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Bihar: 3000 साल पुराने विकसित नगर के मिले सबूत! बलिराजगढ़ की खुदाई से सामने आया मिथिला का स्वर्णिम इतिहास

Sat, 04 Jul 2026 10:40 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधुबनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधुबनी Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Sat, 04 Jul 2026 10:40 PM IST
सार

मधुबनी के ऐतिहासिक बलिराजगढ़ में चल रही वैज्ञानिक खुदाई के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवारें, आंगन, फर्श, कुआं, जल निकासी प्रणाली, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तियां और अन्य महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले हैं। 

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बलिराजगढ़ से मिले प्राचीन सभ्यता के अहम प्रमाण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ से मिथिला के गौरवशाली अतीत के नए प्रमाण सामने आए हैं। उत्खनन के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवारें, आंगन, फर्श, कुआं, जल निकासी प्रणाली, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तियां और कई महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले हैं। इस बीच जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने बताया कि केंद्र सरकार अगले 10 वर्षों तक यहां वैज्ञानिक खुदाई कराने, एएसआई का कार्यालय खोलने और संग्रहालय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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बलिराजगढ़ से मिले प्राचीन सभ्यता के अहम प्रमाण

मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल से अनेक बहुमूल्य संरचनात्मक अवशेष और प्राचीन वस्तुएं प्राप्त हुई हैं। 28 मार्च को इस उत्खनन कार्य का विधिवत शुभारंभ राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने किया था। अब तक की खुदाई में प्राचीन ईंटों की दीवारें, आंगन, फर्श, कुआं, विशेष जल निकासी प्रणाली, बर्तन, सिक्के, मुहरें और मिट्टी की मूर्तियां सहित कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिले हैं।

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संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने बलिराजगढ़ में छह खाइयों में चल रही खुदाई में उल्लेखनीय प्रगति के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और मधुबनी जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों से प्राप्त जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में खुदाई मुख्य रूप से किले की दीवार और उसके दक्षिणी हिस्से में केंद्रित है।

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उत्खनन में मिलीं कई महत्वपूर्ण संरचनाएं

संजय कुमार झा के अनुसार खुदाई के दौरान सात परतों वाली ईंटों की संरचना, आंगन, फर्श, रिंग वेल (कुआं), विशेष जल निकासी प्रणाली और सोख्ता गड्ढा मिला है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के बर्तन, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तियां, खिलौने और पत्थर की गेंदें भी मिली हैं। उनका कहना है कि ये अवशेष इस क्षेत्र की प्राचीन समृद्ध संस्कृति और विकसित जीवनशैली के प्रमाण हैं।

अगले 10 वर्षों तक होगी वैज्ञानिक खुदाई

पर्यटन, परिवहन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से बातचीत की। सचिव ने जानकारी दी कि मंत्रालय बलिराजगढ़ में अगले 10 वर्षों तक लगातार वैज्ञानिक उत्खनन कराने, एएसआई का कार्यालय स्थापित करने और संग्रहालय के निर्माण की दिशा में कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले 19 मई को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर उन्होंने बलिराजगढ़ के संरक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन पर विस्तृत चर्चा की थी। उन्होंने बलिराजगढ़ को मिथिला की प्राचीन सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया था।

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राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग

संजय कुमार झा ने केंद्रीय मंत्री को पत्र सौंपकर अगले 10 वर्षों तक चरणबद्ध वैज्ञानिक उत्खनन, शोधकर्ताओं के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने, एएसआई के पटना सर्किल को संरक्षण की जिम्मेदारी देने तथा बलिराजगढ़ को एएसआई के स्वतंत्र सब-सर्किल के रूप में विकसित करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्खनन और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण से मिथिला और बिहार के गौरवशाली इतिहास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इससे पर्यटन, शोध और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।

जिलाधिकारी ने भी जताई खुशी

जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने भी बलिराजगढ़ में उत्खनन के दौरान मिली मूर्तियां, ईंटें, बर्तन और जल संग्रहण प्रणाली जैसी संरचनाओं पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर है। अब तक मिले प्रमाण करीब 3000 वर्ष पुराने विकसित नगर होने की ओर संकेत करते हैं।

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