेश हो जाता है। जहां तक फांसी की सजा का सवाल है तो विशेष अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का रास्ता रहता है और फिर राष्ट्रपति से भी फरियाद का विकल्प रहता है। इसलिए, फांसी की सजा पाने वाले भी लंबे समय तक जेल में रह जाते हैं।