‘धरती पकड़’ की अंतिम विदाई: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव लड़कर बटोरी थी सुर्खियां
भागलपुर के चर्चित समाजसेवी और चुनावी चेहरे नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। 1997 में अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ 100 गधों के साथ चुनाव लड़कर वे देशभर में चर्चित हुए थे।
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अपने अनोखे अंदाज, बेबाक व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के लिए अलग पहचान बनाने वाले भागलपुर के चर्चित समाजसेवी एवं चुनावी चेहरे नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। पटना में निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर भागलपुर लाया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। वर्ष 1997 में लखनऊ से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ 100 गधों के साथ चुनाव लड़कर उन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
नम आंखों से दी अंतिम विदाई
शुक्रवार को भागलपुर में नागरमल बाजोरिया की अंतिम यात्रा में शहर के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। परिजनों, शुभचिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा के दौरान हर किसी की जुबान पर उनसे जुड़े किस्से थे। लोगों ने कहा कि ‘धरती पकड़’ भले ही आज इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनका व्यक्तित्व हमेशा याद रखा जाएगा।
अटल जी के खिलाफ चुनाव लड़कर बने थे देशभर में चर्चा का विषय
नागरमल बाजोरिया को सबसे अधिक पहचान वर्ष 1997 में मिली, जब उन्होंने लखनऊ से तत्कालीन प्रधानमंत्री और देश के लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। नामांकन और चुनाव प्रचार के दौरान वे अपने साथ 100 गधों का काफिला लेकर निकले थे। उनका यह अनोखा अंदाज राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा और ‘धरती पकड़’ नाम पूरे देश में मशहूर हो गया। उन्होंने अपने जीवन में कई चुनाव लड़े, लेकिन जीत उनके हिस्से में कभी नहीं आई।
याददाश्त थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
भागलपुर के लोगों का कहना है कि नागरमल बाजोरिया की याददाश्त गजब की थी। वे एक बार जिससे मिल लेते थे, वर्षों बाद भी उसे नाम लेकर पुकारते थे। यही वजह थी कि हर वर्ग के लोगों से उनका आत्मीय रिश्ता बना रहता था। उनका मिलनसार स्वभाव और सहज व्यवहार लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता था।
सामाजिक कार्यों से बनाई अलग पहचान
चुनावी राजनीति के अलावा नागरमल बाजोरिया सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे। शहर के विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रहती थी और वे आम लोगों के बीच अपनी सादगी तथा बेबाक शैली के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने अलग व्यक्तित्व से भागलपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाई।
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पटना में निधन के बाद गुरुवार देर शाम उनका पार्थिव शरीर भागलपुर स्थित आवास लाया गया था। शुक्रवार को पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शहरवासियों का कहना है कि नागरमल बाजोरिया केवल एक चुनावी उम्मीदवार नहीं, बल्कि भागलपुर की पहचान थे। उनका निधन शहर के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास के एक यादगार अध्याय का अंत है। उनके किस्से, उनका अंदाज और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।