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Bihar : तेजस्वी जिसे बता रहे सेक्स एजुकेशन, क्या सीएम नीतीश कुमार उसे बिहार बोर्ड के लिए किताबों में जोड़ेंगे?

Wed, 08 Nov 2023 11:39 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 08 Nov 2023 11:39 AM IST
सार

Bihar News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को बिहार विधानमंडल में एक ही बात दो बार कही, मतलब 'जुबान फिसली' वाली बात नहीं थी। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे सेक्स एजुकेशन कहा। अब सवाल उठ रहा कि क्या इसे बिहार बोर्ड के पाठ्यक्रम में रखा जाएगा?

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Bihar News: May bihar bihar board include sex education on the basis of nitish kumar statement viral video
सीएम नीतीश कुमार ने बयान को डिप्टी सीएम ने सेक्स एजुकेशन कहा था। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले दिनों भगवान के नाम पर आयी एक फिल्म में सेक्स एजुकेशन पर बहुत कुछ दिखाया-बताया गया। लेकिन, शादी के बाद गर्भ रोकने का जो उपाय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानमंडल में बताया, वह इंटरनेट पर उपलब्ध बाकी जानकारी से भी आगे है। अगर वह एक बार बोलते तो कहा जाता कि जुबान फिसली थी। लेकिन, सीएम ने बिहार विधानसभा में जो बातें कही, उससे ज्यादा खोलकर विधान परिषद् में कह दिया था। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे सेक्स एजुकेशन कहा। अब समाज से लेकर सोशल मीडिया तक सवाल यह उठ रहा है कि अगर यह सेक्स एजुकेशन है तो क्या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, यानी बिहार बोर्ड के सिलेबस में इसे इसी तरह जोड़ा जाएगा?

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सोशल मीडिया पर सीएम का वीडियो वायरल
मुख्यमंत्री ने प्रजनन रोकने में शिक्षा का फायदा बताते हुए जो कहा, 'अमर उजाला' उसे शब्दश: नहीं लिख सका। चूंकि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे सेक्स एजुकेशन कहा, इसलिए कुछ बातों को छिपाते हुए मुख्यमंत्री की वह बातें पढ़िए- "पुरुष है वह तो रोज रात में (इशारा)  ###, उसके साथ वह रोज (इशारा)  ### है न! त उसी में वह  ### हो जाता है। लड़की पढ़ लेती है तो उसे पता होता कि वह  ### ठीक है, लेकिन अंतिम में  ### उसको ### कर दो।" मुख्यमंत्री की बातें हम न तो लिख सके और न वीडियो में दिखा सके, क्योंकि बिहार ही नहीं, भारत में भी अबतक किसी ने इस तरह शादी के बाद वाली पूरी प्रक्रिया खोलकर नहीं बताई थी। किसी राजनेता या किसी राज्य के मुख्यमंत्री ने तो नहीं ही। खैर, यह वीडियो वायरल है। लोगों तक पहुंचा हुआ है। ऐसे में वीडियो के साथ सवाल भी आ रहा है कि अगर यह सेक्स एजुकेशन है तो क्या इसे सिलेबस में डाला जाएगा? सोशल मीडिया पर हजारों की तादाद में ऐसी प्रतिक्रिया है, जो एक जिम्मेदार मीडिया नहीं प्रकाशित कर सकता।
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महिला समाज ने कहा- एजुकेशन नहीं, यह अश्लीलता
सेक्स एजुकेशन को लेकर कई स्तर पर आंदोलन कर चुकीं पत्रकार और बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष निवेदिता कहती हैं- "जिन्हें यह सेक्स एजुकेशन लग रहा है, उन्हें जेंडर की पढ़ाई करानी चाहिए। जो सदन में मुख्यमंत्री की इन अश्लील बातों पर हंस रहे थे, उन्हें सामने आकर महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। यह एजुकेशन कतई नहीं हो सकता है। शरीर के अंगों के बारे में पढ़ाना अलग बात है और ऐसे बॉडी लैंग्वेज से इस तरह की बातें कहना अश्लीलता है। मुख्यमंत्री ने जो कुछ भी कहा, किया या बताया और उसपर जिस तरह सदन में बाकी सदस्य मजा ले रहे थे, वह सदन में पुरुष वर्चस्व को दिखाता है। मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए। सदन की कार्यवाही से इसे हटाया जाना चाहिए।" चाणक्या स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा ने बच्चों की शिक्षा पर लंबे समय तक काम किया है। वह कहते हैं- "जिस तरह का एजुकेशन मुख्यमंत्री दे रहे थे, अब इंटरनेट पर वही वायरल है। यह तेजस्वी यादव को ही एजुकेशन लग रहा होगा, बाकी किसी को नहीं लगा। यह सेक्स एजुकेशन नहीं है। जो है, वह बोला नहीं जा सकता।"

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