Bankipur Vidhan Sabha: 7717 और 98299 का अंतर पाट सकेंगे प्रशांत किशोर? राजद से पार पाना भी होगा चुनौती
Bihar Election: बिहार में एक ही सीट पर उप चुनाव होना है, लेकिन माहौल गरमाया हुआ है। बांकीपुर सीट परंपरागत रूप से भाजपा के पास है। राजद यहां से जीत का दावा कर रहा है। और, जन सुराज पार्टी तो समुद्र लांघने जैसे लक्ष्य की बात कर रही है।
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों से यह सीट सुर्खियों में हैं। कारण है कि इस सीट से चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर का मैदान में उतरना। जनसुराज नवंबर 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी पिछले कुछ महीनों से यहां पूरी तरह सक्रिय है। प्रशांत किशोर लगातार चुनावी सभा कर रहे हैं। चर्चा है कि प्रशांत किशोर ही यहां से चुनाव लड़ें। अब सवाल उठता है कि लंबे समय से भाजपा के पास रही इस सीट पर प्रशांत किशोर क्यों जीत का दावा कर रहे हैं। अगर वह चुनाव में उतरेंगे तो महागठबंधन को गौण करना पड़ेगा क्या? किस जाति का वोट यहां निर्णायक होता है? आंकड़े क्या कह रहे हैं? इन सब सवालों का जवाब जानते हैं इस खबर में...
सबसे पहले जानते हैं 2025 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बारे में...
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या-182) से भारतीय जनता पार्टी के नितिन नवीन ने लगातार एक और जीत दर्ज करते हुए 98,299 वोट (62.66% वोट शेयर) हासिल किए। राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 46,363 वोट (29.55% वोट शेयर) मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी की वंदना कुमारी को 7,717 वोट (4.92% वोट शेयर) प्राप्त हुए, जबकि अन्य उम्मीदवारों और नोटा को शेष वोट मिले। नितिन नवीन ने रेखा कुमारी को 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा। भाजपा प्रत्याशी नितिन नवीन और जनसुराज प्रत्याशी वंदना कुमारी के बीच वोटों का अंतर 90,582 का था। वहीं वोट शेयर का अंतर: 57.74 प्रतिशत अंक था।
प्रशांत किशोर के लिए जीत हासिल करना काफी मुश्किल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। यहां पर कायस्थ वोटर हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहते हैं। ऐसे में अगर ब्राह्मण जाति से आने वाले प्रशांत किशोर अगर चुनावी मैदान में उतरते हैं और भाजपा किसी कायस्थ चेहरे को मैदान में उतारे तो प्रशांत किशोर के लिए यहां जीत हासिल करना काफी मुश्किल होगा। भाजपा के पास बांकीपुर सीट का करीब 63 फीसदी वोट शेयर है। और, प्रशांत किशोर के बाद करीब पांच फीसदी। यह अंतर काफी बड़ा है। 30 जुलाई को चुनाव होना है कि ऐसे में प्रशांत किशोर के लिए वोट शेयर बढ़ाना काफी चुनौती भरा काम होगा।
अब जानिए बांकीपुर सीट के इतिहास को...
पहली बार चुनाव में कांग्रेस को मिली थी जीत?
- बांकीपुर सीट पहले पटना पश्चिम सीट नाम से जानी जाती थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट अस्तित्व में आई। वहीं, पटना पश्चिम सीट पर पहली बार चुनाव 1957 में चुनाव हुआ था। 1957 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम सीट से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के रामसरन साओ ने निर्दलीय दामोदर प्रसाद को 3,771 वोट से हराया था। रामसरन को कुल 8,813 वोट मिले थे। वहीं, दामोदर को 5,042 वोट मिले थे। 1962 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय को जीत मिली। उन्होंने जनसंघ के मुंशी साहो को 22,288 वोट से हराया। इस चुनाव में सहाय को कुल 27,925 वोट मिले। वहीं, मुंशी साहो को 5,637 वोट से संतोष करना पड़ा। पटना पश्चिम से विधायक रहते हुए केबी सहाय बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 2 अक्तूबर 1963 को मुख्यमंत्री के लिए शपथ ली और 1967 तक इस पद पर बने रहे। 1967 के विधानसभा चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री केबी सहाय को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जन क्रांति दल महामाया प्रसाद सिन्हा ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के केबी सहाय को 20,729 वोट से हराया।
वामदल को भी इस सीट पर जीत मिली?
- 1969 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम सीट से भाकपा को जीत मिली। भाकपा के एके सेन ने जनसंघ के राम प्रसाद लाल को 1,705 वोट से हराया। सेन को कुल 17,051 वोट मिले। वहीं, राम प्रसाद को 15,346 वोट मिले। 1972 के चुनाव में एक बार फिर भाकपा ने पटना पश्चिम सीट पर कब्जा जमाया। हालांकि, चेहरा बदल गया। इस बार भाकपा ने सुनील मुखर्जी को चुनावी मैदान में उतरा। मुखर्जी ने जनसंघ के शैलेंद्र एन. श्रीवास्तव को 3,375 वोट से मात दी। मुखर्जी को कुल 29,537 वोट मिले। वहीं, शैलेंद्र को 26,162 वोट से संतोष करना पड़ा। 1977 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम सीट से जनता पार्टी के ठाकुर प्रसाद ने जीत हासिल की। उन्होंने भाकपा के सुरेंद्र प्रसाद यादव को 30,115 वोट से मात दी। ठाकुर प्रसाद को कुल 45,935 वोट मिले। वहीं, सुरेंद्र यादव को मात्र 15,820 वोट मिले। 1980 के चुनाव में पटना पश्चिम से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के रंजीत सिन्हा जीते। उन्होंने कांग्रेस (यू) के कृष्ण नंदन साहा को 1,641 वोट से हराया। पटना पश्चिम विधानसभा सीट से 1985 और 1990 में उम्मीदवार राम नंदन प्रसाद उर्फ रामनंदन यादव को जीत मिली। 1985 में उन्होंने माकपा के योगेश्वर गोप को 10,210 वोट से हराया। 1990 के विधानसभा चुनाव में राम नंदन ने जनता दल के रामकृपाल यादव को 3,239 वोट से शिकस्त दी। राम नंदन को कुल 35,083 और रामकृपाल को 31,844 वोट मिले।
1995 में पहली बार भाजपा को मिली थी जीत
- 1995 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम सीट से भाजपा को पहली जीत मिली। 1995 के चुनाव में भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने जनता दल उम्मीदवार और तत्कालीन विधायक रामानंद यादव को 5,584 वोट से हराया। उन्हें कुल 64,619 वोट मिले। वहीं, रामानंद को कुल 59,035 वोट मिले। 2000 के चुनाव में नवीन किशोर ने 36,857 वोट से जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने राजद के शिव नाथ यादव को मात दी। नवीन को कुल 84,096 वोट मिले। वहीं, शिव नाथ को 47,239 वोट मिले। बिहार में 2005 में दो बार चुनाव करना पड़ा था। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। फरवरी के चुनाव में नवीन ने राजद के राम ईश्वर प्रसाद को 72,509 वोट से हराया। उन्हें कुल 1,03,462 वोट मिले। वहीं, राम ईश्वर को मात्र 30,953 वोट मिले। अक्तूबर के चुनाव में नवीन ने 86,119 वोट से जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के राजेश कुमार सिन्हा रहे। नवीन को कुल 1,17,915 वोट मिले। और राजेश को मात्र 31,796 मिले।
पटना पश्चिम की जगह बांकीपुर अस्तित्व में आई
- पटना पश्चिम सीट पर 2006 में नवीन किशोर के निधन के कारण उपचुनाव कराने पड़े। इस चुनाव में नवीन किशोर के बेटे नितिन नवीन ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के अजय कुमार सिंह को 65,167 वोट से हराया। इसके बाद 2008 में बिहार में सीटों का नए सिरे से परिसीमन हुआ। इस परिसीमन के बाद पटना पश्चिम सीट का अस्तित्व खत्म हो गया। पटना पश्चिम की जगह बांकीपुर सीट अस्तित्व में आई। 2010 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर सीट पर पहली बार चुनाव हुए। इसमें भी नितिन नवीन ही चुनाव जीते। तब से लेकर अंतिम विधानसभा चुनाव 2025 तक भाजपा को ही जीत मिली। यह सीट बिहार की सबसे प्रतिष्ठित शहरी सीटों में मानी जाती है। भाजपा ने पहले नवीन किशोर सिन्हा और फिर नितिन नवीन के माध्यम से तीन दशक से अधिक समय तक इस क्षेत्र में अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाए रखा है।
राजद का वोट शेयर भी प्रशांत किशोर के लिए चुनौती
बांकीपुर उपचुनाव में 2005 से 2025 तक हुए विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में राजद और कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी नही है। 2010 में लोजपा दूसरे नंबर पर रही थी। पिछले चुनाव में राजद की रेखा कुमारी को 46,363 वोट मिले थे। उनका वोट शेयर करीब 30 फीसदी था। राजद और मुस्लिम वोट की संख्या अच्छी संख्या होने के कारण राजद को वोट शेयर 30 फीसदी पहुंचता है। ऐसे में अगर राजद इस बार भी अगर मजबूत उम्मीदवार देता है तो यह प्रशांत किशोर के लिए बड़ी चुनौती होगी।
जनसुराज ने प्रशांत किशोर की जीत का दावा किया
जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि यहां से अपनी पार्टी की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि हमलोगों ने एक महीने तक बांकीपुर की जनता से फीडबैक लिया और उसी आधार पर जन सुराज के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने प्रशांत किशोर की यहां से जीत सुनिश्चित मानते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाने की तैयारी की है। मनोज भारती ने कहा कि बांकीपुर के लोगों में केंद्र व राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। लोग इस सरकार से परेशान हैं और उसे सबक सिखाने के लिए वह प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी चाहते हैं। पार्टी नेताओं का भी यही मानना है कि जन सुराज के सूत्रधार इस चुनाव में उतरें।