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भागलपुर में बाढ़ का कहर: 6.65 लाख लोग प्रभावित, कई गांव गंगा में समाए; पलायन करने को मजबूर हुए रहवासी

Wed, 13 Aug 2025 03:11 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 13 Aug 2025 03:11 PM IST
सार

Bihar: तटबंध और गंगा नदी के बीच बसे परिवार अपने बचे हुए सामान के साथ सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की टीम बोरी, बांस की डालियां और मिट्टी डालकर बांध को बचाने की कोशिश कर रही है। विभागीय इंजीनियरों के अनुसार, बांध का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कट चुका है और शेष हिस्से को मजबूती प्रदान की जा रही है।

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Bihar News: Flood havoc in Bhagalpur 6.65 lakh people affected many villages submerged in Ganga
बाढ़ का कहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भागलपुर जिले के 12 प्रखंड की 110 पंचायत और शहरी क्षेत्र के गंगा किनारे बसे चार वार्ड (वार्ड संख्या 1, 3, 9 और 10) में बाढ़ का पानी फैल गया है। जिला प्रशासन के अनुसार, लगभग 6.65 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार से भागलपुर और कहलगांव में गंगा का जलस्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है।

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गोपालपुर प्रखंड के इस्माइलपुर-सैदपुर बिंदटोली रिंग बांध को गंगा की तेज धार ने कई हिस्सों में तोड़ दिया, जिससे बिंदटोली गांव के दर्जनों घर नदी में समा गए। करीब 3400 लोग बेघर हो गए हैं। तटबंध और गंगा नदी के बीच बसे परिवार अपने बचे हुए सामान के साथ सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की टीम बोरी, बांस की डालियां और मिट्टी डालकर बांध को बचाने की कोशिश कर रही है। विभागीय इंजीनियरों के अनुसार, बांध का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कट चुका है और शेष हिस्से को मजबूती प्रदान की जा रही है। तटबंध में कटाव की सूचना से आसपास की 12 पंचायतों के 60 से अधिक गांवों में दहशत है। यदि करीब 300 मीटर लंबा हिस्सा टूट जाता है, तो सैदपुर, गोपालपुर, तिनटंगा और नवगछिया तक बाढ़ का पानी फैल सकता है।

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सबौर प्रखंड के बरारी, रजदीपुर, फरका, ममलखा, शंकरपुर और लैलख में बाढ़ की मार सबसे ज्यादा है। इन इलाकों में घर और सामान बर्बाद हो चुके हैं, एप्रोच पथ टूट गया है और नाव ही एकमात्र सहारा है। चारे की कमी से पशुपालक परेशान हैं। नाथनगर प्रखंड के दिलदार बिंद टोली में सड़क पर पांच फीट तक पानी बह रहा है और लोग छत पर टेंट लगाकर रह रहे हैं। जलजीवों के खतरे से ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं। स्वच्छ पेयजल की किल्लत है और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई नावें पर्याप्त नहीं हैं।

उधर, तिलकामांझी विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज और रिवर फ्रंट के आसपास का इलाका भी पानी में डूबने लगा है। बाढ़ का पानी बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में घुस चुका है, जबकि सखीचंद घाट मोहल्ला पूरी तरह जलमग्न है। जिले के सुल्तानगंज, नाथनगर, नारायणपुर, रंगरा, शाहकुंड और सबौर प्रखंड पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि कहलगांव, पीरपैंती और जगदीशपुर आंशिक रूप से प्रभावित हैं। विभिन्न प्रखंडों में हजारों की आबादी बाढ़ से घिरी हुई है और प्रशासन राहत कार्य में जुटा है।

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