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Old Cars: दिल्ली में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध का क्या हुआ? 2015 से 2025 तक, कैसा रहा कई उतार-चढ़ावों वाला दशक

Wed, 13 Aug 2025 04:50 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 13 Aug 2025 04:50 PM IST
सार

दिल्ली-एनसीआर में डीजल गाड़ियों (10 साल से पुरानी) और पेट्रोल गाड़ियों (15 साल से पुरानी) पर करीब 10 साल पहले लगे बैन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत दे दी है। एनजीटी के आदेश से शुरू हुए इस मामला से लेकर सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्देशों तक, यहां हम आपको इस पूरे विवाद की डिटेल्स के बारे में बता रहे हैं।

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Delhi’s Decade-Long Battle Over Old Vehicle Ban Takes a New Turn in Supreme Court
Delhi Traffic - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में डीजल गाड़ियों (10 साल से पुरानी) और पेट्रोल गाड़ियों (15 साल से पुरानी) पर करीब 10 साल पहले लगे बैन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ अभी कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। 
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मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति विनोद के चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की सदस्यता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने अपने आदेश में प्रतिबंध को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया।
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यह प्रतिबंध राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2015 के आदेश से शुरू हुआ। एनजीटी के आदेश से शुरू हुए इस मामला से लेकर सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्देशों तक, यहां हम आपको इस पूरे विवाद की डिटेल्स के बारे में बता रहे हैं।
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मामला कहां से शुरू हुआ? (2015: NGT का आदेश)
2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) (एनजीटी) ने आदेश दिया कि 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियां और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियां दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर नहीं चलेंगी, ताकि प्रदूषण कम किया जा सके। 

इससे पहले, नवंबर 2014 में एनजीटी ने पुराने वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई थी और कहा था कि 15 साल से पुरानी गाड़ियां सार्वजनिक जगहों पर खड़ी भी नहीं की जा सकतीं। अगर पाई गईं तो पुलिस उन्हें टो करेगी और चालान काटेगी।

जब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो कोर्ट ने इसे बरकरार रखा और कहा कि, "एक ट्रिब्यूनल लोगों की भलाई के लिए कुछ कर रहा है, हमें इसे रोकना नहीं, बल्कि मदद करनी चाहिए।"

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2018: सुप्रीम कोर्ट ने बैन को बरकरार रखा
29 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को सही ठहराते हुए दिल्ली में 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पाबंदी को बरकरार रखा। कोर्ट ने दिल्ली की खराब होती हवा और लोगों की सेहत की चिंता को वजह बताया। 

कोर्ट ने दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट विभाग को ऐसे वाहनों की पहचान कर तुरंत जब्त करने का आदेश दिया। साथ ही, अखबारों में विज्ञापन देने और 10 साल से पुरानी डीजल कमर्शियल गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

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2021-22: स्क्रैपिंग पॉलिसी आई
2021 में केंद्र सरकार ने वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी लागू की, जिसमें पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए प्रोत्साहन और दंड, दोनों का प्रावधान था। 

2022 में अनिवार्य फिटनेस टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हुई, जो ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) (एटीएस) के जरिए होती है। और इसके लिए टैक्स में छूट जैसे प्रावधान भी जोड़े गए।

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2023-24: दायरा बढ़ा, दिल्ली के नियम आए
2023 में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी (RVSF) (आरवीएसएफ) और एटीएस का नेटवर्क देशभर में बढ़ाया गया। 

2024 में दिल्ली सरकार ने एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इसमें कहा गया कि जो पुराने वाहन अवैध रूप से सड़कों पर चल रहे हैं या सार्वजनिक जगहों पर खड़े हैं, उन पर कार्रवाई हो। साथ ही, मालिक चाहें तो उन्हें ऐसे राज्यों में बेच सकते हैं जहां यह प्रतिबंध लागू नहीं है।

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2025: 'नो फ्यूल' आदेश और बवाल
जुलाई 2025 में दिल्ली सरकार ने आदेश दिया कि पेट्रोल पंप 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को ईंधन न दें। यह निर्देश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) (सीएक्यूएम) के आदेश के तहत आया। 

योजना के मुताबिक, 350 पेट्रोल पंपों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात होनी थी। और पंपों पर इस नियम की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाने थे।

लेकिन जनता के विरोध के बाद दिल्ली सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया और नए निर्देशों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा कि ऐसे वाहनों के मालिकों पर फिलहाल कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। 

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